NGT ने लगाया साउथ दिल्ली के 16000 पेड़ो को काटने पर रोक

आईएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण अर्थात नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रीडेवेलपमेंट के नाम पर काटे जाने वाले लगभग 16000 पेड़ों के मामले में अपना फैसला नहीं सुनाया हैं। लेकिन पेड़ो को काटने पर अभी रोक लगा दी। यानि मामले की अगली सुनवाई तक कोई भी एजेंसी रीडेवलपमेंट वाली जगहों पर कोई भी पेड़ नहीं काट सकती। नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन यानी एनबीसीसी और पर्यावरण मंत्रालय ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए एनजीटी से कुछ और समय मांगा। जिसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इन्हें एक हफ्ते का समय दिया। अगली तारीख 27 जुलाई रखा गया हैं।

अपने जवाब में , अब अगली सुनवाई के दौरान पर्यावरण मंत्रालय समेत एनबीसीसी को यह बताना होगा कि कितने पेड़ों को काटे जाने की जरूरत है और उनके एवज में कितने नए पेड़ लगाए जाएंगे। रीडेवलपमेंट और रीकंस्ट्रक्शन के दौरान नए पेड़ कहां-कहां लगाए जाएंगे? बता दें कि एनबीसीसी की तरफ से पिछली दफा एनजीटी को बताया गया था कि एक पेड़ को काटने पर उसकी जगह 10 पेड़ लगाए जाने की योजना बनाई गई है।

गौरतलब है कि इस संबंध में ग्रीन सर्किल और चेतना जैसी कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं ने एनजीटी में याचिका लगाई थी कि रीडेवलपमेंट के नाम पर दक्षिणी दिल्ली के लगभग आधा दर्जन सरकारी कॉलोनियों में 16 हजार से ऊपर पेड़ काटे जा रहे हैं, जिन्हें तुरंत रोके जाने की जरूरत हैं। इसमें सरोजनी नगर, किदवई नगर जैसी बड़ी कॉलोनियां भी शामिल है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन आधा दर्जन कॉलोनियों में पेड़ों की तादाद ही 18000 के आसपास थी।

अपनी पहली ही सुनवाई में एनजीटी ने पेड़ों की कटाई पर स्टे लगाते हुए तमाम सरकारी एजेंसियों से इस पर अपना जवाब मांगा था। एजेंसियों का एनजीटी को अभी भी नहीं मिल पाया है अलबत्ता सबने जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय जरूर मांग लिया है इस मामले में अगली सुनवाई अब 27 जुलाई को होगी। अगली सुनवाई से पहले सभी एजेंसियों को अपना अपना जवाब देना है।