राहुल गांधी ने आरएसएस को बताया भारत का मुस्लिम ब्रदरहुड, मातृ संगठन पर हमले से भाजपा बौखलायी

आईएनएन भारत डेस्क
अपने विदेश दौरे पर राहुल गांधी विपक्ष पर खासे हमले कर रहे हैं। इससे भाजपा ना केवल परेशान है बल्कि भाजपा प्रवक्ता बौखलाये हुए हैं। कारण साफ है कि राहुल गांधी अपने विदेश यात्रा में भाजपा नही बल्कि आरएसएस को निशाना बना रहे हैं। लंदन स्थित थिंक टैंक अंतरराष्ट्रीय सामाजिक अध्ययन संस्थान को संबोधित करते हुए राहुल ने आरएसएस की तुलना अरब जगत में आतंकी संगठनों को जन्म देने वाले संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से कर डाली।

आईआईएसएस में बोलते हुए उन्होंने अपने भाषण में आरोप लगाया कि आरएसएस भारत के मूल चरित्र उसके स्वभाव को बदलने और इसकी जनवादी संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है और भारत के विचार को खत्म करने पर उतारू है।

इससे पहले जर्मन के बर्लिन में भी बोलते हुए राहुल गांधी ने गुरुवार को आरएसएस पर निशाना साधा था और आरएसएस की विचारधारा की बखिया उधेडते हुए उन्होंने कहा था कि बीजेपी और आरएसएस भारत के लोगों को बांट रहे हैं जबकि कांग्रेस उन्हें आपस में जोड़ने का काम करती है। उन्होंने आरएसएस पर एक तरह से महिला विरोधी मानसिकता से ग्रसित होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि आरएसएस में महिलाओं के लिए कोई जगह नहीं है और वहां उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक मानता है। वैसे यह सच्चाई भी है आप किसी भी शाखा में किसी महिला को नही देख सकते हैं और ना ही आरएसएस के किसी निर्णायक निकाय में महिलाओ के लिए कोई स्थान है। बुनियादी तौर पर आरएसएस रूढ़िवादी हिंदू ब्राह्मणवादी मर्दो को संगठन है।

लंदन में बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना अरब जगत के इस्लामी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से की और आरोप लगाया कि आरएसएस भारत के स्वभाव को बदलने और इसकी संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। राहुल गांधी के इस हमले के बाद भाजपा ने कहा कि राहुल को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।

असल में राहुल गांधी के इस बयान पर भाजपा की बौखलाहट को वह लोग अच्छी तरह समझ सकते हैं जो मुस्लिम ब्रदरहुड के इतिहास और उसके कारनामों को जानते हैं। आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से करने का मतलब उसे सीधे तौर ब्राह्मणवादी भगवा आतंक का जन्मदाता बताना हो जाता है। क्योंकि मुस्लिम ब्रदरहुड को अरब जगत और दुनिया के विभिन्न इस्लामिक आतंकी और अतिवादी संगठनों का जन्मदाता और प्रेरक और वित पोषक माना जाता रहा है। जिसके कारण कईं अरब देशों में मुस्लिम ब्रदरहुड की गतिविधियों पर प्रतिबंध भी लगा हुआ है। मुस्लिम ब्रदरहुड अलग अलग देशों में अलग नामों और राजनीतिक चेहरों के साथ काम करता है। मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना 1928 में मिश्र में हुई थी। यह भी कमाल ही है कि आरएसएस की तरह यह भी अपने आपकों धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन ही कहता रहा है। और उसकी स्थापना ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ रहे मिश्र के नेशनलिस्ट मुवमेंट से अलग धार्मिक आधार पर हुई थी। यह भी कमाल की बात है कि इस संगठन की स्थापना में उस समय की फ्रांस की कंपनी स्वेज नहर कंपनी की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका बतायी जाती है। इसके अलावा ब्रदरहुड शुरूआती दौर में और पचास के दशक और उसके बाद भी ब्रिटिश सेना की गुप्तचर संस्था एम16 के इशारे पर और बाद में 70 के दशक में सीआईए के इशारे पर काम करने के आरोप लगते रहे हैं। यह बुनियादी तौर सुन्नी मुसलमानों का संगठन है। 1954 में मिश्र के प्रेसीडेंट नासीर को ककत्ल करने के षड़यंत्र रचने के कारण नासीर सरकार ने इस पर रोक लगा दी थी। इसके बाद ब्रदरहुड ने पीस एण्ड जस्टिस पार्टी के नाम से राजनीतिक काम मिश्र में आगे बढ़ाया और 2011 की मिश्र की तथाकथित क्रान्ति के पीछे भी इसकी भूमिका बतायी जाती है। अब मिश्र में मुर्सी के नेतृत्व में एकबार सत्ता पर काबिज होने के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड फिर से मिश्र में प्रतिबंधित संगठन है और इसके अलावा रूस, यूएई, साउदी अरब जैसे कईं देशों में इस संगठन पर रोक है।

आरएसएस की तरह ही मुस्लिम ब्रदरहुड के सैंकड़ों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संगठन और जन संगठन हैं। और दोनों ही धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन का लबादा डालकर काम करते हैं। जैसे आरएसएस भगवा आतंकियों से अपने संबंधों को नकारता है ठीक उसी तरह से मुस्लिम ब्रदरहुड भी अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों से अपने संबंधों को ना केवल नकारता है बल्कि कभी कभी उनकी आलोचना भी करता है। जैसे भारत में आरएसएस कईं बार गौरक्षकों और भगवा आतंकियों के मामले में करता है। वैसे भी कार्यशैली से लेकर जन्म के कारणों और ब्रिटिश साम्राज्यवाद से संबंध तक ब्रदरहुड और आरएसएस में ढ़ेरों समानताएं हैं।

अब इस तुलना से भाजपा में बौखलाहट स्वाभाविक है। राहुल गांधी कांग्रेस से पहले ऐसे अध्यक्ष हैं जो लगातार भाजपा नही सीधे आरएसएस पर निशाना साध रहे हैं। वह जानते हैं कि भाजपा केवल मुखौटा भर है असली ताकत और पूरी गडबडियों की जड़ आरएसएस है और आरएसएस को बेनकाब करने का अर्थ है सीधे भाजपा की जड़ पर हमला करना और संघ के कमजोर होने का अर्थ होगा भाजपा की कमर टूट जाना।