हार से बौखलाई विद्यार्धी परिषद हो गयी है ‘‘दंगा परिषद‘‘?

आईएनएन भारत डेस्क
जेएनयू छात्रसंघ चुनावों में हार से आक्रामक हुई अखिल भारतीय परिषद के बारे में जेएनयू में चर्चा जोरो पर है कि क्या विद्याार्थी परिषद अब पूरी तरह से ‘‘दंगा परिषद‘‘ में तब्दील हो चुकी है। जिस प्रकार दिल्ली विश्वविद्यालय से लेकर देश के अन्य विश्वविद्यालय परिसरों में विद्यार्थी परिषद लड़ाई झगड़े में संलिप्त पाया गया है उससे विद्यार्थी समुदाय में यह चर्चा जोरों पर है।

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जेएनयू में विद्यार्थी परिषद के छात्रों ने मतो की गिनती को बाधित किया और उस कारण से मतों की गिनती का काम 16 से 18 घण्टें देरी से हुआ। इसके बाद चुनावों परिणामों को सामने आने के बाद बौखलाहट में जिस प्रकार से एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने वाम संगठनों के विभिन्न पदाधिकारियों और जेएनएसयू के नवनिर्वाचित और पुराने पदाधिकारियों पर हमला बोला वह भी विद्यार्थी परिषद के आचरण को सवालों के घेरे में ले आता है।

छात्रों से प्राप्त रिपोर्टो के अनुसार जिस प्रकार मीड़िया इसे छात्र समुदाय के आपसी संघर्ष का नाम देकर एबीवीपी का बचाव कर रहा है। दरअसल, तस्वीर उससे एकदम अलग और उल्टी है। चुनाव परिणाम आने के बाद एबीवीपी अपनी हार को पचा नही पा रहा है और गुण्ड़ागर्दी के दम पर विश्वविद्यालय परिसर में कब्जा जमाना चाहती है।

एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वलीउल्ला कादरी ने बातचीत में बताया कि वह कल जब जीते हुए वाम छात्र नेताओ को बधाई देने के लिए कैंपस में गये थे तो उन पर हमला किया गया। उनके अनुसार उनके जेएनयू के छात्र नेता साथियों ने उन्हें चाय की पेशकश की और वह सभी साबरमती हाॅस्टल के पास चाये पीने के लिए गये। वहां उन्होंने एबीवीपी के दस-बारह छात्रों को एक समूह को बेहद आक्रमक मूड में खड़ा पाया तो वह किसी संभावित विवाद से बचने के लिए गंगा ढ़ाबे की तरफ कूच कर गये। उन्होंने बताया कि एबीवीपी के लोग साबरमती से गंगा तक उनका पीछा करते रहे। गंगा ढ़ाबे पर उन्हें नवनिर्वाचित अध्यक्ष साईं बालाजी एक छात्रा के साथ मिले। जब वह उन दोनों को जीत की बधाई दे ही रहे थे कि तभी एबीवीपी नेता सौरभ शर्मा कईं लोगों के साथ आये और बालाजी के साथ खडी एक छात्रा को धक्का दे दिया। इस पर वली ने प्रतिरोध किया तो सौरभ ने उनका भी गिरेबान पकड़ लिया। उसके बाद बीच बचाव होने पर वली वहां से चले आये। बाद में मालूम हुआ कि एबीवीपी के उन लोगों ने जीते हुए अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष गीता पर सतलज हाॅस्टल के पास हमला बोल दिया। दरअसल, वह दोनों इस खबर पर वहां गये थे कि वहां पर एबीवीपी वाले एक छात्र की मोब लिंचिंग करने पर उतारू हैं। उक्त छात्र को बुरी तरह से मार रहे हैं।

साथ ही बालाजी ने मीड़िया को यह भी बताया कि यदि पुलिस को शिकायत करके बुलाया जाता है तो कैसे पुलिस एबीवीपी के छात्रों के साथ एक वीआईपी की तरह से व्यवहार करती है और बाकी छात्रों को डराती, धमकाती है अथवा शिकायत लेने भर की कार्रवाई करती है।

विद्याथी परिषद के द्वारा शुरू की गई हिंसा के बाद जेएनयू शिक्षक संघ ने भी एक एक प्रतिरोध मार्च निकाला है। इसके अलावा एबीवीपी के इस मार्च की जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शाहिला राशिद से लेकर प्रशांत भूषण तक ने कडी निन्दा करते हुए एबीवीपी और संघ पर कड़ा हमला बोला है। शाहिला ने तो यहां तक ट्वीट कर डाला कि विद्यार्थी परिषद अपने ट्वीटर हैंडल ‘‘स्टूडेंटस फाॅर पीस‘‘ का नाम बदलकर उसका नाम ‘‘स्टूडेंटस फाॅर वायलेंस‘‘ रख लें।