बालिका गृह के पाप में धंसी बिहार सरकार अब छेड़खानी-छेड़खनी से मामला दबाने निकली

आईएनएन भारत डेस्क
बौखलायी हुई बिहार सरकार नंगई के साथ यौन उत्पीड़न के मुज्जफरपुर महाकाण्ड पर अपने असली भगवा रंग में आ गयी है। जब पूरे देश में आज बालिका गृह यौन उत्पीडन मामले के खिलाफ प्रदर्शनों की बाढ़ सी आ गयी और बिहार सरकार ना केवल इस मामले में घिरती दिखाई पड़ रही है बल्कि उसकी संलिप्तता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। तब ऐसी स्थिति में भगवा राजनीति ने अपना असली रंग दिखा दिया है। बिहार भाजपा के सबसे बड़े नेता माने जाने वाले और बिहार की सत्ता में अधिकतम उप मुख्यमंत्री पद तक सिमट जाने वाले सुशील मोदी ने एक अटपटा बयान देते हुए कहा है कि लालू यादव के दोनों बेटे लडकियों से छेड़खानी के मामलों में लिप्त रहे हैं।
सुशील मोदी के बयान से जाहिर ऐसा होता है कि मानों वह कह रहे हों लालू के दोनों बेटे लडकियों से छेड़खानी में लिप्त रहे हैं तो हमारे सुशासन में 10 और 14 साल की लडकियों का बर्बर यौन उत्पीडन होता रहा है तो क्या हुआ? यह तर्क भगवा राजनीति के असली रंग को उसके भयावह प्रतिक्रियावाद को दर्शाता है। ऐसा पहली बार नही हो रहा है कि भाजपा ऐसे तर्कों का सहारा ले रही है। भाजपा जब फंसती है और बुरी तरह बेनकाब हो जाती है तो इन्ही प्रतिक्रियावादी तर्को का सहारा लेती है। हाल ही में संसद में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और देश के माननीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इसी तर्क के सहारे मोब लिंचिंग की औपचारिकतापूर्ण निन्दा के बाद मोब लिंचिंग का बचाव करते हुए कहा था कि सबसे बड़ी मोब लिंचिंग तो 1984 में हुई थी। यहां तक कि यूपी के मुख्यमंत्री ने तो कह दिया था कि आज मोब लिंंिचग पर शोर क्यों सबसे बड़ी मोब लिचिंग 1984 में हुई है अर्थात आज हमें कर लेने दो। जिसका इस्तेमाल अलवर के रकबर हत्याकाण्ड में उनके नेताओं ने सरेआम किया था। इसी प्रकार 2002 के गुजरात नरंसहार में जब भगवा राजनीति के ढ़ेरों बडे नाम फंसे तो पूरे देश में भगवा कैडर का यही तर्क था कि इससे बड़ा सांप्रदायिक दंगा तो 1984 का था। बेशर्मी की हद यहां तक थी कि हर गली मोहल्ले का भगवा कार्यकर्ता यही कहता फिरता था कि कांग्रेस अपने गिरेबान में झांके। जहां 2002 का नाम लिया तो भाजपाई 1984 की पोटली खोलकर दंगे की दुकान सजा लेते थे। मानों कि देश में दंगे की कोई प्रतिस्पर्धा चल निकली को कि तुम्हारा दंगा और हमारा दंगा। तुम्हारी लाशें और हमारी लाशे। असल में यही फासीवादी भगवा राजनीति का असली रंग है। जो कत्लों गारत की राजनीति को भी न्यायोचित बतो के कुतर्क गढ़ लेती है। यही भयावह प्रतिक्रयावाद है।
अब सवाल यह है कि लालू यादव के दोनों बेटे लडकियों से छेड़खानी में लिप्त थे, तब माननीय सुशील मोदी आप कहां थे। और आज जब आपकी सरकार मासूम बच्चियों के साथ मुज्जफरपुर के अमानवीय, भयावह दुराचार काण्ड़ में फंसती नजर आ रही है तो अचानक लालू यादव के बेटों की छेड़खानी कहां से चली आयी। साफ है कि आप अपनी सरकार की कीचड में सभी को घसीटकर सबको दागदार बनाना चाहते हैं। आप चाहते हैं कि गली गली में सांप्रदायिक और जातिवाद का जहर फैलाने वाले आपके कैडर को बालिका गृह के यौन उत्पीडन के बचाव का औजार मिल जाये। आपके गिरेबान पर हाथ पड़ते ही आप प्रमुख विपक्षी की गिरेबान पर भी कीचड़ लपेट दें। आपकी नीयत पीड़ित बलिकाओं को न्याय दिलवाने की नही अपने अन्याय को बचाने की है। हाथों में हथकड़ी और जेल जाने के बावजूद इस पूरे मामले के मुख्य आरोपी बृजेश सिंह के चेहरे की निश्चन्तता बयान करती है कि वह अन्याय की जीत को लेकर निश्चिन्त है।
लालू के बेटों को छोड़िये उप मुख्यमंत्री महोदय आपको इस पूरे मामले में कईं ऐसे सवालों के जवाब देने हैं जो आपकी सरकार के लिए मुश्किल होंगे।
1. बृजेश सिंह को किस आधार पर आपकी सरकार सालाना 1 करोड रूपये देती थी। जिसमें से 40 लाख केवल बलिका गृह में यौन उत्पीड़न के लिए इस्तेमाल होते थे।
2. जब बृजेश सिंह पर एफआईआर हो रही थी तब भी आपकी सरकार ने उसे एक टेंडर किस आधार पर दे दिया था? बालिका गृह में बच्चियों के यौन शोषण के मामले में 31 मई को ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और उसी दिन बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग ने उन्हें पटना में मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत एक और अल्पावास का टेंडर दे दिया। मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना?
3. आपके अधिकारी नियमित निरीक्षण के लिए आते थे तो उन्होंने बालिका गृह की करतूतों पर आंखें क्यों मंूदे रखी।
4. टिस्स की रिपोर्ट को महीनों तक क्यों दबाये रखा गया उसका दोषी कौन है और किसके इशारे पर यह रिपोर्ट दबाई गयी।
5.  मुजफ्फरपुर में ठाकुर को वृद्धाश्रम, अल्पावास, खुला आश्रय और स्वाधार गृह के लिए भी टेंडर मिले हुए थे। खुला आश्रय के लिए हर साल 16 लाख, वृद्धाश्रम के लिए 15 लाख और अल्पावास के लिए 19 लाख रुपए मिलते थे। एक आदमी की समाज सेवा पर इतनी मेहरबानी क्यों? इतने टेंडर कैसे मिले?
6. इन सवालों के जवाब बिहार के समाज कल्याण विभाग और बाल संरक्षण विभाग को देने होंगे।
7. मुजफ्फरपुर की एसएसपी हरप्रीत कौर कहती हैं कि ब्रजेश ठाकुर को टेंडर देने में कई नियमों का उल्लंघन किया गया है। इस नियम उल्लंघन का दोषी कौन है और वह एफआईआर का हिस्सा क्यों नही है?
8. बृजेश सिंह ठाकुर का घर नियमानुसार बालिका गृह के योग्य नही था फिर भी उसे टेंडर दिया गया। किसके कहने पर?
9. समाज कल्याण विभाग के पास टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की रिपोर्ट महीनों से मौजूद थी और उसे पता था कि ब्रजेश ठाकुर का एनजीओ सेवा संकल्प कई मामलों में संदिग्ध है। फिर भी यह टेंडर क्यों दिया गया।
10. समाज कल्याण विभाग के निदेशक राजकुमार का कहना है कि उन्हें पता चला तो उन्होंने 7 जून को इस टेंडर को रद्द कर दिया। लेकिन राजकुमार की यह बात अपने आप में झूठ है। जब टिस की रिपोर्ट मार्च में आ गई थी तो मई में फिर से नया टेंडर क्यों दिया गया? इस टेंडर लेटर पर राजकुमार का ही हस्ताक्षर है। उप मुख्यमंत्री जी इस राजकुमार का राजा कौन है?
11. ब्रजेश ठाकुर के खिलाफ इतनी चीजें आने के बावजूद उन्हें टेंडर किसने दिलवाये?
12. ब्रजेश ठाकुर के अखबार प्रातः कमल को बिहार सरकार विज्ञापनों और तमाम तरह के फायदों के क्या कारण थे? क्या बृजेश सिंह ठाकुर की समाज सेवा से लेकर मीड़िया तक अकेला योग्य व्यक्ति था? ठाकुर की योग्यता के कमल खिलाने वाले कौन कौन लोग हैं?
13. हर महीने बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी और शहर के सरकारी अस्पताल की दो महिला डॉक्टर भी निगरानी में जाती थीं, लेकिन सबने अच्छी रिपोर्ट दी और कोई शिकायत नहीं की? किसके इशारे पर?
14. बाल संरक्षण यूनिट के सहायक निदेशक देवेश कुमार शर्मा भी बालिका गृह में निगरानी के लिए जाया करते थे। आखिर देवों के ईश्वर इस ब्राह्मण को भी कोई खबर क्यों नही हुई कि वहां इतना कुछ चल रहा था?
15. डॉक्टर लक्ष्मी और डॉक्टर मीनाक्षी भी महिला डॉक्टर के तौर पर वहां जाती थीं, लेकिन उन्होंने भी कभी आपत्ति नहीं जताई, क्यों?
16. मुकुल रंजन का कहना है कि ब्रजेश ठाकुर ने एनजीओ को चलाने में बहुत चालाकी की है। उन्होंने कहा कि किसी रमेश ठाकुर के नाम से उनका एनजीओ सेवा संकल्प चलता है। जांच में अब तक रमेश ठाकुर नाम का कोई व्यक्ति सामने नहीं आया है। बिहार सरकार ऐसे आदमी को टेंडर दे रही थी जिसका कोई वजूद ही अभी तक सामने नही आया? सुशासन बाबू और माननीय सनातनी उप मुख्यमंत्री बतायें कि किसलिए ऐसे फर्जी नाम को काम दिया गया?
17. मुजफ्फरपुर पुलिस ने अपनी सुपरविजन रिपोर्ट में ब्रजेश ठाकुर की करोड़ों की अवैध संपत्ति होने की बात कही है। परंतु नोटबंदी के बाद देश का सारा कालाधन लाने वाली सरकार और बिहार के सुशासन बाबू की भ्रष्टाचार से कभी भी समझौता नही करने वाली सरकार एक अवैध संपति वाले व्यक्ति पर इतनी मेहरबान क्यों?
18. सुपरविजन रिपोर्ट में कहा गया है, ठाकुर के फर्जी एनजीओ में पदधारक उनके सगे संबंधी, पेड स्टाफ या डमी नाम होते हैं। ऐसे गलत कारनामों से ठाकुर ने करोड़ों रुपए कमाए हैं और इस कमाई में विभाग के आला अधिकारी, कर्मचारी और बैंकर्स शामिल हैं। ठाकुर की पकड़ इतनी मजबूत है कि विज्ञापन की शर्तों को पूरा नहीं करने पर भी कई टेंडर दिए गए और ऐसा अब भी जारी है। बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति ने बिना विज्ञापन प्रकाशित किए सेवा संकल्प को समस्तीपुर में लिंक वर्कर स्कीम उपहार के तौर पर दे दीं। भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान पर निकली सुशासन बाबू की सरकार की इतनी कृपा ठाकुर पर क्यों?
19. इस रिपोर्ट में ठाकुर के पास पटना, दिल्ली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और बेतिया में करोड़ों की संपत्ति होने का जिक्र किया गया है। इस रिपोर्ट पर केन्द्र के ईमानदार भी खामोश और राज्य के सुशासन बाबू भी चुप?
यौन उत्पीडन और मासूम बालिकाओं के रेप के टेंडर देने वाली सरकार आज जब फंस गई है तो छेड़खानी-छेड़खानी की हवाबाजी करने निकल पड़ी है। उसे लगता है कि इससे मामला दब जायेगा और उनका ठाकुर निश्चिन्त होकर बेदाग बाहर आ जायेगा।