मुजफ्फरपुर मामले में सीबीआई को कोर्ट की कडी फटकार, नीतीश फिर से विपक्ष के निशाने पर

आईएनएन भारत डेस्क
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में पटना उच्च न्यायालय ने सीबीआई को कड़ी फटकार लगाते हुए एसपी जे पी मिश्रा के तबादले पर सवाल उठाये हैं। ध्यान रहे कि मुजफ्फरपुर मामले की जांच में शुरू से जुड़े रहे जांच अधिकारी जे पी मिश्रा का अचानक सीबीआई ने तबादला करके उन्हें जांच से हटा लिया और नये एसपी लखनउ में तैनात देवेन्द्र सिंह को उनकी जगह तैनात कर दिया गया है। पूरे मामले में नीतीश कुमार फिर से एकबार विपक्ष के निशाने पर आ गये हैं। जिस प्रकार राज्य और केन्द्र सरकार इस मामले की जांच में अडंगे डाल रही है उससे नीतीश कुमार और बिहार सरकार पर सवाल उठने लाजिमी हैं।

गुरूवार को हुई सुनवाई में पटना हाई कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए पूछा कि जांच के बीच में कोर्ट की इजाजत के बगैर कैसे जांच अधिकारी एसपी मिश्रा को हटा लिया गया है। कोर्ट ने सीबीआई को एक सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है। कोर्ट की नाराजगी और सख्त रवैये को इसी बात से समझा जा सकता है कि बिहार सरकार के एडवोकेट जनरल गाुरूवार को पेशी पर नही आये और उन्होंने अगली तारीख देने की गुहार लगाई थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया और कहा कि आज ही सुनवाई होगी। उसके बाद कोर्ट ने सीबीआई से पूछा की अभी तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल क्यों नही की गई है।

बता दें कि सीबीआई के एसपी जे पी मिश्रा ने ही नीतीश सरकार में मंत्री मंजू वर्मा से कई घण्टे की लंबी पूछताछ की थी। जिसके बाद मंजू वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जेपी मिश्रा के नेतृत्व में ही मंत्री मंजू वर्मा के घर की भी तलाशी सीबीआई ने ली थी। ध्यान रहे कि मंजू वर्मा के पति का नाम शुरू से ही इस पूरे मामले में लिया जा रहा है और नीतीश कुमार पर उन्हें बचाने के आरोप लग रहे हैं। अब सीबीआई एसपी के तबादले को लेकर भी नीतीश कुमार और केन्द्र सरकार पर उंगलिया उठ रही हैं। इससे पहले भी राज्यपाल सतपाल मलिक ने भी इस मामले में नीतीश कुमार को एक पत्र लिखकर इस मामले को अमानवीय और भयावह अपराध बताते हुए इस मामले में निष्पक्ष जांच कराये जाने की सीख दी थी। यह अजीब इतेफाक है कि राज्यपाल का भी तबादला उसके बाद बिहार से जम्मू कट्ठीर कर दयिा गया है और निष्पक्ष जांच कर रहे जांच अधिकारी का भी अब तबादला जांच के बीच में कर दिया गया है।

कोर्ट ने बाद में एक सप्ताह का समय देते हुए सीबीआई से एक सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा और साथ ही एसपी जे पी मिश्रा को जांच से हटाये जाने पर बंद लिफाफे में स्पष्टीकरण देने को कहा है। इस मामले में ऐसी भी आशंकायें जतायी जा रही हैं कि यदि कोर्ट ने सख्त निर्णय लेते हुए एसपी जेपी मिश्रा को फिर से इस केस में वापस बुला लिया तो बिहार सरकार और उनकी जांच से परेशान ठाकुर के राजनीतिक आका क्या करेंगे। बहरहाल, मामला चाहे कुछ भी मोड ले परंतु इस पूरे मामले में सुशासन बाबू तो अब तक दुःशासन ही सिद्ध हो रहे हैं।