किसानो पर पुलिसिया हमला, चलायी वाटर कैनन, भांजी लाठियां 30 से ज्यादा किसान घायल

आईएनएन भारत डेस्क
हरिद्वार से शान्तिपूर्वक दिल्ली पहुंची किसान क्रान्ति यात्रा पर दिल्ली सीमा पर पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी, वाटर कैनन से पानी से मार की और आसंू गैस के गोले छोडे। किसान नेता इस पूरे मामले में गोलीबारी करने की बात भी कह रहे हैं। बताया जाता है कि किसानों पर इस पुलिसिया हमले में 30 से अधिक किसान घायल हुए।

यह हमला दिल्ली पुलिस ने उस समय किया जब किसानों का एक सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलने के लिए गया हुआ था। इस लाठीचार्ज और हमले पर किसानों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठी चार्ज किया और गोलीबारी भी की। किसान लगातार गोलीबारी की बात कह रहे हैं। जबकि दिल्ली पुलिस इस बात से इंकार कर रही है। हालांकि वाटर कैनन चलाने और लाठी भांजे जाने की तस्वीरें लगातार मीड़िया पर प्रसारित हो रही हैं बावजूद इसके पुलिस इंकार कर रही है।

बुजुर्ग किसान का शिकार करती योगी-मोदी की पुलिस

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी हमले की निन्दा करते हुए कहा कि किसानों पर पुलिस की कार्रवाई गलत है। हमारे नेता गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक कर रहे हैं. हम आगे की योजनाओं पर अपने नेताओं से बातकर फैसला करेंगे।

वहीं एनडीए में भाजपा के सहयोगी जेडीयू के नेता केसी त्यागी का बयान भी पुलिस के झूठ और किसानों पर हमले की पुष्टि करता है उन्होंने भी इस हमले की निन्दा की और कहा कि शांति से और बगैर किसी हथियार के राजधाट की तरफ जा रहे किसानों के साथ क्रूरता से व्यवहार किया गया। उनपर लाठीचार्ज हुआ. आंसू गैस के गोले दागे गए. हम इसकी निंदा करते हैं।

उधर स्वाभिमान सत्कार संगठन के आर सेठ्ठी ने भी इस हमले की निन्दा करते हुए कहा है कि किसान आतंकवादी और नक्सली नहीं हैं, वह अपनी मांगों को लेकर आ रहे हैं। क्या उनके पास ऐसा करने का भी हक नहीं है? उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चैहान की सरकार ने मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों को मारा था। यह मोदी जी के लिए चेतावनी है कि अगर किसानों के साथ अन्याय होता रहा तो वह दिल्ली और देश हार जाएंगे।

बार्डर पर किसानों को ढूंढ ढूंढकर मारा गया

किसानों से वार्ता के बाद भी किसान नेताओं और सरकार के मंत्रियों के विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। किसान जहां एक तरफ कह रहे हैं कि सहमति नही बनी और उन्हें सरकार की नीयत पर विश्वास नही है तो वहीं सरकार के मंत्रियों से लेकर यूपी के मुख्यमंत्री तक लगातार किसानों से सहमति बनने के बयान दे रहे हैं।

बार्डर पर किसानों को दौडा दौडाकर मारा गया