जस्टिस रंजन गोगोई बने भारत के चीफ जस्टिस, जस्टिस मिश्रा हुए सेवानिवृत्त

आईएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्ली: आज भारत के चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस रंजन गोगोई ने कार्यभार संभालेंगे। जस्टिस रंजन गोगोई भारत के 46वें चीफ जस्टिस बने। ये जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद सबसे सीनियर थे। ये कई महत्वपूर्ण मामलों में लैंडमार्क जजमेंट देकर अपनी एक अलग और निष्पक्ष पहचान रखते हैं। ये कभी भी विवादो में नही रहे।

जब जस्टिस दीपक मिश्रा द्वारा मुख्य मामलों को सीनियर न्यायमूर्तियों को बाईपास किया जा रहा था, सीनियर न्यायमूर्तियों की बात भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुनने को भी तैयार नही थे, लोकतंत्र खतरे में होने का आभास हो रहा था ऐसे वक्त में जस्टिस रंजन गोगोई अन्य 4 जज के साथ निकल कर बाहर आये और मीडिया के माध्यम से देश को संबोधित करते हुए कहा कि “लोकतंत्र खतरे में है”। ऐसे न्याय प्रिये, स्पष्टवादी, लोकतंत्र समर्थक न्यायमूर्ति का सोशल मीडिया पर लोग खुलेदिल से स्वागत कर रहे हैं।

मुख्य न्यायमूर्ति के पद पर पहुंचने वाले जस्टिस रंजन गोगोई पूर्वोत्‍तर भारत से पहले न्यायमूर्ति होंगे। जस्टिस गोगोई देश के 46वें प्रधान न्‍यायाधीश होंगे। उनका कार्यकाल 17 नंवबर, 2019 तक होगा। इनकी नियुक्ति महामहिम प्रेसिडेंट श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने किया था। इन्होंने बतौर सुप्रीम कोर्ट के जज पिछले छह वर्षों के कार्यकाल में उन्‍होंने कई अहम फैसले दिए हैं। इसके चलते वह सुर्खियों में रहे साथ जस्टिस गोगोई के करियर का लेखा-जोखा।

नए CJI के समक्ष निम्न नई चुनौतियां होगी

1. सबसे संवदेनशील अयोध्‍या विवाद का मामला है। इसे निपटाना उनके समक्ष एक बड़ी चुनौती होगी। देश के लिए यह एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर सबकी निगाहें होंगी।

2. पदभार ग्रहण करने के बाद मुख्य न्यायमूर्ति के सामने, मौजूदा समय में  करीब 3.30 करोड़ लंबित मामले को निपटाने की होगी।

3. उनकी तीसरी सबसे बड़ी चुनौती न्‍यायपालिका में  पिछले एक दशक से जजों के खाली पदों को भरने की है।  जजों की कमी के कारण चुनौतियां लगातार बढ़ रही है।

4. देश की न्‍याययिक संस्‍थाओं में बुनियादी ढांचे समेत कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां बजट बढ़ाने की जरूरत  होगी। 2017-18 में केंद्रीय बजट का महज 0.4 फीसद  ही न्‍यायिक व्‍यवस्‍था के लिए मिला है।