अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में डाक घर जलाने वाले माननीय सेनानी खलील अंसारी को आईएनएन भारत का सलाम

आईएनएन भारत डेस्क
9 अगस्त 1942 की सुबह बिहार के जिला बक्सर गांव रामपुर का रहने वाला एक बच्चा हर रोज की तरह घर से बसता लेकर स्कूल पढ़ने के लिए गया। लेकिन यह सुबह आम सुबह से बिल्कुल अलग थी। स्कूल में जब सब बच्चे आ गए तो शिक्षकों ने जो कहा उससे बच्चों के होश उड़ गए। शिक्षकों ने कहा कि मुंबई में हुई कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक में महात्मा गांधी ने नारा दिया है कि अंग्रेजों भारत छोड़ो और देशवासियों को संदेश दिया देश के लिए करो या मरो। इसलिए स्कूल छोड़ो और सरकारी संपत्तियों को तहस नहस कर दो।

शिक्षकों का यह कहना था और खलील अहमद अंसारी ने उसी वक्त स्कूल छोड़ दिया। स्कूल ड्रेस में ही भारत छोड़ो आंदोलन में अपना सहयोग देते हुए अपने दोस्तों के साथ मिलकर मुराद इलाके के डाकघर में आग लगा दी। उसके बाद गांव के करीब डाक के एक अधिकारी का सरकारी बंगला था उसमें भी तोड़फोड़ कर दी। घर पहुंचे तो अम्मी अब्बू ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि भारतीय अंग्रेजों की गुलामी से आजाद होंगे और मुल्क आजाद जरूर होगा। इसके बाद तो खलील अहमद ने थाने में आग लगाने के साथ ही रेलवे ट्रैक की पटरी तक उखाड़ी। आंदोलन को खत्म करने के लिए अंग्रेजी हुकूमत को अतिरिक्त फौज मंगवानी पड़ी। सेना ने अंसारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

96 वर्ष के अंसारी आज भी उस वक्त को याद करते हैं तो उनमें देश के लिए वही पुराना जज्बा जाग जाता है। जेल से रिहा होने के बाद अंसारी स्वतंत्रता सेनानी कहलाए। अंसारी पिछले कई वर्षों से अपने परिवार और शिक्षक बेटे असगर अली अंसारी के साथ दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके में रह रहे हैं। अंसारी ने कहा कि गांधी जी के एक आदेश पर पूरा मुल्क एक हो गया था। भारत छोड़ो आंदोलन के आगे अंग्रेज बेबस हो गए थे। देशवासियों की आंखों में सिर्फ एक ही सपना था और वह था आजादी का। जिस वक्त वह इस आंदोलन से जुड़े उनकी उम्र करीब 15 वर्ष की थी। अंग्रेजों से देश को आजाद कराने के लिए वह अपनी जान देने के लिए तैयार थे। देश की आजादी का जश्न उन्होंने ऐसे मनाया था, जैसे उनकी शादी हो गई हो। उन्होंने कहा कि देश को आजाद कराने में मुसलमानों ने भी अहम भूमिका निभाई। जब उनसे पूछा गया कि बहुत से मौके ऐसे आए हैं जब कुछ लोगों ने कहा कि मुसलमानों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए, इसके जवाब में अंसारी ने तपाक से कहा कि यह सोच वही रखते हैं जिन्होंने देश की आजादी में कोई भूमिका नहीं निभाई।

खलील अंसारी साहेब का जेल जीवन

अंग्रेजी सेना ने आंदोलन में शामिल होने की वजह से अंसारी को 6 महीने तक बक्सर की जेल में बंद रखा। वहां उन्हें बहुत यातनाएं दी गई। सजा के तौर पर कमर पर कोड़े मारे गए और कंकड़ वाली दाल खाने को दी गई। अंग्रेज जब पूछते कि आजादी का भूत उतरा या नहीं तो खलील साहेब का एक ही जवाब होता ‘‘इंकलाब जिंदाबाद‘‘। आंदोलन के कारण परिवहन व्यवस्था अस्त व्यस्त हो गई थी। परिवार से बस उनके अब्बू ही उनसे मिलने के लिए जेल जाते। एक दिन उनके अब्बू कई किलोमीटर पैदल चलकर थाने गए सिर्फ यह पता करने के लिए उनके बेटे पर कौन सी धाराएं लगाई गई हैं।

खलील अंसारी की प्रेरणा बड़े भाई

सरदार मोहम्मद हवलदार अंसारी, खलील अहमद के बड़े भाई थे और वह उस दौरान एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। सरदार शुरू से ही गांधी जी के साथ इस आंदोलन से जुड़े हुए थे। हवलदार ने गांधी जी के साथ कई मी¨टग में भाग लिया है। एक बार उन्होंने दिल्ली में खलील अहमद को भी गांधी जी से मिलवाया था। बिहार के जाने-माने स्वतंत्रा सेनानी अब्दुल क्यूम अंसारी के बंगले से सरदार को गिरफ्तार किया गया था। दो वर्ष तक वह जेल में रहे। अपने बड़े भाई को खलील अपना प्ररेणास्त्रोत मानते हैं। दोनों भाई एक साथ जेल में बंद हुए थे लेकिन खलील को कम सजा हुई थी।

राष्ट्रपति ने भी किया सम्मानित

इस वर्ष कई स्वतंत्रता सैनानियों को राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिला। इसमें खलील अहमद भी शामिल हैं। 9 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में एट होम-2018 कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर अंसारी ने कहा कि उन्हें गर्व कि उन्होंने देश को आजाद कराने में अपनी भूमिका निभाई।

खलील अंसारी साहेब से आईएनएन भारत के संपादक की मुलाकात इसी साल ईद के दिन हुई थी। जब वह उनके बेटे असगर अली अंसारी के आमंत्रण पर उनके मुस्तफाबाद स्थित आवास पर गये थे। 96 साल की उम्र में भी उनके अंदर जो जोश और जज्बा है वह ना केवल तारीफ के काबिल है बल्कि प्रेरक भी है। इस उम्र में भी वह देश दुनिया की तमाम घटनाओं पर नजर रखते हैं और उनमें ना केवल दिलचस्पी दिदखाते हैं बल्कि अपनी बेबाक राय भी रखते हैं। आजादी के सात दशक पूरे होने और अंसारी के 96 साल के हो जाने के बाद भी उनके भीतर देशप्रेम को लेकर और देश को सांप्रदायिक आधार पर बांटने वालों के खिलाफ जो भावना और स्पष्टता है उसके लिए आईएनएन भारत आजादी की पूर्व संध्या पर स्वतंत्रता सेनानी खलील अंसारी साहेब को सलाम पेश करता है।