JNU- NSUI में बबाल बढ़ने की वजह क्या है?

आईएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्ली: पिछले सप्ताह जेएनयूएसयू का चुनाव सम्पन्न हुआ। इस बार जेएनयू चुनाव काफी चर्चा में रहा, उसमें भी खासकर छात्र-राजद के उम्मीदवार जयंत जिज्ञासु का भाषण। छात्र-राजद किसी भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पहली बार चुनाव लड़ रहा था। लेकिन इसके साथ ही साथ एनएसयूआई के चार सीनियर एक्टिविस्ट्स का पार्टी से सस्पेंशन भी काफी चर्चा में रहा। यह निर्णय इन चारों कार्यकर्ताओ पर पार्टी के खिलाफ प्रचार करने के आरोप लगाकर लिया गया है।

लेकिन एनएसयूआई की राष्ट्रीय प्रभारी रुचि गुप्ता ने इस सस्पेंशन पर रोक लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि बिना राष्ट्रीय प्रभारी व राष्ट्रीय अध्यक्ष से बात किये, इस तरह का निर्णय कैसे लिया? जिन चार एक्टिविस्ट्स को निकाला गया है, वह वो एक्टिविस्ट्स है, जिन्होंने जेएनयू में एनएसयूआई को खड़ा किया है।

बता दें कि 2016 में , जब विजयादशमी के दिन, JNU में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रावण बनाकर पुतला जलाया गया था। इस घटना पर गृह मंत्रालय के द्वारा रिपोर्ट मांगी गई। उसमें मनीष मीना, सनी धीमान, सुरेंद्र और मृत्युंजय की मुख्य भूमिका थी। उसके बाद नजीब के मुद्दे पर 11 दिन तक भूख हड़ताल पर बैठे। जब जेएनयू में सीट कट हुई तो मृत्युंजय व उसके साथियों ने प्रशासनिक भवन को काफी दिनों तक बंद रखा।

मोदी जी के पकौड़े वाले बयान पर मनीष मीणा, मृत्युंजय, सनी धीमान द्वारा इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाने में अहम भूमिका निभाई गई थी। जिसमें प्रशासन द्वारा मनीष मीणा के खिलाफ़ 20 हजार का जुर्माना, हॉस्टल स्थानांतरण व एफआईआर (FIR) भी रेजिस्टर की गई। मनीष मीणा को अब तक हॉस्टल नही मिल पाया है।

मनीष मीणा का कहना है कि “जेएनयू-एनएसयूआई के प्रभारी व इकाई अध्यक्ष मनीष मीणा का कोर्ट स्टे जानबूझ कर नही लाए है”। मनीष आदिवासी समुदाय से आते है और उनकी पुरजोर तरीके से आवाज बुलंद करते रहते है। वर्तमान में वह आदिवासी विषय पर ही जेएनयू से पीएचडी कर रहे है। फिलहाल यह मुद्दा एनएसयूआई की राष्ट्रीय प्रभारी रुचि गुप्ता व राष्ट्रीय अध्यक्ष फ़िरोज खान के देख-रेख में है।