नीतीश कुमार के नेतृत्व में ब्राह्मणवादी आतंकवाद की पिछड़ों पर हमलों की शुरूआत

आईएनएन भारत डेस्क
एससी/एसटी और अल्पसंख्यकों पर लगातर हमले करने के बाद ब्राह्मणवादी आतंकियों ने अब बिहार में पिछड़ों को निशाने पर ले लिया है। जिसका ताजा नमूना मोतिहारी में प्रो. संजय कुमार पर जानलेवा हमले के बाद बेतिया में प्राचार्य हरिनारायण ठाकुर को निशाना बनाया जाना है। पिछड़ों पर जानलेवा हमले जारी हैं और तथाकथित पिछड़ा नेता और बिहार के मुख्यमंत्री इसे उसी खामोशी से देख रहे हैं जैसे कि उन्होंने मुजफ्फरपुर के बालिका यौन उत्पीड़न काण्ड को खामोशी के साथ देखा था। नीतीश की खामोशी सिद्ध कर रही है कि वह पिछड़ा नेता नही बल्कि ‘‘भूमिहार संरक्षक‘‘ ही हैं और भूमिहार उनके लिए जिस जुमले का इस्तेमाल करते हैं, ‘‘ताज तुम्हारा और राज हमारा‘‘ वह उनके लिए एकदम सटीक जुमला है।

यह केवल मोतिहारी में प्रो. संजय यादव और बेतिया में प्रो. हरिनारायण ठाकुर पर हमले की घटनाएं नही हैं, जो नीतीश को भूमिहार संरक्षक और ब्राह्मणवादियों का मुख्यमंत्री सिद्ध करती है बल्कि ऐसी घटनाओं का निरंतर होना और उस पर नीतीश कुमार की लगातार खामोशी है जो उनकी ब्राह्मणवाद के साथ सांठगांठ को उजागर कर रही है।

पिछले दिनों वैशाली के जंदाहा प्रखण्ड़ के प्रमुख मनीष साहनी को उनके कार्यालय में घुसकर हमलावारों ने गोलियों से भून दिया और मुख्यमंत्री खामोश बने रहे और ब्राह्मणवादी मीड़िया ने कभी भी और कहीं भी जंगलरात का राग नही अलापा। मनीष साहनी को जिस प्रकार से हमलावरों ने सरेआम गोलियों से भूना और अधिकारी देखते रह गये। वह साफ जाहिर करता है कि कभी भारत के उत्तर में सामाजिक न्याय के संघर्ष की जमीन के बतौर पहचाने जाने वाले बिहार में आज असल में किसका राज है। इस तथ्य को नीतीश कुमार की खामोशी बार बार पुष्ट करती जाती है।

पिछड़ों पर ब्राह्मणवादी हमलों की सूची के केवल इतनी ही नही इसमें नीतीश के संरक्षण में सक्रिय ब्राह्मणवादी आतंकियों के अलावा ब्राह्मणवादी नौकरशाही के इशारे पर काम करने वाली बिहार पुलिस भी पीछे नही है। घटना शेखपुरा के बलौनी गांव की है जिसमें कोरमा पुलिस ने गांव में वंचित तबके के उपर हमला किया और महिलाओं और बच्चों तक को नही बख्शा। वह महिला जिसने 18 दिन पहले एक बच्चे को जन्म दिया था उसकी गोद से लेकर पुलिस ने बच्चे को दूर फेंक दिया और मां को जेल में बंद कर दिया। एक दूधमंुहा बच्चा जन्म के 18 दिनों बाद ही अपनी से एक महीना दूर रहा और ऐसा केवल एक मां के साथ नही हुआ। गांव की कईं अन्य महिलाओं के साथ यही किया गया। 6 महीने के नवजात को मां से अलग किया गया और 9 माह की गर्भवती महिला को सरेआम पीटा गया। थाना पुलिस के बाद यही काम फिर जिला पुलिस ने किया।

इस घटना की पुष्टि एनडीए सरकार में केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाह का वह पत्र करता है जो उन्होंने नाराज होकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखा था। एनडीए के एक सहयोगी द्वारा लिखा गया पत्र इस तथ्य की पुष्टि करता है कि यह घटना कितनी गंभीर है और इलाके में इस घटना को लेकर कितना आक्रोश व्याप्त है।

यदि इन घटनाओं की सूची तैयार की जाये तो एक लंबी सूची पिछड़ों पर हमलों की बनेगी। इन हमलों से साफ है कि ब्राह्मणवाद समझ रहा है कि बिहार में उसे चुनौती देने वाली ताकत पिछड़े वर्गो की एकता और उनका लड़ाकूपन ही हैं ऐसे में ब्राह्मणवादी आतंकवाद पिछड़ों को लगातार निशाना बना रहा है उन्हें आतंकित करने का प्रयास करके पिछड़ों की चुनौती को तोड़ना चाहता है। ब्राह्मणवादी आतंकवादी जानते हैं कि नीतीश जब तक उनके संरक्षक हैं राज्य के वही असली प्रशासक हैं। यह प्रो. हरिनारायण ठाकुर पर हमले ने फिर सिद्ध कर दिया है कि ब्राह्मणवादी शुक्ला, राय जब एकजुट होकर भी प्रो. ठाकुर के प्रशासनिक वर्चस्व को तोड नही पाये तो उन्होंने अपने परंपरागत ब्राह्मणवादी शस्त्र शारीरिक हमले का सहारा लिया।

प्रो. संजय कुमार और प्रो. ठाकुर पर हमले दो तथ्यों को रेखांकित कर रहे हैं कि दलितों और पिछड़ों का योग्य होना और ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना ब्राह्मणवाद को मंजूर नही है और दूसरा कि उनका हमला इसलिए प्रभावी है कि यह हमला अब ब्राह्मणवाद पिछड़े प्रधानमंत्री और पिछड़े मुख्यमंत्री के मुखोटे की आड़ में कर रहा है। जो वंचित समाज को भ्रम में रखने और बांटने का काम बखूबी कर रहा है।