शाह को काले झण्ड़े दिखाने पर लडकियों को बाल पकडकर घसीटा, भांजी लाठियां 

आईएनएन भारत डेस्क
इलाहाबादः संगमनगरी इलाहाबाद में धार्मिक दौरे पर पहुंचे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की गाड़ी के सामने विरोध करने पहुंची छात्राओं को पुलिस ने बाल पकड़कर सड़क पर घसीटा और बेटी बचाओं, बेटी बचाओ का नारा देने वाली मोदी की भाजपा सरकार की पुलिस छात्राओं पर लाठियां भी बरसाई। लगता है कि इसी कारण कहा जा रहा है कि मोदी का नारा बेटी बचाओ माता पिता के लिए एक चेतावनी है कि भगवा राजनीति की खोपड़ी से अपनी ‘‘बेटी बचाओ‘‘।

बमरौली में एयरपोर्ट के पास से जब भाजपा अध्यक्ष का काफिला निकल रहा था तो कुछ छात्राएं अमित शाह का विरोध करने के लिए काफिले के सामने आ गईं और उन्हें काला झंडा दिखाने लगी। पुलिस ने विरोध कर रही छात्राओं को साइड करने के लिए बालों से पकडकर घसीटा और पुलिस की गाडी में डालने के क्रम में उन पर लाठियां भी भांजी।

पुलिस द्वारा छात्राओं की पिटाई का यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसके बाद से अब यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या देश की बेटियां अपने हक के लिए प्रदर्शन करती हैं, आगे आती हैं तो उनके साथ यही सलूक किया जाएगा, जो भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे के दौरान किया गया। इसके अलावा कहा जा रहा है कि जैसे अमित शाह कालाधन वापस लाने और हरेक नागरिक के खाते में 15 लाख देने वाले मामले की तरह मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को भी क्यों नही जुमला कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

अमित शाह को काला झण्ड़ा दिखाने वाली दोनों बहादुर लडकियां, गिरफ्तारी के बाद थाने में

बताया जा रहा है कि ये छात्राएं बेरोजगारों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए और रोजगार देने की मांग को लेकर विरोध कर रही थीं। इससे भी कमाल की बात यह है कि मोदी-योगी की पुलिस विरोध करने वाली और काला झण्ड़ा दिखाने वाली लडकियों को उपद्रवी बता रही है। एसएसपी नितिन तिवारी ने कहा कि यह सुरक्षा में चूक नहीं थी बल्कि मुस्तैदी थी, जिसकी वजह से उपद्रवियों को तत्काल दबोच लिया गया। वहीं सिविल लाइंस सीईओ श्रीशचंद्र ने बताया, काला झंडा दिखाने वाली एक लड़की नेहा यादव है, जिसका कनेक्शन पिछले दिनों बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुए बवाल से भी रहा है। अब ऐसा बयान भी केवल भगवा राज की पुलिस ही दे सकती है कि जो लडकियां उनके खिलाफ अश्लील फब्तियां कसने वाले और अश्लील हरकते करने वाले गुण्ड़ों के खिलाफ सड़क पर उतरे उन्हें बवाल करना बताया जाता है। गजब की भगवा राजनीति है, गौरक्षा के नाम पर झूठी अफवाह के आधार पर निरपराध लोगों के हत्यारे आंदोलनकारी और मासूम और अपने हक के लिए लड़ने वाली बेटियां उपद्रवी और बवाल करने वाली। यही है संघी खोपड़ी का जलवा।