जब लालू यादव के लिए मंच से एक शोषित महिला ने हुंकार भरी

आईएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्ली: दक्षिणपंथी और अभिजात्य स्वघोषित प्रगतिशील अपने वर्चस्ववादी राजनीति को मजबूत और कायम रखने के लिए महिला आरक्षण विधयेक के मौजूदा स्वरुप का समर्थन करते है, इनके feminism के discourse में हासिये के समाज की महिलाओं का कोई स्थान नहीं है। इनके discourse में सुषमा स्वराज और वृंदा करात होती है। सामाजिक न्याय के लिए लड़ने वाले नेताओं ने आरक्षण के अदंर आरक्षण की मांग करते हुए इसका विरोध किया, लालू जी ने मुखर होकर कहा इस महिला आरक्षण विधेयक में हमारी दलित, पिछड़े और अकलियत सामाज की महिलाओं का हक़ कहाँ है? जब तक हमारा हक़ नहीं मिलेगा इसको, हमलोग सदन में पास नहीं होने देंगे।

लालू जी के ‘feminism’ के discourse में भगवतीया देवी, फूलन देवी और शोषित पीड़ित महिलाएं है। बिहार से एक पत्थर तोड़ने वाली महिला मरहूम भगवतीया देवी जी को लालू जी और जनता दल ने संसद भवन भेजकर, गरीब गुरबो और दबे कुचले समाज का लोकतंत्र में विश्वास को मज़बूत किया था, 1997 में जब लालू जी के मुख्यमंत्री आवास पर छापे पड़े तो पटना के मिलर स्कूल मैदान में भगवतीया देवी अपनी छाती पीटकर गरजते हुए बोली “कौन सीबीआई? भगवतीया देवी ने पहाड़ो का सीना फोड़ा है, हमारे मसीहा को कुछ हुआ तो सीबीआई की छाती तोड़ दूंगी,अब से पहले संसद में रानी बैठती थी हमारे नेता लालू जी ने रानी के बगल में मेहतरानी को बैठाया है, छापा लालू पर नहीं हम पर पड़ा है, मैं इनकी छाती चिर दूंगी। एक वीडियो देख रहा था जिसमें चुनावी सभा में विंदा देवी अपने संबोधन में कह रही है लालू जी की सरकार ने छोटका जाति के लोगो को बोलने का अधिकार दिलवाया है।

Author: अमित कुमार, शोधार्थी, जेएनयू, नई दिल्ली