अधीर और बेचैन प्रधानमंत्री

आईएनएन भारत डेस्क

लाल किले की प्राचीर से अपने अस्सी मिनट से अधिक के भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस सच्चाई के साथ सामने आ ही गये कि वह कितने अधीर और बेचैन हैं। अपनी तमाम मौखिक माया और वाक पटुता के बावजूद वह इसे जानते हैं कि उनके साढ़े चार साल के शासन ने जनता को अधीर और बेचैन कर दिया है और सही में देश ऐसे संकट का सामना कर रहा है जो उसने पहले कभी भी नही किया था। यही कारण है कि प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रोनिक तक सभी मीड़िया समूहों ने इस भाषण को उनका अंतिम भाषण बताया हालांकि उनके कुछ कब्जे वाले मीड़िया ने इसके साथ 2019 के चुनावों से पहले भी जोड़ दिया। उनके कब्जे वाले कुछ मीड़िया ने खेल करने का प्रयास करते हुए कहा कि मोदी ने कुछ ऐसी योजनाओं की बात की जिनकों 2022 में पूरा होना है जिससे साफ होता है कि मोदी को विश्वास है कि वह 2019 में सत्ता में वापसी कर रहे हैं। हालांकि यह सब हवाबाजी है।

प्रधानमंत्री ने दो योजनाओं के बारे में सबसे ज्यादा बात की-स्वास्थ्य सेवा और एक भारतीय को अंतरिक्ष में भेजना-परंतु उन्होंने नही बताया कि जब देश की अर्थव्यवस्था संकट में है तो कैसे यह योजनाएं लागू होंगी। स्वास्थ्य सेवा के लिए ना तो केन्द्रीय बजट में कुछ प्रावधान किया गया है ना ही राज्यों के बजट में। यह पूर्व की तरह एक नारा ही रहेगा। जहां तक इसरो परियोजनाओं का संबंध है, उसमें मोदी सरकार ने कुछ भी नही किया है। हमारे वैज्ञानिक दशकों से इन योजनाओं पर काम कर रहे हैं और इसमें उन्होंने उल्लेखनीय प्रगति की है जिसमें देश को उन पर नाज हैं।

अधिक महत्वूपर्ण वे मसले हैं जिनको प्रधानमंत्री ने जानबूझकर किनारे कर दिया। देश नफरत की हिंसा की चपेट में फंसा है जिसकी जिम्मेदारी शासक संगठन की हैं। लिचिंग से लेकर अल्पसंख्यकों और वंचित तबकों जिसमें दलित पिछडे भी शामिल हैं के खिलाफ उकसावे वाले बयानों से देश अशान्ति के ज्वालामुखी पर खड़ा है। शासक संगठन और उसके मातृ संगठन आरएसएस के द्वारा पोषित नेताओं और संगठनों के उकसावे वाले और जहरीले बयानों से समाज में तनाव व्यापत हैं। प्रधानमंत्री ने इस मसले को एकदम से छुआ भी नही। वह कैसे छू भी सकते हैं? आखिरकार यह सब जातिय और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को तेज करने के लिए ही किया जा रहा है कि 2019 में अपनी तबाही से बचने का उनके पास यही एकमात्र हथियार है।

प्रधानमंत्री ने महिलाओं पर बढ़ते हमलों और बलात्कार के मामलों पर बात की परंतु केवल मध्य प्रदेश और राजस्थान के आगामी विधानसभाआं के चुनावों के संदर्भ में ही बात की। सच्चाई यह है कि अधिकतर रेप मामलों में भाजपा नेता, कैडर और समर्थक ही शामिल हैं जिस पर उन्होंने कोई सफाई नही दी। यहां तक कि वह उन्नाव के विधायक को भी पार्टी से बाहर करने में विफल रहे जिसे कि रेप और पीड़िता के पिता के कत्ल में गिरफ्तार किया गया है।

युवा बेचैन हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ने ‘‘बात‘‘ में एक साल में लाखों लोगों को रोजगार दे दिया है, जिसे अखबारो ने प्रकाशित किया परंतु अपने संबोधन में उन्होंने इसे छुआ तक भी नही। वह रोजगार मुहैया कराने के सवाल पर बुरी तरह से विफल हो चुके हैं। रोजगार मुहैया कराने की बजाये उनकी राजनीति ने करोडों़ को बेकार कर दिया है।

उन्होंने नोटबंदी को छूने से परहेज किया क्योंकि वह जानते हैं कि कालेधन को सफेद करने के नये खुलासों ने जिसमें पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और भाजपा के अन्य नेता लिप्त थे से नोटबंदी का सारा खेल बेनकाब कर दिया है। कालाधन पैदा करना और उसे सफेद करना अब इस सरकार की पहचान बन चुका है।

ठीक यही बढ़ते हुए भ्रष्टाचार पर भी लागू होता है। देष राफेल एयरक्राफ्ट और फ्रांस से डील के बारे में पूछ रहा है। नरेन्द्र मोदी ना केवल पिछली सरकार के मुकाबले तीन गुना देने के लिए सहमत हुए बल्कि फ्रेंच से नयी बनी अंबानी की कंपनी को 35 हजार करोड का भुगतान भी कराया। इस रकम को पाने वाला अंतिम लाभार्थी कौन है? यह भ्रष्टाचार और जनता के ैसे की लूट का खुला मामला है।

राफेल डील के अलावा, प्रधानमंत्री ने पनामा पेपर्स के दो सेटस पर उनकी खामोशी पर कोई सफाई नही दी इसमें उन भारतीयों के नाम हैं जिन्होंने अपना पैसा विदेशी बैंकों में जमा किया है। वह उन पर कार्रवाई करने के लिए तैयार नही है जिनका काला पैसा स्विस बैंक में जमा है और जिसमें मोदी के राज में जोरदार इजाफा हुआ है। गुजरात में सहकारी बैंकों के माध्यम से कालाधन सफेद करने का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। इसमें हजारो करोड रूपये के घाटाले का मामला बनता है और अमित षाह इस फर्जी वाडे में प्रत्यक्ष रूप से संलिप्त हैं।

प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से इन सवालों को अपने भाषण में नजर अंदाज कर सकते हैं परंतु वह अच्छी तरह से जानते हैं कि जनता आने वाले समय में उनसे जवाब मांगेगी और इसकी सजा भी देगी। वह और उनकी पार्टी आने वाले चुनावों में बुरी तरह से साफ हो जायेगी। इसी ने नरेन्द्र मोदी को ‘‘अधीर और बेचैन‘‘ रख छोड़ा है।

(साभारः न्यूएज वीकली संपादकीय)