गुजरात का विकास मॅाडल आया सामने, यूपी-बिहार के लोगों पर हमले, मोदी-शाह की जोडी खामोश

आईएनएन भारत डेस्क
हम सबको याद है 2013 का मुज्जफ्फरनगर दंगा और अमित शाह का शामली में दिया गया भाषण जिसमें शाह ने सम्मान के नाम पर एक समुदाय के खिलाफ बहुसंख्यकों को उकसाया था और दंगों को हवा दी थी। आज मोदी और सम्मान के नाम पर यूपी के लागों को उकसाने वाले उनके राजदार सेनापति अमित शाह गुजरात में यूपी और बिहार के लोगों को मारे जाने पर, उनके पलायन पर खामोश हैं, चुप हैं।

अब उनके दंगे और उन्माद की राजनीति गुजरात में अपना असली रंग दिखा रही है। गुजरात में यूपी और बिहार के लोगों को निशाना बनाकर मारा जा रहा है। यूपी और बिहार के लोगों पर हमले के हालात को इससे ही समझा जा सकता है कि इन हमले से घबराकर हजारों लोग गुजरात से पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। परंतु पूरे देश में राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के नाम पर घूम घूमकर उन्माद बांटने वाली शाह-साहेब की जोडी ने अभी तक इस मामले में मुंह खोलना भी गंवारा नही किया है।

उत्तर गुजरात में एक मासूम बालिका से दुष्कर्म के बाद राज्य के कई इलाकों में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों पर हमले हो रहे हैं। उसके बाद से भयभीत होकर अन्य राज्यों के हजारों लोग गुजरात से पलायन कर गए हैं। उधर, पुलिस की कोरी बयानबाजी उनके आदर्श नेता और शाह के साहेब की तर्ज पर लगातार जारी है। राज्य के पुलिस महानिदेशक शिवानंद झा ने कह रहे हैं कि हिंसक घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस ने एक्शन प्लान बनाया है। शायद एक्शन प्लान यूपी-बिहार के हजारों लोगों को गुजरात से पलायन की आसान राह मुहैया कराये जाने को ही कहते हैं। उनका दावा है कि एसआरपी की 17 कंपनियां संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात की गई है। उनका दावा है कि अफवाह फैलाने वालों की पहचान कर ली गई है। वैसे इस मामले में भी मोदी और शाह की जोडी अपनी पुलिस की सहायता से विपक्ष को निशाना बनाने और अपनी राजनीति को चमकाने की राह निकाल ही लेगी।

वैसे गुजरात में बीते एक सप्ताह से अन्य प्रांत के लोगों पर हमले हो रहे हैं। विभिन्न उन्मादी संगठनों के कार्यकर्ता साबरकांठा, मेहसाणा, गांधीनगर, अहमदाबाद सहित कई इलाकों में बसे उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को निशाना बना रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों व फैक्ट्रियों में काम कर रहे श्रमिकों के साथ भी उन्मादियों ने मारपीट की है। इसके बाद से गुजरात के कई शहरों से अन्य राज्यों के लोग पलायन करने लगे हैं। अब तक हजारों लोग गुजरात छोड़कर जा चुके हैं। यूपी और बिहार के लोगों पर लगातर बढ रहे हमलों के बाद पलायन में भी तेजी आयी है।

वैसे पुलिस की माने तो अब कईं दिनों के बाद गुजरात पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस महानिदेशक शिवानंद झा ने बताया कि पुलिस ने अब तक 42 मामले दर्ज कर 342 आरोपियों को पकड़ा है। उनका दावा है कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों की पहचान कर ली गई है। राज्य की शांति व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर निगरानी की जा रही है। अफवाह फैलाने के दो मामले दर्ज किए हैं। उधर, ठाकोर सेना के प्रमुख अल्पेश ठाकोर ने कहा कि सरकार व पुलिस ठाकोर सेना को बदनाम करने के लिए उनके लोगों पर झूठे मुकदमें दर्ज कर रही है। अल्पेश के अनुसार मोदी सरकार ठाकोर सेना को तोड़ना चाहती है। विधायक ठाकोर ने घोषणा की कि इन हमलों के मद्देनजर उनके समर्थकों के खिलाफ दर्ज किये गये झूठे मामलों को यदि सरकार ने वापस नहीं लिया तो वह 11 अक्टूबर से ‘सद्भावना’ उपवास करेंगे।

क्या है पूरा मामला

28 सितम्बर को एक बच्ची के साथ कथित रूप से दुष्कर्म करने के लिए बिहार के एक निवासी को गिरफ्तार किये जाने के बाद गैर-गुजरातियों को निशाना बनाया जा रहा है और सोशल मीडिया पर घृणात्मक संदेश फैलाये जा रहे हैं। इस घटना के बाद राज्य के कई हिस्सों में गैर- गुजरातियों, खासतौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले लोगों को राज्य छोड़ने का फरमान जारी किया गया है और उन्हें निशाना बनाकर उन पर हमले किये जा रहे हैं। मुख्य रूप से छह जिले (हिंसा से) प्रभावित हुए हैं। मेहसाणा और साबरकांठा सबसे अधिक प्रभावित हुए है।

हालांकि डीजीपी ने दावा किया है कि गैर-गुजराती लोगों के निवास क्षेत्रों और उन कारखानों में जहां वे काम करते हैं, वहां सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने इन इलाकों में गश्त भी बढ़ा दी है।डीजीपी ने बताया कि सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने के लिए दो मामले दर्ज किये गये हैं। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक प्रभावित जिले गांधीनगर में पुलिस अधिकारियों को शिविरों का आयोजन करने और स्थानीय नेताओं के साथ संवाद करने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि जिलों में अतिरिक्त सुरक्षा बल और वाहन उपलब्ध कराये गये हैं।