गुजरात पुलिस का आतंक, दलित युवक की बर्बर पिटाई

आईएनएन भारत डेस्क
अहमदाबादः अहमदाबाद शहर के कागडापिठ पुलिस थाने के पुलिसकर्मियों ने उमेश सोलंकी नाम के दलित युवक को पेड के साथ बांधकर तब तक मारा की जब तक वह बेहोश न हो जाए। गुजरात में दलित उत्पीड़न का यह कोई पहला और अकेला मामला नही है। गुजरात अब धीरे धीरे दलित उत्पीड़न की उर्वरा जमीन बनता जा रहा है।

गुजरात में आये दिन इस प्रकार की घटनाएं घट रही हैं। ना केवल भगवा राजनीति के गरूर में सराबोर अगडी जातियों के लोग बल्कि कानून के रखवाले पुलिस वाले भी अब इस दलित उत्पीड़न में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा ऐसे घटनाएं मेनस्ट्रीम मीड़िया से अक्सर नादारद ही रहती हैं। हाल ही में इस घटना का हवाला गुजरात के विधायक और चर्चित दलित नेता जिग्नेश मेवाणी के फेसबुक से मिला। जिसमें जिग्नेश ने ना केवल पूरी घटना का विवरण दिया बल्कि इस घ्टना के पीड़ित युवा उमेश सोलंकी का वीड़ियो और फोटो भी अपनी वाॅल पर शेयर किये हैं।

साथ ही जिग्नेश ने गुजरात के दलित भाईयों से अपील करते हुए कहा कि पूरे गुजरात के दलित भाइयों से अपील है कि भाजपा के शासन में हो रहे हर एक अत्याचार का 2019 में जवाब दिया जाए और हमारे इस बेगुनाह भाई पर हमला करनेवाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी करवाई की मांग की जाए। यदि दलित समाज का यह व्यक्ति किसी गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल हो तब भी पुलिस का कोई अधिकार नहीं बनता की वह इस प्रकार कानून अपने हाथ में ले।

उन्होंने अपनी पोस्ट में दूसरी घटनाओं का भी हवाला दिया और बताया कि 2 दिन पहले की अहमदाबाद शहर में एक मुस्लिम समाज के हमारे भाई की कस्टडी में हत्या कर दी गई, कुछ महीनों पहले शहर के छारा नगर के छारा समाज के लोगों के घरों में घुसकर पिटाई की थी और दर्जनो लोगों के हाथ पैर तोड़ दिए थे और उस के भी 3 महीने पहले अहमदाबाद के भुदरपुरा इलाके में घर में घुसकर दलित बहनों तक को मारा-पीटा था। बावजूद उसके आजतक एक भी पुलिसकर्मी को सस्पेंड तक नहीं किया गया।
आगे अपनी अपील में जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि सारे दलित कार्यकर्ता और संगठनों से अपील है कि इन चारों घटनाओं के खिलाफ एकजुटता दिखाकर एक आन्दोलन का काल दिया जाए। बिना लडे कुछ हासिल होनेवाला नहीं – न रोटी, न आत्मसन्मान।