भारतीय इतिहास का एक यादगार दिन, बहुजनों के गौरव का दिन

जयंतीभाई मनानी
आज 7 अगस्त का दिन देश के 90 प्रतिशत से ज्यादा सैंकडों सालो से शोषित और उपेक्षित अद्विजों के लिए क्रांतिकारी दिन है। अब सवाल है कि यह दिन शोषितों के लिए महत्व का क्यों हैः

1. आज के दिन शोषित समाज दल की स्थापना 1972 को जगदेवप्रसाद कुशवाहा और डॉ. राम स्वरूप वर्मा ने की थी।

2. आज के दिन देश के 54 प्रतिशत से ज्यादा अद्विज ओबीसी समुदाय को सरकारी प्रशासन में 27 प्रतिशत संवैधानिक आरक्षण को लागू करने के लिए मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा 1990 में वी पी सिंह सरकार ने की थी।

7. अगस्त 1972 को शोषित दल तथा रामस्वरूप वर्मा की पार्टी ‘समाज दल’ का एकीकरण हुआ और ‘शोषित समाज दल’ नामक नयी पार्टी का गठन किया गया था।

एक दार्शनिक तथा एक क्रांतिकारी के संगम से पार्टी में नयी उर्जा का संचार हुआ। जगदेव बाबू ने पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में जगह-जगह तूफानी दौरा आरम्भ किया। वे नए तथा जनवादी नारे गढ़ने में निपुण थे।

सभाओं में जगदेव बाबू के भाषण बहुत ही प्रभावशाली होते थे, जहानाबाद की सभा में उन्होंने कहा था-

दस का शासन नब्बे पर,
नहीं चलेगा, नहीं चलेगा।
सौ में नब्बे शोषित हैं, नब्बे भाग हमारा है।
धन-धरती और राजपाट में, नब्बे भाग हमारा है।

देश में आज 3 राज्य देश के अद्विजो के लिए मॉडल स्टेट हैं।
1. तमिलनाडु. 2. केरल और 3. बिहार

-1967 से तमिलनाडु के शासन में अद्विजों की शासन में पर्याप्त सामाजिक भागीदारी रही है। जिस में प्रमुख योगदान नारायण गुरु और रामासामी पेरियार के सामाजिक परिवर्तन के आंदोलनों का है।

-बिहार में 1990 से आज तक शासन में अद्विजों की पर्याप्त सामाजिक हिस्सेदारी है। जिस में त्रिवेणी संगम, शोषित समाज दल और 7 अगस्त 1990 को वीपी सिंह सरकार द्वारा 27 प्रतिशत संवैधानिक मंडल आरक्षण को लागु करने की घोषणा शामिल है।