भाजपा 2019 में जीतती है तो भारत ‘‘हिंदू पाकिस्तान‘‘ नही ब्राहमणवादी हिंदू राष्ट्र बन जायेगा

कांग्रेस नेता शशि थरूर का बयान सुर्खियों में है। उन्होंने कहा कि यदि 2019 में भाजपा जीतती है तो वह ‘‘हिंदू पाकिस्तान‘‘ बन जायेगा। थरूर के इस बयान से जहां कांग्रेस ने उन्हें शब्द चुनने की सीख दी है तो वहीं भाजपा ने उन जवाबी हमला बोला है। पंरतु वास्तविकता यह है कि भाजपा को शशि थरूर के बयान से फायदा ही फायदा है और भाजपा इस फायदे को जानती है इसीलिए उसने थरूर के बयान पर हमले का दिखावा किया है।

वास्तव में शशि थरूर का बयान एक ब्राहमणवादी नेता का बयान है। जो भाजपा और संघ के दलित, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर हमले को केवल हिंदू और मुसलमान के सांप्रदायिक विभाजन में बांटकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को तेज करना चाहता है। यदि यह बयान किसी धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय के पैरोकार नेता ने दिया होता तो वह भाजपा की जीत के वास्तविक खतरे को रेखांकित करते हुए कहता की यदि भाजपा 2019 में जीतती है तो भारत एक ब्राह्मणवादी देश बन जायेगा। परंतु शशि थरूर तथाकथित हिंदू एकता को बनाये रखकर अपने बयान से एक सांप्रदायिक बहस को जन्म देना चाहते थे।

वहीं कांग्रेस ने भी उनके बयान पर शशि थरूर को सीख देती हुए उन्हें भविष्य में शब्दों का चयन ठीक से करने की सलाह दी है। कांग्रेस भी भाजपा की जीत में मनुवाद की आहट को पढ़कर भी बोलना नही चाहती है क्योंकि उसे भी हिंदू अगडे वोटो की फिक्र है, जिसमें कि देश के कुछ हिस्सों में उसकी भी पैठ है अथवा भाजपा के बाद हिंदू अगडों के लिए कांग्रेस दूसरा विकल्प है। शशि थरूर के बयान को देखकर हम यह भी नही कह सकते हैं कि यह केवल शब्दों के चयन की कमी है। वास्तव में यह ब्राह्मणवादी हिंदू संस्कार हैं जो दलितों, आदिवासियों और महिलाओं पर अगडों के हमले को स्वाभाविक और पंरपरागत मानता है शशि थरूर के लिए इसमें कुछ भी अस्वाभाविक नही है। अन्यथा शशि थरूर इतने कम शिक्षित नही हैं कि वे भाजपा के चार साल के कार्यकाल में दलितों, आदिवासियों और महिलाओं पर बढ़ते हमलों और पिछडों के मारे जाते हकों को नही जानते हों, इन हमलों के आंकडों को पढ नही सकते हों। परंतु उस कमबख्त ब्राह्मण दिल का क्या करें जो संघ और भाजपा की तरफ रूक रूककर झुकता ही रहता है। मोदी की तारीफ से लेकर संघी करतूतों पर शशि थरूर की खामोशी इसका जिंदा सबूत है।

शशि थरूर का बयान एक ब्राह्मणवादी हिंदू का सतर्क बयान है जो किसी भी कीमत पर तथाकथित हिंदू एकता को टूटने नही देना चाहता है, बेशक हिंदू ब्राह्मणवाद दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और पिछडों को किसी भी हालत में रखे। वह शोषण की अमानवीय यातनाओं की परंपराओं के साथ भी ब्राह्मणवादी हिंदू एकता को टूटने देना बर्दाश्त नही कर सकता है।