भारत बंद: सोमवार 10 सितंबर को कौन-कौन कर रहा है भारत बंद का समर्थन ?

आईएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्ली: कांग्रेस ने सोमवार 10 सितंबर को पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ने कीमतें और लगातार रुपये की घटती कीमत के विरोध में भारत बंद का आवाह्न किया। इस भारत बंद को सफल बनाने के लिए 20 राजनीतिक पार्टियों का समर्थन भी प्राप्त कर चुकी है। कांग्रेस पार्टी के अनुसार भारत बंद को समाजवादी पार्टी (सपा),बहुजन समाज पार्टी (बसपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), द्रमुक, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), जनता दल एस (जेडीएस), राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कई अन्य दलों का भी समर्थन है। कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि पार्टी चाहती है कि डीजल और पेट्रोल को जीएसटी के अंतर्गत लाया जाए, जिससे इनकी कीमतों में 15 से 18  रुपये की कमी आएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पिछले चार साल में ईंधन पर उत्पाद शुल्क लगाकर 11 लाख करोड़ रुपये की कमाई की है और सरकारी खजाना भरने के लिए यह राशि आम आदमी से ली है।

बता दें कि अगस्त के मध्य से अब तक पेट्रोल 3.42 रुपये प्रति लीटर और डीजल 3.84 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है।

ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भारत बंद से दूरी अपने आप को अलग कर लिया हैं। पार्टी महासचिव पार्था चटर्जी ने कहा, ‘हमलोग हड़ताल का विरोध नहीं कर रहे हैं और न ही हम इसमें हिस्सा ले रहे हैं। हमलोग भारत बंद के बजाय तृणमूल कांग्रेस उस दिन पेट्रोल, डीजल,रसोई गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और रुपये के गिरते मूल्य के विरोध में समूचे राज्य में प्रदर्शन करेगी।

जबकि कांग्रेस ने पार्टी अपने कार्यकर्ताओं से अनुरोध किया है कि वे भारत बंद के दौरान शांति बनाए रखें और किसी तरह के हिंसक प्रदर्शन में शामिल न हों। हम महात्मा गांधी की पार्टी के हैं और हमें अपने आप को किसी हिंसा से नहीं जोड़ना चाहिए।

पेट्रोल-डीजल के दाम रिकॉर्ड ऊँचाई पर
पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार नई ऊंचाई को छू रही हैं। रविवार को पेट्रोल के दामों में 12 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम में 10 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी के साथ ही दिल्ली में रविवार को पेट्रोल की कीमत 80.50 रुपये और डीजल की कीमत 72.61 रुपये प्रति लीटर हो गई। यह ईंधन की कीमत का नया उच्च स्तर है। सभी मेट्रो शहरों और अधिकतर राज्यों की राजधानी के मुकाबले दिल्ली में ईंधन की कीमत सबसे कम है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अन्य राज्यो और वहाँ की राज्यधानी में इसकी कीमत और भी आसमान छू रही है।

कच्चे तेल की कीमत कम होने के बाबजूद पेट्रोल और डीजल में बढ़ोतरी क्यो ?
कांग्रेस के वरिष्ट नेता कुमारी शैलजा ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 16 मई 2014 को 107.09 डॉलर प्रति बैरल थे जो आज 73 डालर प्रति बैरल हैं। यह कीमत कांग्रेस की अगुवाई वाली संप्रग सरकार की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम है। शैलजा ने कहा, ‘दैनिक जरूरतों की वस्तुओं के बढ़ती कीमतों ने हर भारतीय का बजट बुरी तरह बिगाड़ दिया है। देश की जनता इस ‘ईंधन की लूट’ के लिए मोदी सरकार को कभी माफ नहीं करेगी और आम चुनावों में भाजपा को इसका जवाब मिलेगा।