विजय घाट और सीआरपीएफ कैंप बना बस माफिया और ट्रेफिक पुलिस की मिलीभगत का गवाह

आईएनएन भारत डेस्क
दिल्ली ट्रेफिक पुलिस और दिल्ली के विभिन्न इलाको की पुलिस बस माफिया के साथ खुले तौर पर मिलकर करके शहर में अवैध बसों के संचालन की छूट दे रही है। तमाम तरह के सबूत सामने आ जाने के बाद भी पुलिस के उच्चाधिकारी इस पूरे मामले पर खामोश हैं।

देखिये कैसे ट्रेफिक पुलिस की मिलीभगत से यह अवैध बसों के संचालन का कारोबार चल रहा है। दिल्ली की रिंग रोड पर विजय घाट के पास बने सीआरपीएफ कैंप के सामने इन अवैध बसों के अवैध बस अड्डे का खुलेआम संचालन हो रहा है। ट्रेफिक पुलिस को दुपहिया वाहनों और तिपहिया वाहनों की जांच की तो चिंता है परंतु उनके पास खड़ी यूपी नंबर की इन अवैध बसों की कोई फिक्र नही है। क्योंकि वह जानते हैं कि उनके अधिकारी भी इस पूरे मामले से वाकिफ हैं और उन पर कोई कार्रवाई भी होने वाली नही है।

ट्रेफिक पुलिस की शह से होने वाले इस कारोबार की असलियत आपके सामने इस वीडियों में है जिसमें तीन ट्रेफिक पुलिसकर्मी दुपहिया और तिपहिया को तो रोक रहे हैं परंतु अवैध बसें उनके संरक्षण में बेखौफ खड़ी हैं।

विजय घाट रिंग रोड पर इन असों के संचालन का सबसे बडा केन्द्र और सबसे बड़ा अवैध बस अड्डा है। जहां सुबह 5-6 बजे से लेकर देर रात तक यह बसें यहां से संचालित होती हैं। मगर दिल्ली पुलिस के उच्चाधिकारी और उप राज्यपाल सचिवालय दोनों इस पर खमोश हैं। चुप है। पुलिस आयुक्त और माननीय उप राज्यपाल दोनों को लगातार हमारा वेब पोर्टल इस बस माफिया की गतिविधियों की सूचना ट्वीटर के माध्यम से दे रहा है। देखिये, दोनों इस पर कब कड़ी कार्रवाई करते हैं।