पेट्रोल-डीजल मंहगा बेचकर दोनों हाथों से जनता को लूट रही है मोदी सरकार

आईएनएन भारत डेस्क
पेट्रोल डीजल की कीमतों में एक बार फिर से बढ़ोतरी हो गयी है। डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुके हैं। दिल्ली में सोमवार को डीजल की कीमतों में 15 पैसे के इजाफे के साथ ही सोमवार को दिल्ली में डीजल की कीमत 69.47 रुपए प्रति लीटर हो गयी। जो अब तक का सबसे उंचा रिकॉर्ड है। वहीं कोलकाता में डीजल की कीमत 72.31 रुपए प्रति लीटर और चेन्नई में 73.38 रुपए प्रति लीटर के साथ नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

इस दौरान देश में पेट्रोल के दाम भी बढ़े हैं लेकिन कीमत रिकॉर्ड स्तर तक नहीं पहुंची है। सोमवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 13 पैसे का इजाफा हुआ है जिसके बाद कीमत बढ़कर 77.91 रुपए प्रति लीटर हो गई।

सरकार के हिमायती जानकारों की माने तों इस हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपए के मूल्य में भी गिरावट देखी आई है जिसकी वजह से तेल कंपनियों को कच्चे तेल के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं। ऐसे में इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ रहा है।

परंतु अगर आपको लगता है कि पेट्रोल, डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना है तो ऐसा नहीं है। इसकी प्रमुख वजह है केंद्र सरकार का पेट्रोल व डीजल पर टैक्स के जरिए कमाई की नीति, जिससे लागत के मुकाबले कहीं ज्यादा कीमत आज हमें और आपको चुकानी पड़ रही है। इसका एकमात्र सबसे बड़ा कारण सरकार द्वारा जनता की सीधी लूट है और कुछ नही।

पिछली यूपीए सरकार के समय भी कच्चे तेल की कीमत 2013 में यही थी, लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल व डीजल पर टैक्स काफी कम था, जिससे यह तब सस्ता था। उस समय मोदी और तमाम भाजपा पूरे देश में दौड दौडकर पिछली सरकार को कोसते थे। लेकिन आज केंद्र सरकार द्वारा इन पर जो टैक्स वसूला जा रहा है, उससे ही कीमतें अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। और जनता की जेब कटाई भी अपने रिकाॅर्ड स्तर पर है और ऐसा इसलिए, क्योंकि ऊंची कीमतों का सारा खेल मोदी सरकार रच रही है।
क्यों बढ़ाया गया टैक्स

केन्द्र सरकार अपने चालू घाटे को कम करना चाहती है। पेट्रोल, डीजल पर जो एक्साइज ड्यूटी व वैट लगा है, उससे ही केंद्र व राज्य सरकारों को ही रोजाना सर्वाधिक कमाई होती है। इस कमाई के बल पर ही सरकार अपने चालू खाते के घाटे को कम करने की कोशिश में लगी है।

टैक्स में बढ़ोतरी के कारण सरकार की कमाई में पिछले दो सालों में भारी इजाफा हुआ है। 2014-15 में केंद्र सरकार ने ट्रैक्स के बलबूते 1.3 लाख करोड़ रुपये की कमाई की थी, जो 2016-17 में बढ़कर 2.7 लाख करोड़ रुपये हो गई है। मतलब मोदी सरकाार ने तेल से सीधा 117 फीसदी का इजाफा किया था। हालांकि 2017-18 के आंकड़े अभी मौजूद नहीं है। वहीं राज्य सरकारों ने भी 2014-15 में 1.6 लाख करोड़ रुपये कमाये थे, जो कि 2016-17 में बढ़कर 1.9 लाख करोड़ रुपये हो गई थी। राज्य सरकारों की कमाई में 18 फीसदी का इजाफा देखने को मिला था। इसीलिए साफ जाहिर है कि मोदी सरकार पेट्रोल पर प्रति लीटर 19.48 रुपये तथा डीजल पर 15.33 रुपये का उत्पाद कर वसूल रही है।

इस लूट से साफ जाहिर है कि पिछली यूपीए सरकार को मंहगे तेल के नाम पर कोसने वाले मोदी और उनकी सरकार दोनों हाथों से जनता की जेब काटने में लगी है। जहां मोदी ने नारा दिया था कि एक देश एक कर और देश के व्यापारियों पर जीएसटी थोप दिया था। वहीं मोदी एण्ड कंपनी ने तेल को जीएसटी से बाहर रखा है। अभी भी मोदी सरकार और उनके वकील वितमंत्री अरूण जेटली ने तेल को जीएसटी के दायरे में लाने से साफ इंकार कर दिया है। साफ जाहिर है, जब झूठ से जनता को बेवकूफ बनाकर लूटा जा सकता है तो उन्हें छूट क्यों देना।