एनडीए की टूट की पटकथा तैयार कर रहा बिहार?

बिहार में एनडीए की मुश्किलें थमने का नाम नही ले रही हैं। अभी नीतीश से मुलाकात के बाद अमित शाह ने जोर से शोर से घोषणा की थी कि सभी कुछ ठीक है और अपने चिर परिचित दादागिरी स्टाईल में विपक्ष को कहा था कि नीतीश के लिए लार ना टपकायें। परंतु उसके फौरन बाद बिहार में एनडीए के दूसरे भागीदार उपेन्द्र कुशवाह और उनकी पार्टी ने नीतीश कुमार को ही निशाने पर लेकर ना केवल उन्हें बड़ा भाई मानने से इंकार कर दिया बल्कि आने वाले समय में उनके नेतृत्व को नही मानने की खुली चुनौती दे डाली थी। अभी कुशवाह और उनकी पार्टी की धमकी की धमक कम भी नही हुई थी कि बिहार में एनडीए के एक प्रमुख भागीदार रामविलास पासवान और उनके पुत्र चिराग पासवान भी मोदी और अमित शाह की जोडी के लिए नई सिरदर्दी बनने को उतारू दिख रहे हैं।

रामविलास पासवान और चिराग पासवान ने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव को लेकर जहां पूर्व जस्टिस ए के गोयल पर निशाना साधा है तो उनकी नेशनल ग्रीन टिब्यूनल में नियुक्ति को लेकर सरकार को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। रोहित वेमुला से लेकर, दलितों पर लगातार हमले, चन्द्रशेखर को जेल में डाले जाने से लेकर देशभर में बढ़ते दलित उत्पीड़न पर लगातार चार साल खामोश रहने वाले रामविलास पासवान अचानक से निर्णायक मूड में नजर आने लगे हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि पासवान का यह निर्णायक मूड बेवजह नही है, यह आने वाले आम चुनावों की तैयारी का उनका अपना अंदाज है।

दरअसल, बिहार में सीट बंटवारा मोदी और अमित शाह के लिए एक ऐसी चुनौती बनने जा रहा है जिसका उनके पास कोई इलाज नही है। अमित शाह जितने भी दौरे और बैठकें कर लें इस अनबूझ पहेली का कोई हल निकलने वाला नही है। और अगर बिहार में एनडीए की टूट होती है तो मोदी और अमित शाह को पूरे देश के पैमाने पर अपना कुनबा बचाना भारी पड़ जायेगा। हालांकि यह भी तय है कि बिहार में एनडीए का टूटना तय है। असल में जब से नीतीश की जदयू ने बिहार में बड़ा भाई बनने का राग छेड़ा था तभी से एनडीए की टूट की जमीन बननी शुरू हो गयी थी। पिछले आम चुनावों में 2 सीट जीतने वाली पार्टी 22 सीट जीतने वाली पार्टी का बड़ा भाई बनने को उतारू है तो सीट बंटवारे पर बवाल होना तय है। यदि एनडीए की प्रमुख पार्टी भाजपा कुछ त्याग भी करती है तो उसके लिए उसे भारी त्याग करना पडेगा और अपने पुराने सहयोगियों के सीट कोटे में भी कटौती करने पडेगी। इस कटौती का इशारा भाजपा नेतृत्व ने संभवत पासवान और कुशवाह को दे दिया है जिसके कारण बगावत के यह सुर सुनाई पड़ रहे हैं। सूत्रों की माने तो पासवान को पिछली सात के मुकाबले चार सीटों पर रहने और कुशवाह को चार के मुकाबले दो पर सिमट जाने के संकेत दिये जाने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में है। इस चर्चा में इसलिए भी दम जान पड़ता है कि 40 सीटों में भाजपा और जदयू 17-17 पर और बाकि छह पर पासवान और कुशवाह। इसी फार्मूले को लेकर अमित शाह बिहार को लेकर आश्वस्त थे।

बिहार में भाजपा के पुराने सहयोगी कटौती के लिए भी तैयार हो जाते अगर उनके सामने कोई विकल्प नही होता और मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ और उसमें नीतीश का साथ उन्हें जीत दिलाने की गारंटी होता। परंतु मोदी और नीतीश दोनों की लोकप्रियता में पिछले सालों में भारी गिरावट आई है और कुशवाह और पासवान के पास महागठबंधन के रूप में जीत दिलवाने की गारंटी करने वाला एक बेहतरीन विकल्प भी मौजूद है। ध्यान रहे कि पिछले साल में जहां मोदी और नीतीश की लोकप्रियता का ग्राफ नीचे गया तो वहीं लालू यादव के पक्ष में वोटों का ध्रुवीकरण निर्णायक रूप से हुआ है। अब सीटों की कटौती और जीत पर संशय को देखते हुए पासवान और कुशवाह सीटों के मोल भाव को लेकर बगावती तेवर दिखा रहे हैं और अभी भाजपा से आर पार करने का समय आया नही है इसीलिए दोनों की बगावत प्रतीकात्मक मुद्दों और व्यक्तियों पर है। बहरहाल, आने वाले समय में बिहार ही एनडीए के भाग्य की पटकथा लिखेगा कि एनडीए टूटेगा अथवा रहेगा। अभी तक तो एनडीए में टूट के बचने की संभावनाएं कम ही दिखाई पड़ती हैं।