लड़कियों का पहला स्कूल खोलने वाले महान विचारक व दार्शनिक ज्योतिबा फूले के जीवन से जुड़ी 10 बातें….

आज ज्‍योतिराव गोविंदराव फुले (Jyotirao Phule) की आज पुण्यतिथि है। ज्योतिबा फुले सिर्फ नाम नहीं, एक विचार है। रूढ़िवादी विचारों और धर्मान्ध भारत वासियों के जीवन मे दीपक जलाने का कार्य इस महान भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक और क्रांतिकारी ने की। ज्‍योतिराव फुले को “महात्मा फुले” (Mahatma Phule) और “ज्‍योतिबा फुले” (Jyotiba Phule) के नाम से भी जाना जाता है। “महात्मा फुले” ने महिलाओं और दलितों के उत्थान के लिए के लिए अनेक कार्य किए थे। ज्‍योतिबा फुले भारतीय समाज में प्रचलित जाति पर आधारित विभाजन और भेदभाव के विरुद्ध थे।

ज्‍योतिराव फुले की पुण्यतिथि के मौके पर उनके जीवन से जुड़ी 10 बातें:-

1. महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को पुणे में हुआ था। उनकी माता का नाम चिमणाबाई और पिता का नाम गोविन्दराव था।

2. उनका परिवार कई पीढ़ी पहले सतारा से पुणे आकर फूलों का गजरे बनाने का काम करने लगा था, जिसके चलते उनकी पीढ़ी ‘फुले’ के नाम से जानी जाती थी। जब ज्‍योतिबा सिर्फ एक साल के थे तभी उनकी मां का देहांत हो गया।

3. ज्‍योतिबा फुले (Jyotiba Phule) ने कुछ समय तक मराठी में पढ़ाई की, बीच में पढाई छूट गई और बाद में 21 वर्ष की उम्र में अंग्रेजी की सातवीं कक्षा की पढाई पूरी की।

4. महात्मा फुले (Mahatma Phule) का विवाह मात्र 13 वर्ष की आयु में सावित्री बाई से हुआ था।

5. समाज में स्त्रियों की दशा सुधारने और समाज में उन्‍हें पहचान दिलाने के लिए उन्‍होंने सन 1854 में एक स्‍कूल खोला। जो लड़कियों के लिए खोला गया था। इस तरह का देश मे पहला स्कूल खोल गया था। उन लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली। ज्योतिबा फुले ने अपनी पत्नी सावित्री को पढ़ा कर पढ़ने योग्य बनाया। समाज के कुछ लोगों ने उनके पिता पर दबाव बनाकर पत्‍नी समेत उन्‍हें घर से बाहर निकलवा दिया। इन सबके बावजूद ज्‍योतिबा का हौसला डगमगाया नहीं और उन्‍होंने लड़कियों के तीन-तीन स्‍कूल खोल दिए।

6. गरीबो और निर्बल वर्ग को न्याय दिलाने के लिए ज्योतिबा ने ‘सत्यशोधक समाज’ स्थापित किया।  उनकी समाज सेवा से प्रभावित होकर 1888 में मुंबई की एक सभा में उन्‍हें ‘महात्‍मा’ की उपाधि से नवाजा गया।

7. ज्योतिबा ने ब्राह्मण-पुरोहित के बिना ही विवाह-संस्कार आरंभ कराया और इसे मुंबई हाईकोर्ट से भी मान्यता मिली। बाल-विवाह विरोधी और विधवा-विवाह के समर्थक थे।

8. ज्योतिबा फूले ने ब्राह्मणवाद का ही नहीं बल्कि सभी कर्म कांडों का विरोध किया। पूर्व जन्म के कर्म और स्वर्ग-नरक की अवधारणा को भी सिरे से नकारा। जिसके कारण समाज के लोगों ने इनका बहिष्कार किया।

9. उन्‍होंने दलितों के उत्थान के लिए अनेक कार्य किए। उन्होंने दलितों के बच्‍चों को अपने घर में पाला और उनके लिए पानी की टंकी भी खोल दी। नतीजतन उन्‍हें जाति से बहिष्‍कृत कर दिया गया।

10. ज्योतिबा फुले और उनके संगठन सत्‍यशोधक समाज के संघर्ष के कारण ही सरकार ने एग्रीकल्‍चर एक्‍ट पास किया।