यूपी-बिहार पर हमले का गुजराती विकास माॅडल अथवा मोदी की उन्मादी राजनीति

देशभक्ति का सर्टिफिकेट बाटने वाले, भारत माता पर कॉपीराइट का दावा करने वालो क्या आपको यह भी नहीं पता कि बिहार-यूपी भी भारत का ही भाग है और वहां के नागरिक इसी देश के नागरिक हैं। जिन्हें भारतीय संविधान के अनुसार भारत के किसी भी भाग में निवास करने, व्यापार करने की स्वतंत्रता होती है। आप उस संविधान को मानते हो या नहीं? क्या आप बिहार-यूपी को भारत का हिस्सा मानते हो या नहीं? और अगर आप बिहार-यूपी को भारत का हिस्सा मानते हो तो फिर बिहार-यूपी के भाइयों-बहनों, माताओं से मार पीट और दुव्र्यवहार क्यों?

आप कौन होते हो? राज्यों के निवासियों में फर्क करने वाले, लोगों को मारने पीटनेवाले, बिहार-यूपी के कामगार भाइयों-बहनों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले। गुजरात सहित भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निवास करने, व्यापार करने, रोजी-रोजगार करने का हक देश के सभी नागरिकों को बराबर हैं। लेकिन जब सरकारें सत्ता के घमंड में चूर होकर, देश-प्रदेश को अपनी जागीर समझने लगे, तो लोकतंत्र में लोक अर्थात जनता घमंड को चूर कर सत्ता से उखाड़ फेंकने में देर नहीं करती है।

इतिहास साक्षी हैं कि जब भी किसी को बिहार-यूपी की जरूरत पड़ी, बिहार-यूपी ने खुले मन से स्वागत कर, दिल में जगह दी। संसद में सबके कल्याण के लिए नीतियां और योजनाएं बनाने के लिए भेजा। फिर वो आचार्य कृपलानी हों या मधु लिमये, जार्ज फर्णांडिस हों या शरद यादव या फिर आई के गुजराल हों या राम जेठमलानी सबको बिहार के लोगों ने अपने लोगों की तरह अपनाया और अपना प्रतिनिधि चुनकर भेजा। उत्तर प्रदेश ने भी हमेशा बड़ा दिल दिखाया है। शरद यादव जी को बदायूं से जीताकर संसद में भेजा, तो नरेंद्र मोदी जी जैसे आदमी को बनारस से। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस प्रांत की लोकसभा सीट की प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और बिहार-यूपी से जीत कर आने वाले कई लोग सरकार में मंत्री हैं, ऐसी स्थिति में भी उन सूबों के लोगों को प्रधानमंत्री के गृहराज्य में बेरहमी से पीटा जा रहा हो, तो इससे बढ़ कर, उस राज्य और वहाँ के लोगों की, तौहीन और क्या होगी?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को राज्य के मुख्यमंत्री से बात कर जनता की सुध लेनी चाहिए। परंतु मौन रहकर देश को गृह युद्व की ओर धकेलने का कार्य कर रहे हैं। इस तरह के अदूरदर्शी कदम से या कहे कि हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से जान मानस में वैमनस्यता बढ़ेगी। इतना ही नहीं गुजरात के व्यवसाय पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। लगभग सभी छोटे और मंझोले किस्म के उधोग, जहाँ बिहार और यूपी के कामगार काम कर रहे थे उन्हें बहुत ही तगड़ा झटका लगेगा। विकास के खोखले दावे की एक और बार पोल खुलेगी।

– कुणाल सुमन, सोशल एक्टिविस्ट