‘किसान क्रांति यात्रा’ हरिद्वार से गाजियाबाद पहुंचा, दिल्ली बॉर्डर हुई सील

आईएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्ली: भारत के लगभग सभी राज्यों के किसानों की स्थिति कामो-बेस एक जैसी ही है। किसानों द्वारा आत्मा हत्या की घटनाएं लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पिछले दिनों किसानों की कर्ज माफी की घोषणा की थी और किसानों को चेक भी बाटे गए थे। लेकिन चेक में कर्ज माफी की राशि बहुत ही काम थी। बहुत किसानों को तो 10 रुपये से भी काम का चेक दिए गए थे।

किसानों के कई संगठन एक साथ मिलकर “किसान क्रांति यात्रा” के नाम से एक आंदोलन चलते हुए हरिद्वार से देश की राज्यधानी दिल्ली के लिए कूच किया था। आज इस मार्च को दिल्ली पहुचने की संभावना को देखते हुए , दिल्ली पुलिस ने दिल्ली बॉर्डर को सील कर दिया हैं। दिल्ली पुलिस ने किसानों को इस आंदोलन की इजाजत नहीं दी है। लिहाजा उन्हें दिल्ली में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई है। अपनी मांगों को लेकर कई किसान संगठन 2 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचकर राजघाट से संसद तक विरोध मार्च करने वाले हैं।

देशभर से हजारों की संख्या में किसान भारतीय किसान यूनियन की अपील पर दिल्ली पहुंच रहे हैं। इनका जत्था हरिद्वार से दिल्ली के लिए कूच कर गया है। रविवार शाम तक किसानों का समूह यूपी के मुराद नगर तक पहुंच गया था। किसानों की योजना 1 अक्टूबर को दिल्ली में प्रवेश कर 2 अक्टूबर को राजघाट से संसद तक मार्च करने का है लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी है।

भारत दौरे पर उजबेकिस्तान के राष्ट्रपति अपनी पत्नी के साथ आये हुए हैं। महात्मा गांधी जयंती भी 2 अक्टूबर को है। इस कारण से राजघाट और आसपास के इलाकों में हाई प्रोफाइल गतिविधि रहेगी। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने कानून व्यवस्था के कड़े बंदोबस्त किए हैं। राजघाट और संसद के आसपास चौकसी बढ़ा दी गई है।

रविवार दोपहर में दिल्ली पुलिस मुख्यालयमें एक उच्च स्तरीय बैठक कर किसानों को रोकने की योजना बनाई गई थी। किसानों के प्रवेश को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर गाजीपुर और महाराजपुर बॉर्डर को सील कर दिया गया है।

मुख्य रूप से “किसान क्रांति यात्रा” के तहत नौ प्रमुख मांगें उठाई गई हैं। इनमें सबसे अहम किसानों की कर्जमाफी है। साथ ही उपज की सही कीमत मिल सके, इसके लिए भी किसानों ने अपनी आवाज बुलंद की है। किसानों की शिकायत है कि उनकी समस्याओं के प्रति सरकार गंभीर नहीं है, इसी के चलते देशभर में आंदोलन हो रहे हैं। फसल की सही कीमत न मिलने के कारण किसान दिनोंदिन खुदकुशी के लिए मजबूर हो रहे हैं। एक मांग यह भी है कि जिन किसानों ने खुदकुशी की है, उनके परिवारों को नौकरी दिया जाय और उनका पुर्नवास कराया जाए।