इलाहाबाद में प्रियंका के राजनीति में आने का लगा पोस्टर, विपक्ष सकते में

आईएनएन भारत डेस्क
पिछले दिनों खबरें आ रही थी कि सोनिया गांधी अबकी बार रायबरेली से चुनाव नही लडेंगी जिसके बाद रायबरेली सीट पर चुनाव लड़ने वाले कांग्रेसी के नाम पर अटकलें लगनी शुरू हो गयी थीं। इसमें सबसे प्रमुख नाम प्रियंका गांधी का उभरकर सामने आया था। जिसके बाद से प्रियंका के राजनीति में आने को लेकर तमाम तरह के कयास लगाये जाने लगे थे। इस पूरे प्रकरण से उत्साहित होकर प्रियंका के एक पुराने समर्थक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने फिल्मी अंदाज में एक पोस्टर जारी कर दिया है। ‘‘इंदिरा का खून, प्रियंका इज कमिंग सून‘‘। जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में विशेषकर सतारूढ़ विपक्षी खेमे में अजीब सा हडकंप मचा हुआ है।
ध्यान रहे कि रायबरेली से बेशक सोनिया गांधी सांसद हों उनके प्रचार से लेकर तमाम तरह के राजनीतिक गैर राजनीतिक कामों को देखने की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी की ही है। इसी कारण से जब यह खबर मीड़िया में चली की सोनिया गांधी 2019 का लोकसभा चुनाव नही लड़ेंगी तो स्वाभाविक रूप से सोनिया के बाद प्रियंका के नाम की ही चर्चा होनी थी। और इस चर्चा के कारण ही जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी और उत्साह की लहर दौड गयी है तो वहीं विपक्ष एक अजीब से अनजाने डर से परेशान और चिंतित है।

हालांकि जिस कांग्रेसी कार्यकर्ता ने यह पोस्टर जारी किया है उसकी तस्वीर भी पोस्टर पर है और बताया जाता है कि वह पहले भी प्रियंका को राजनीति में लाने की मांग को लेकर इस प्रकार का अभियान चलाता रहा है। अबकी बार सोनिया गांधी के रायबरेली से चुनाव नही लड़ने की खबर के कारण उक्त कार्यकर्ता की इस मांग को ऐसे पेश किया जा रहा है कि मानों जल्दी ही प्रियंका राजनीति में आ रही हैं। हालांकि कांग्रेस और गांधी परिवार की तरफ से प्रियंका के राजनीति में आने और नही आने को लेकर कोई स्पष्टीकरण जारी नही किया गया है।

फिर भी सबको पिछले चुनावों का वह किस्सा अभी तक भी याद है जब प्रियंका की रायबरेली और अमेठी में सक्रियता को लेकर भाजपा के कईं नेताओं ने अजीब तरह के तंज कसे थे तो उनका जवाब देते हुए प्रियंका ने हंसते हुए ही सही एक चुनौती के अंदाज में कह दिया था कि वो क्या चाहते में राजनीति में आउं, आउं क्या? उसके बाद संघी खेमे का सन्नाटा देखने और समझने लायक था। किस कदर ना जाने किस आशंका से संघी खेमा उनके राजनीति में आने घबराता है। शायद देश की जनता उनमें उनकी दादी इंदिरा गांधी की छवि देखती है और यही विपक्ष के लिए चिंता का कारण भी है।

इसके अलावा एक अन्य किस्सा मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जुड़ा हुआ है। हर बात को जुमला बनाकर उसका फायदा ले लेने वाले मोदी ने किसी मौके पर कह दिया था कि प्रियंका तो उनकी बेटी जैसी हैं। उस पर बेहद तल्ख टिप्पणी देते हुए प्रियंका ने कहा था कि मैं केवल राजीव गांधी की बेटी हूं और मुझे उनकी बेटी होने पर गर्व है। इसके बाद मोदी की सारी जुमलेबाजी को अजीब सा विराम लग गया था। शायद मोदी उनसे किसी प्रकार की बहस से होने वाले नुकसान को जानते थे। वैसे भी प्रियंका का जवाब देने की अपनी शैली रही है। वह लोगों के साथ कुछ मिनटों के अपने संवाद से वह बात पैदा कर देती हैं, जिसे पैदा करने में कई भाषणबाज नेताओं को घण्टों लग जाते हैं। यह प्रियंका गांधी की विशेषता है कि वह एक या दो सटीक वाक्यों में अपना संदेश देने में कामयाब होती हैं, अपनी बात जनमानस तक पहुंचा देती हैं।

अब जब प्रियंका के नाम से कमिंग सून का पोस्टर मैदान में आ गया है तो शब्दवीर विपक्ष में बौखलाहट होना और हडकंप मचना तो लाजिमी है।