रालोसपा ने छेड़ी नीतीश का जनाधार तोड़ने की जमीनी जंग

आईएनएन भारत डेस्क
एनडीए में भाजपा की सहयोगी रालोसपा बिहार में लगातार नीतीश कुमार पर हमले करती रही है, परंतु अब उपेन्द्र कुशवाह के रालोसपा ने रणनीतिक ढ़ंग से नीतीश कुमार के जनाधार को छीनने की कवायद शुरू कर दी है। कुशवाह की रालोसपा यदि आने वाले चुनावों में नीतीश कुमार को बड़ा नुकसान कर दे तो उसमें हैरानी नही होगी। नीतीश कुमार के नुकसान की संभावना सबसे अधिक इसलिए भी है कि लोकप्रियता के लिहाज नीतीश कुमार के लिए यह समय सबसे मुश्किलों भरा है। महागठबंधन से अलग होने के कारण जहां नीतीश कुमार की राजनीतिक विश्वसनीयता बेहद कम हुई थी तो वहीं मोदी की भाजपा के साथ जाने के कारण उनका अल्पसंख्यक सारा वोट खिसक गया था तो हाल ही में मुजफ्फरपुर के बालिका आश्रय गृह काण्ड ने नीतीश कुमार की लोकप्रियता को पूरी तरह से जमीन पर ला दिया है। ऐसे समय में रालोसपा का नीतीश कुमार के जनाधार पर रणनीतिक हमला उनके जनाधार पर निर्णायक हमला सिद्ध हो सकता है।

बिहार में नीतीश कुमार के इसी जनाधार को छीनने के लिए रालोसपा ‘पंचमेवा‘ को एकजुट करने और अपने साथ लाने की तैयारी में जुट गयी है। अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाने को लेकर रालोसपा ने सूबे में जिलास्तर पर वंचितों के बीच में जाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी के अनुसार 1 सितंबर से बिहार के तमाम जिलों में दलित-अतिपिछड़ा अधिकार सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) करने जा रही है। यह सम्मेलन लगभग डेढ़ माह तक चलेगा।

रालोसपा अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रभारी व प्रदेश प्रवक्ता जितेंद्रनाथ ने बताया कि बिहार के तमाम जिलों में 1 सितंबर से शुरू होनेवाला यह सम्मेलन अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक चलेगा। जिला स्तरीय सम्मेलनों का पूरा शेड्यूल तैयार कर लिया गया है। जितेन्द्रनाथ ने बताया कि रालोसपा ने इसके लिए 6 टीमें बनाई गई हैं। पार्टी पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दे दी गयी है।

बता दें कि पिछले दिनों रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने खीर और पंचमेवा वाला बयान देकर बिहार की सियासत में नये गठजोड़ का संकेत देते हुए राजनीतिक माहौल गरमा दिया था। कुशवाहा ने कहा था कि यदुवंशियों के दूध और कुशवंशियों के चावल मिल जाए तो खीर बनते देर नहीं लगती, इसमें दलितों-अतिपिछड़ों का पंचमेवा मिल जाने से खीर स्वादिष्ट हो जाएगी। उन्होंने इसे ही सामाजिक न्याय का सार बताया था। इस बारे में जितेंद्रनाथ कहते हैं कि यह बयान समाज और सामाजिक न्याय के संदर्भ में दिया गया था। बीपी मंडल की जयंती हमलोग मना रहे थे और वे समाज के सभी लोगों को साथ लेकर चलने के पक्षधर हैं।

उन्होंने कहा कि पिछड़ों-दलितों समेत अन्य छोटी-छोटी जातियों को कर्पूरी ठाकुर के समय ‘पंचफोड़ना’ कहा गया था और अब रालोसपा ने इसे ही ‘पंचमेवा’ बताया है। उन्होंने कहा कि जब तक इन जातियों का विकास नहीं होगा, समाज में संतुलन स्थापित नहीं हो सकता है। उन्होंने रालोसपा के दलित, पिछडा और अतिपिछड़ा अधिकार जिला सम्मेलन के रणनीतिक कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताते हुए इस पूरे अभियान की घोषणा कीः

1 सितंबर- भोजपुर
11 सितंबर- बक्सर
4 सितंबर- जहानाबाद
7 अक्टूबर- रोहतास
14 सितंबर- कैमूर
15 सितंबर- पटना पूर्वी
4 अक्टूबर- पटना पश्चिम
7 सितंबर- नालंदा
5 सितंबर- गया
9 सितंबर- अरवल
20 सितंबर- औरंगाबाद
6 सितंबर- नवादा
6 सितंबर- छपरा
7 सितंबर- सीवान
15 सितंबर- गोपालगंज
5 अक्टूबर- वैशाली
5 सितंबर- मुजफ्फरपुर
16 सितंबर- सीतामढ़ी
9 सितंबर- शिवहर
14 सितंबर- मोतिहारी
6 सितंबर- बेतिया
7 सितंबर- बगहा
6 अक्टूबर- समस्तीपुर
11 सितंबर- दरभंगा
11 सितंबर- मधुबनी
5 सितंबर- शेखपुरा
8 सितंबर- लखीसराय
10 सितंबर- मुंगेर
9 सितंबर- बेगूसराय
7 सितंबर- बांका
11 सितंबर- भागलपुर
8 सितंबर- नवगछिया
25 सितंबर- सहरसा
24 सितंबर- सुपौल
30 सितंबर- मधेपुरा
7 सितंबर- पूर्णिया
27 सितंबर- अररिया
10 सितंबर- कटिहार
26 सितंबर- किशनगंज
29 सितंबर- खगड़िया