भीम आर्मी ने दिल्ली में फिर से दिखाया दम, जंतर मंतर पर जुटी भारी भीड़

आईएनएन भारत डेस्क
अनुसूचित जातियों के खिलाफ लगातार बढ़ रहे उत्पीड़न और भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ‘रावण‘ की रिहाई की मांग को लेकर भीम आर्मी ने रविवार 19 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया और भाजपा नीत एनडीए को खुली चुनौती दी है। भीम आर्मी ने चंद्रशेखर की रिहाई समेत 4 मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर यह जबर्दस्त प्रदर्शन किया।

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ‘‘रावण‘‘ पिछले साल सहारनपुर में दलित बस्ती पर हुए हमले का विरोध करने के दौरान किये गये प्रदर्शन के बाद से जिला जेल में बंद हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रावण पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई है। यूपी सरकार रावण को आजाद करने से घबरा गयी लगती है इसीलिए रासुका की कार्रवाई को बार बार आगे बढ़ाया जा रहा है। जिस कारण न केवल भीम आर्मी कार्यकर्ता बल्कि सभी बहुजनों में यूपी की योगी और केन्द्र की मोदी सरकार के खिलाफ गुस्सा है।

रावण की रिहाई की मांग को लेकर हुए एक कार्यक्रम के तहत भीम आर्मी पदाधिकारियों प्रवक्ता मनजीत नोटियाल, जिलाध्यक्ष कमल वालिया और अन्य पदाधिकारियों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर 19 अगस्त 2018 को धरना प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद से ही भीम आर्मी कार्यकर्ता गांव गांव जाकर इस प्रदर्शन को सफल बनाने का आहृवान कर रहे थे।

दिल्ली के जंतर मंतर पर किए जा रहे धरना प्रदर्शन को बहुजन संकल्प महासभा का नाम दिया गया था। इस महासभा में शामिल होने के लिए सहारनपुर से कार्यकर्ता एक दिन पहले ही दिल्ली पहुंच गए थे। इसके अलावा आसपास के जनपदों और राज्यों से भी हजारों कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे गये थे।

दिल्ली के जंतर मंतर पर जुड़े भीम आर्मी समर्थकों में अधिकतर नौजवान ही शामिल थे और उनमें चन्द्रशेखर को रासुका के तहत जेल में रखने और भाजपा सरकार के शासन में दलितों पर हमले, संविधान को कमजोर करने और आरक्षण को खत्म करने की संघी साजिशों के खिलाफ भारी आक्रोश था। प्रदर्शन में शामिल नौजवान और नवयुवतियां साफ तौर पर आरएसएस-भाजपा को सबक सिखाने और ब्राह्मणवाद को नेस्तेनाबूद करने के नारे लगा रहे थे। साथ ही इस प्रदर्शन में ‘‘ब्राह्मणवाद से आजादी, संघवाद से आजादी, मनुवाद से आजादी‘‘, लेकर रहेंगे आजादी छीनकर लेंगे आजादी जैसे नारे लगा रहे थे। इस प्रदर्शन में भीम आर्मी के अलावा विभिन्न बहुजन संगठनों के अलग अलग सैंकड़ों कार्यकर्ता भी शामिल थे।