बढ़ रही हैं रालोसपा की राजद से नजदीकियां, एनडीए की टूट का खतरा बढ़ा

आईएनएन भारत डेस्क
बिहार की सियासत इन दिनों काफी गर्म है। जहां जदयू में भाजपा से सीट शेयरिंग को लेकर खुश तो वहीं एनडीए के सहयोगी दल इस गुपचुप गठजोड़ से आहत हैं। उपेन्द्र कुशवाह की पार्टी रालोसपा के तेवर इन दिनों काफी हद तक बगावती ही दिखाई पड़ रहे हैं। वहीं पहले जहां राजद के नेता पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने जहां रालोसपा पर डोरे डालकर उसे लगभग अपने पाले में घ्ूका ही लिया है तो वहीं उनकर कोशिशे रामविलास पासवान को एनडीए से बाहर करने की नजर आ रही हैं। हालांकि पासवान के बेटे चिराग पासवान ने इस पर कडा रूख दिखाते हुए एनडीए में ही बने रहे की बात कही है। परंतु सभी जानते हैं कि कुछ महीने पहले तक रालोसपा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाह के तेवर इससे भी तीखे थे लेकिन आम चुनावों की तरफ बढ़ते और भाजपा द्वारा जदयू को कुछ ज्यादा ही प्राथमिकता देने से उनके तेवर राजद पर नरम नजर आ रहे हैं।

कुछ जानकार लोगों का तो यहां तक भी कहना है कि कुशवाह की राजद के साथ सीट शेयरिंग को लेकर भी बात हो चुकी है। जानकार सूत्र बता रहे हैं कि राजद कुशवाह को चार सीटें देने पर राजी है। हालांकि कुशवाह अभी तक मीड़िया और बाकि लोगों को भरमाये हुए हैं जैसे ही राजद से नजदीकियाों की चर्चा बढ़ती हैं तो वे सफाई देने आ जाते हैं। वैसे उन्होंने इशारों ही इशारों में राजद के साथ सियासी खीर तो तैयार कर ली है। अब वह और उनके सेनापति जमीन पर इस खीर को और स्वादिष्ट बनाने में लगे हैं और कुर्मी, कुशवाह और धानुक का गठजोड़ बनाने के लिए जिला जिला दलित, अति पिछड़ा जिला सम्मेलन करने में लगे हैं। राजद के प्रति इस नरमी का एक और इशारा रालोसपा ने फिर दे दिया है, रालोसपा ने अब राजद की तरह ही नरेंद्र मोदी सरकार से जातिगत जनगणना को सार्वजनिक करने की मांग कर डाली है।

रालोसपा अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रभारी व प्रवक्ता जीतेंद्रनाथ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि 2011 में कराई गई सामाजिक आर्थिक जनगणना की रिपोर्ट केंद्र सरकार अविलंब प्रकाशित करे। जातिगत जनगणना को सार्वजनिक किये जाने के बाद ही दलित, आदिवासी, पिछड़े, अतिपिछड़े लोगों की सही जनसंख्या का पता चलेगा। इससे भी यह साफ हो जाएगा कि कौन-सी जाति की स्थिति सरकारी नौकरियों में क्या है? और उन्हें कितना प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए?

ध्यान रहे कि एक सितंबर रालोसपा जिलों जिलों में जाकर दलित-अतिपिछड़ा अधिकार सम्मेलन का आयोजन कर रही है। इसमें भी जातिगत जनगणना को सार्वजनिक करने की मांग सरकार से की जा रही है। इस बाबत पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि संविधान के जनक बाबा साहेब डाॅ भीमराव आंबेडकर का मानना था कि ‘देश की आबादी का 20 प्रतिशत दलित है तथा उन्हें अपने अधिकारों को हासिल करने हेतु आक्रामक आंदोलन अख्तियार करना चाहिए।’ वहीं डाॅ राम मनोहर लोहिया ने भी कहा था कि ‘पिछड़ों ने बांधी गांठ, पिछड़ा पावे सौ में साठ।’ इन दोनों विचारकों के विचारों के अनुसार दलित-पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्गों की औसत जनसंख्या भारत की कुल जनसंख्या का 85 प्रतिशत है। इन्हें अपने अधिकारों को हासिल करने हेतु संगठित होकर आक्रामक आंदोलन करना होगा।

केंद्र सरकार की हाल की घोषणा पर कि 2021 में होनेवाली जनगणना में इस बार ओबीसी की भी गिनती करायी जाएगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह केवल पिछड़ों के आई वाश करने के लिए है। उन्होंने कहा कि जिसकी गिनती हो चुकी है, उसे तो पहले केंद्र सरकार सार्वजनिक करे। इसके बाद ओबीसी की गिनती कराए। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं, सार्वजनिक में जो भी जातिगत आंकड़ा सामने आए, उसके अनुसार उस कास्ट को नौकरियों से लेकर हर सेक्टर में प्रतिनिधित्व दिया जाए।

गौरतलब है कि बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी तीन दिन पहले इसी तरह की मांग केंद्र सरकार से की थी। राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी मीडिया के सामने कहा था कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने भी मांग करते रहे हैं कि 2011 में हुई जातिगत जनगणना को सार्वजनिक किया जाए। बहरहाल, राजद की तरह रालोसपा की मांग के बाद बिहार में एक बार फिर से सियासत तेज है और रालोसपा को लेकर अटकलों का बाजार गरम हो गया है। अब उनके बयानों की समानता ना केवल उनकी नजदीकियों का पता दे रही है बल्कि आने वाले समय में एनडीए और महागठबंधन की क्या रूपरेखा होगी इसका भी पता इससे चल रहा है।