भ्रष्ट अधिकारी का मनमानापनः सिद्धार्थनगर सदर एसडीएम के आदेश की तहसीलदार ने उडायी धज्जियाँ

आईएनएन भारत डेस्क
लखनऊः माननीय मुख्यमंत्री योगी जी, आपके राज्य के सिद्धार्थनगर में भ्रष्टाचार अपने चरम सीमा पर है, एक अघिकारी इंसाफ के साथ आदेश करता है तो दूसरा अधिकारी पैसे की चमक के बल पर अपने उच्च अधिकारी के आदेश की धज्जियाँ उड़ाते हुए अपनी मनमानी करता है।

पूरा मामला ये हैं कि सिद्धार्थनगर एसडीएम सदर ने एक जमीन के विवाद पर अपने आदेश पर लिखा कि मामला विचाराधीन है इसलिए उक्त जमीन की पैमाईश नहीं की जा सकती, दूसरी तरफ तहसीलदार सदर उक्त जमीन की पैमाईश के नाम पर दूसरी पार्टी से इतने प्रभावित हो गये कि लेखपालों के सहयोग से उक्त जमीन की पैमाईश कराने की ठान ली, दिनांक 29 जुलाई 2018 (रविवार), समय करीब दोपहर के 2 बजे पुलिस दल बल के साथ लेखपाल पहुँच गये, पैमाईश का काम शुरू कर दिया। पुलिस दल बल की वजह से पूरे गाँव के लोग तमाशबीन बने रहे।

वहीं इस पैमाइश से सिद्धार्थनगर की जनता में काफी गुस्सा है। वहां मौजूद भीड़ आपस में काना फूसी करती है कि माननीय मुख्यमंत्री जी, जब सिद्धार्थनगर सदर एसडीएम के पैमाईश ना कराने के आदेश के बावजूद आखिर तहसीलदार सदर ने कैसे पहल करके पैमाईश करा दी और पुलिस व्यवस्था देने की पहल करने वाले अघिकारियों ने आखिर एसडीएम के आदेश के खिलाफ पुलिस दल कैसे दे दिया।

ये बड़ा सवाल है आखिर कोई तहसीलदार अपने बड़े अधिकारी के आदेश की धज्जियाँ कैसे उड़ा सकता है। इससे साफ है कि तहसीलदार ने इस जमीन की पैमाईश कराये जाने में इतना दिलचस्पी क्यों दिखाई हैं। कही इस पैमाईश के बदले कोई बड़ी डील तो नहीं हुई है। इस तरह के तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका भी बहुत संदिग्ध जान पड़ती है।