मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में लीपापोती कर रही नीतीश सरकार

हमारे विशेष संवाददाता द्वारा
नेता प्रतिपक्ष, पूर्व उप-मुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड में पर लीपा-पोती कर रहे हैं। उन्होंने नीतीश सरकार पर साफ साफ इस मामले को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में लीपापोती को शर्मनाक बतायें जाने और नीतीश सरकार को फटकार लगाये जाने के बाद तेजस्वी यादव अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे।

बता दें कि 27 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड मामले की जांच में ढिलाई बरतने को लेकर बिहार सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले को लेकर बिहार सरकार का रूख नरम है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस रवैये को शर्मनाक बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को इसमें दर्ज एफआईआर को बदलने का आदेश दे दिया है। कोर्ट की नाराजगी का अंदाजा इसे से लगाया जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से अगले 24 घंटे में इस मामले में रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने को कह दिया है।

कोर्ट ने बेहद कडे और तल्ख अंदाज में नीतीश सरकार से कहा कि आप क्या कर रहे हैं। यह शर्मनाक है। अगर किसी बच्ची के साथ अप्राकृतिक यौनाचार होता है तो इस पर आप कहते हैं कुछ नहीं हुआ है। यह अमानवीय है। कोर्ट ने सख्ती से टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें बताया गया था कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है, क्या यही है आपकी गंभीरता। हर बार जब भी इसकी फाइल पढ़ी जाती है यह भयावह होता है?

बिहार के मुख्य सचिव पर नाराजगी जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप अपने कृत्य को जस्टिफाई करें। यही नही सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव से बुधवार को कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश भसी जारी कर दिया है।

पूरे देश को यह शर्मनाक काण्ड याद है कि 2018 के शुरुआत में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, मुंबई ने अपनी सोशल ऑडिट के आधार पर मुजफ्फरपुर के साहु रोड स्थित बालिका सुधार गृह (शेल्टर होम) में नाबालिग लड़कियों के साथ कई महीने तक रेप और यौन शोषण होने का खुलासा किया था। आरोपी ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ द्वारा संचालित इस गल्र्स शेल्टर होम में नाबालिग बच्चियों का रेप और यौन शोषण किया जाता था। मेडिकल जांच में शेल्टर होम की कम से कम 34 बच्चियों के साथ रेप की पुष्टि हुई थी। पीड़ित कुछ बच्चियों ने कोर्ट को बताया कि उन्हें नशीला पदार्थ दिया जाता था फिर उनके साथ रेप किया जाता था। इस दौरान उनके साथ मारपीट भी होती थी। पीड़ित लड़कियों ने बताया कि जब उनकी बेहोशी छंटती थी और वो होश में आती थीं तो खुद को निर्वस्र पाती थीं। देश भर के मीड़िया और राजनीतिक हलकों में चर्चा जोरों पर है कि ऐसा कौन सा वहशी है जो मासूम बच्चियों के साथ कुकर्म को अंजाम भी देता था और उन्हें अपनी शक्ल भी दिखाने के डरता था। इसका सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर संज्ञान लेते हुए नीतीश कुमार की सरकार पर सख्ती दिखाई है।

नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रही मंजू वर्मा ने इस कांड में अपने पति और अपना नाम सामने आने के बाद काफी दबाव और बेहद किरकिरी होने के बाद ही अपने पद से इस्तीफा दिया था। मंजू वर्मा ने 20 नवंबर को बेगूसराय कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। ध्यान रहे कि मंजू वर्मा के आवास से अवैध हथियारों की बारामदगी भी हुई थी और उनके पति के आरोपी ब्रजेश ठाकुर से करीबी संबंध भी बताये जाते हैं।

यह घटना सामने आने पर नीतीश सरकार की काफी किरकिरी हुई थी और तमाम विपक्षी पार्टियों ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री और उनकी सरकार को खूब निशाना बनाया था। अब फिर से एकबार सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार की नीयत पर सवाल खडे कर दिये हैं और उनकी संदिग्ध भूमिका पर भी सवाल उठाये हैं।