बहुजन छात्रों पर जेएनयू प्रशासन और भगवा सरकार का एक और हमला, मनीष मीणा सहित अनेक छात्रों पर जुर्माना

आईएनएन भारत डेस्क
जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई हैं, तब से ही लगातार उच्च शिक्षण संस्थानों विशेषकर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय सरीखे संस्थानों पर हमला तेज हो गये हैं। इन उच्च शिक्षण संस्थानों में भी बहुजन समुदाय से आने वालों छात्रों को खसतौर पर निशाने पर रखा जा रहा है। बहुजन छात्रों के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार हरेक स्तर भेदभाव कर रहा है।

आरक्षण का संवैधानिक अधिकार आज खतरे में हैं। सरकार की इन कोशिशों को हम जेएनयू, हैदराबाद यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ यूनिवर्सिटी, जामिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और बीएचयू में नियमित रूप से देख सकते हैं। जेएनयू इस मामले में भगवा सरकार और संघी गिरोह के खास निशाने पर है। जेएनयू में लगातार संवैधानिक और जनवादी अधिकारों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक के बाद एक इस तरह के फरमान और नियम छात्रों व कर्मचारियों के ऊपर थोपे जा रहे हैं, जिससे से पूरा संस्थान अपनी गरिमा खो रहा हैं।

जेएनयू को पूरी तरह बर्बाद करने के लिए केन्द्र की भगवा सरकार के इशारे पर कईं तरह से हमले किये जा रहे हैं। जिसमें सीटों में कटौती, आरक्षण को सही तरह से नही लागू करना, 75 प्रतिशत उपस्थिति, फीस वृद्वि और उसके बाद छात्रों को विरोध प्रदर्शन करने पर रोक के लिए जारी फरमान, अभी नया फरमान जेएनयू प्रशासन का आया हैं कि आपको प्रवेश के समय एक अंडरटेकिंग फॉर्म भरना है। जिसमें लिखा है कि आप कोई भी आंदोलन नही करोगे और करते हो तो प्रशासन अपनी मर्जी से जुर्माना लगायेगा। इसी क्रम में मनीष मीणा जो कि एक आदिवासी पृष्टभूमि से आते हैं, पर भारी जुर्माना ठोका गया है।

जब जेएनयू प्रशासन प्रवेश प्रक्रिया में आरक्षण सही तरह से लागू नही करता है और मोदी जी पकौड़े तलने जैसा बयान देकर देश के शिक्षित नौजवानों का मजाक उडाते हैं तो कुछ छात्र जेएनयू में एक आंदोलन करते हैं। जिस पर प्रशासन इन्हें पांच महीने पहले नोटिस देता है लेकिन कोर्ट उस पर स्टे (रोक) लगा देता है। अभी जब छात्रों को अपनी पीएचडी और एम.फिल जमा करने के लिए पांच दिन मात्र शेष बचे हैं, उस समय प्रशासन उन पर झूठे आरोप लगाकर जुर्माना लगा रहा है। आखिरकार जेएनयू प्रशासन इतनी नफरत छात्रों और बहुजन सवालों को उठाने वाले छात्रों और उनके मुद्दों से क्यों करता हैं। बता दें, मनीष मीणा जेएनयू-एनएसयूआई के उपाध्यक्ष व राजस्थान युवा कांग्रेस के प्रवक्ता भी हैं। अब उन्ही मनीष मीणा पर जेएनयू प्रशासन ने उनके ऐसे महत्वपूर्ण समय पर जुर्माना ठोका है जिससे कि उनकी शिक्षा में बाधा खडी हो जाये और वह अपनी डिग्री भी हासिल नही कर सकें।

यही नही भगवा सरकार के अधिकतर मंत्री छात्र राजनीति से ही राजनीति में आये और सता में बैठे हैं परंतु जेएनयू के छात्रों को राजनीति करने की सजा दे रहे हैं। इसीलिए छात्रसंघ के सभी पदाधिकारियों पर जेएनयू प्रशासन ने संघी मोदी सरकार के इशारे पर जुर्माना लगाया गया है। यही भगवा गिरोह और उसके नियुक्त किये गये तथाकथित शिक्षाविदों का असली चेहरा है। इन तथाकथितशिक्षाविदों की बीमार मानसिकता इनकी मनुवादी, ब्राह्मणवादी सोच के आधार पर ही खडी है जो लगातार दलितों, आदिवासियों, पिछडों और अल्पसंख्यकों के साथ दुश्मन जैसा व्यवहार करती है और उन्हें उच्च शिक्षण संस्थानों से बाहर कर देने की तमाम तरकीबें अजमाती रहती है। मनीष मीणा पर मौजूदा जुर्माना भी जेएनयू प्रशासन की इसी ब्राह्मणवादी मानसिकता को इसकी पूरी नंगई के साथ उजागर कर देता है।

  • raj meena

    सरकार को इसका जवाब देना ही पड़ेगा।