कौन हैं असली गुनाहगार जिन्हें बचाना चाह रही है बिहार सरकार और दुःशासन बाबू

आईएनएन भारत डेस्क
मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले में अभी तक कि बिहार सरकार की प्रतिक्रिया जाहिर कर रही है कि सुशासन बाबू की सरकार किसी बड़े रसूखदार शख्स अथवा कईं बड़े लोगो को बचाने का प्रयास कर रही है। और यह भी तय है कि किसी को बचाने के इस खेल में केवल सुशासन बाबू ही बल्कि उनके साथ ही सूबे के मुख्यमंत्री सुशील मोदी सहित पूरी सरकार शामिल है। जैसे जैसे इस केस में नई खुलासे हो रहे हैं उससे इस केस में बड़े लोगों की संलिप्तता की पुष्टि हो रही है।

इस मामले के मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर की जेल जाते हुए बेबाक हंसी की तस्वीरें उनके बडे रसूख वाला और इस केस को लेकर बेफिक्र होने की गवाही दे रही हैं। ठाकुर की हंसी इस बात का सबूत है कि उसे इस पूरे मामले की कोई खास फिक्र है भी नही और जैसे उसे मालूम हो कि यह मामला कुल मिलाकर कितने दिनों में और कैसे निपट जायेगा। इसके अलावा भी बृजेश ठाकुर की मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के साथ की तस्वीरें सोशल मीड़िया पर वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में भी बलिका गृह का मुख्य आरोपी ठाकुर ना केवल काफी सहज नजर आ रहा है बल्कि वह राज्य के दो सबसे बड़े राजनेताओं के साथ बेहद अधिकारपूर्वक खडा नजर आता है। मानों कि यह उसका दैनिक नित्य कर्म है।

ठाकुर की यह हंसी कहती है कि कानून का उसे कोई खौफ नही, कोई तो है जिस पर उसे विश्वास है कि बचा ही लेगा

वैसे यह सहजता बेवजह नही है बल्कि इस सहजता के गवाह राज्य सरकार के खजाने से उसके कमाये करोडों रूपये और बेशुमार संपति है जिसे उसने इसी नियमित सहज संबंधों के आधार पर कमाई है। इसमें केवल दर्जनों गैर सरकारी संगठनों से कमाई गई दौलत ही नही है बल्कि उसके दो अखबारों की कमाई भी है। और अखबार भी ऐसे जिनकी महज कुछ काॅपी और वह भी केवल मंत्रालयों और कुछ विभागों में रखने के लिए प्रकाशित की जाती थी।

बृजेश ठाकुर के अनजाने अखबारों में छपे करोडों के विज्ञापन सरकारी मिलीभगत की जीवंत गवाही हैं
केवल एनजीओ के माध्यम से ही नही बल्कि अखबार प्रात ‘कमल‘के माध्यम से भी सरकारी खजाने को लूटा बृजेश ठाकुर ने

फर्जी गैर सरकारी संगठनों और फर्जी अखबारों के दम पर करोडों की कमाई बगैर राजनीतिक सांठगांठ के संभव ही नही है। और इसमें भी राज्य से लेकर केन्द्र की भाजपा सरकार सभी ठाकुर के कुकर्मों पर कृपा बरसा रहे थे। अब सवाल यह है कि कौन कौन लोग हैं जिनके राज ठाकुर के सीने में दफन हैं और जिनके दम पर ही ठाकुर बेफिक्र हंसी हंसते हुए एक खलनायक की तरह नही बल्कि एक नायक की तरह जेल जाता है।

बिहार से लेकर दिल्ली तक के अशीर्वाद के साक्षी थे ठाकुर के अखबारों में छपे विज्ञापन

केवल ठाकुर का फर्जीवाडा ही नही बल्कि यौन शोषण का शिकार मासूम बच्चियों के बयान भी इस पूरे भयावह काण्ड में बडे लोगों की भागीदारी को जाहिर करते हैं। यौन उत्पीडन का यह अमानवीय दौर ना केवल बालिका गृह में अंजाम दिया जाता था बल्कि बच्चियों को अनजान जगहों पर भी भेजा जाता था और इतनी छोटी बच्चियां यह भी नही जानती हैं कि जहां उन्हें ले जाया जाता था वह जगहें कौन सी थी। यदि हम हाल ही में इन बच्चियों के दिये गये वह बयान जिनकी चर्चा मीड़िया और सोशल मीड़िया में है, को सुने तो समझ सकते हैं कि राज्य के कुछ रसूखदार राजनेताओं की इस पूरे काण्ड़ में सक्रिय भागीदारी थी। आइये एक नजर इन बयानों पर डालते हैं।

बृजेश ठाकुर के अखबारों पर ना केवल बिहार बल्कि केन्द्र सरकार की भी भरपूर कृपा बरसती थी

मुजफ्फरपुर में हुए शेल्टर होम (बालिका गृह) रेप मामले में पीड़ित बच्चियों ने अपनी दर्द भरी दास्तां सुनाई है। उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने अपनी आपबीती सुनाई है। एक 10 साल की लड़की ने बताया, जैसे ही सूरज डूबता था, लड़कियां डरी हुई रहने लगती थीं। वे रातें आतंक से भरी हुई थी। लड़कियों ने इस मामले में दो लोगों के नाम लिए हैं, जिसमें से एक को वे ‘नेताजी’ और दूसरे को ‘हंटरवाला अंकल’ कह रही हैं। माना जा रहा है कि जिन्हें नेताजी बोला जा रहा है कि वह बिहार सरकार में एक मंत्री के पति हैं। वहीं ‘हंटरवाला अंकल’ बालिका गृह संचालक आरोपी ब्रजेश ठाकुर को कहा जा रहा है। बृजेश ठाकुर जहां जेल में है तो मंत्री के पति की गिरफ्तारी की मांग लगातार जोर पकड रही है परंतु बिहार सरकार इस मांग को लगातार ना केवल नजर अंदाज कर रही है बल्कि ‘नेताजी‘को बचाने का लगातार प्रयास कर रही है।

एक अन्य लड़की ने बताया, ‘हमें टॉर्चर किया जाता था, भूखा रखा जाता था, इंजेक्शन लगाए जाते थे। हर रात लड़कियों के साथ रेप होता था। अगर कोई लड़की बात नहीं मानती थी और विरोध करती थी, तो ‘हंटरवाला अंकल‘ छड़ी से खूब पिटाई करता था। जैसे ही वह किसी के कमरे के आता था, तो सारी लड़कियां डर जाती थीं।’ एक दूसरी लड़की ने बताया, ‘हम रोज किरण मैडम को इस बारे में बताते थे। उनसे बचाने की गुहार लगाते थे, लेकिन वह कुछ नहीं करती थीं। वह हमारी बात नहीं सुनती थीं। मालूम हो कि किरण सहित तीन महिलाओं को बालिका गृह में बच्चियों की देखरेख के लिए रखा गया था। इन्हें भी गिरफ्तार किया गया है।

एक और लड़की ने कहा, ‘मेरे साथ एनजीओ के लोगों ने और कई बाहरी लोगों ने कई बार रेप किया। मैं कई दिनों तक चल नहीं पा रही थी। कई बार मुझे बालिका गृह से बाहर ले जाया जाता था। मुझे नहीं पता वे लोग कहां ले जाते थे। लेकिन फिर अगले दिन ही वापस लाया जाता था।’

अब इन बयानों से जाहिर होता है कि यह मामला केवल बालिका गृह में बच्चियों के यौन उत्पीड़न का नही है बल्कि उन्हें बाहर भी ले जाया जाता था और इस पूरे काण्ड में ऐसी भी हस्तियां संलिप्त थी जो स्वयं चलकर बालिका गृह नही आ सकती थी और उनके ठिकानों पर ही ठाकुर उन्हें बच्चियां सप्लाई करता था। अब वो कौन लोग हैं और कहां कहां बच्चियां भेजी जाती थी यह तो निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है। वैसे सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए बिहार सरकार को नोटिस किया है और न्यायपालिका के स्वतः संज्ञान लेने से कुछ आशा जरूर जगी है। शायद आने वाले समय में उन ‘बडे‘ और ‘रसूखदार‘ लोगों के नाम सामने आ सकें जो इस पूरे काण्ड के असली खिलाडी हैं और जिनकी कृपा से बृजेश ठाकुर ने बिहार के सरकारी खजाने को लूटा है।