भ्रष्टाचार और अराजकता के खेल में उच्चाधिकारी खामोश, बस माफिया की सुरक्षा में तैनात पुलिस

आईएनएन भारत डेस्क
हमने अपनी पिछली कई रिपोर्टों में इस असलियत को बार बार बताया था कि दिल्ली में चल रही अवैध बसों को संचालित करने वाले बस माफिया और पुलिस के बीच मजबूत अनैतिक तालमेल है। जिसके कारण यह बस माफिया बेखौफ होकर काम करता है। हमारी कुछ रिपोर्ट पर दिल्ली यातायात पुलिस और बाद में डीसीपी पूर्वी रेंज ने जवाब भी दिया था। परंतु अफसोस इस बात का है कि उनके जवाब से बाद भी यह बस माफिया सरेआम सक्रिय है और पहले की तरह ही निश्चिन्त है। केवल पूर्वी दिल्ली ही नही पूरी दिल्ली में यह बस माफिया सक्रिय हैं। पुलिस की नाक के नीचे यह सक्रियता बेवजह नही है।

यातायात पुलिस से लेकर स्थानीय पुलिस तक सभी की इस कारोबार में खुली मिलीभगत रहती हैं। दिल्ली के हरेक कोने में इसके सबूत देखें जा सकते है। दिल्ली पुलिस के बैरिकेडस के बीच से यह अवैध बसें किस प्रकार शान से निकलती हैं वह देखने लायक नजारा होता है। इसके अलावा पुलिस थाना प्रमुख स्तर के अधिकारियों की देखरेख में यह कारोबार कैसे यह काम करता है वह देखना भी दिलचस्प है।

पुलिस की नाक के नीचे कैसे यह बस माफिया काम करता है, यहां पेश हैं उसके दो नजारे। पहला नजारा है कि किस प्रकार वेलकम थाना क्षेत्र की रोड संख्या 65 पर पूर्वी दिल्ली नगर निगम के शाहदरा उतरी जोन के कार्यालय के पीछे पुलिस बैरिकेडस लगाकर खडी है और साथ ही थाना के पुलिस जिप्सी जिसका नंबर है डीएल-1सी एम 4334 बैरिकेडस के आगे खडी है जिसमें एक पुलिस अधिकारी शान से बैठा है और उसके अतिरिक्त कम से कम चार पुलिसकर्मी यहां पर मौजूद हैं।

इन पुलिसकर्मियों में इस इलाके के डिवीजन आॅफिसर एएसआई खुर्शीद भी थे। जो स्वयं बैरिकेडस पर खडे थे। इने पांचो लोगों से महज 20-30 मीटर की दूरी पर बस माफिया की कम से कम चार बसें खडी हैं जिनमें दो बसें उसी समय सवारियां लाद रही हैं।

वेलकम थाने के थानाध्यक्ष से एकबार इस बाबत बात की गई तो उनका कहना था कि यह यातायात पुलिस का काम है हमारा नही। थाने के इलाके में अवैध बसें अवैध पार्किंग करके अवैध सवारियां लादती हैं और यह कारोबार नियमित रूप से चलता है और थानाध्यक्ष कहते हैं कि यह काम यातायात पुलिस का है। कमाल का कुतर्क और गजब की मिलीभगत है इस बस माफिया और खाकी के बीच।

दूसरा नजारा है कांति नगर और बिहारी कालोनी के छोटे से चैराहे पर लगे बैरिकेडस का है। यह वही जगह है जिसके बारे एसीपी यातायात ने लिखकर दिया था कि हमने यहां अपने लोग इस कारोबार को रोकने के लिए नियुक्त किये हैं। आईएनएन भारत ने पहले भी इस प्वाइन्ट के बारे में रिपोर्ट की थी और बताया था कि किस रिपोर्ट होने के बाद भी मान चतुर्वेदी और अशोक और गंगा नामक टूर आपरेटर अपने अवैध कारोबार को बेशर्मी से पुलिस की आंखों के सामने से चला रहे हैं।

ध्यान रहे कि यहां केवल पुलिस बैरिकेडस ही नही है एक पुलिस बूथ भी बना है जिसमें यातायात पुलिस की पूरे दिन मौजूदगी रहती है। आईएनएन भारत की टीम ने दो बसों को यहां से गुजरते हुए कैमरे में कैद किया। जिसमें से एक बस जीटी रोड की तरफ पुलिस बूथ के सामने से गुजर रही थी और दूसरी बस बैरिकेडस के बीच से निकल रही थी और पुलिसकर्मी खामोशी से उन अवैध बसों के गुजर जाने का नजारा देख रहे थे। शायद इन बसों को रोकने पर उच्चाधिकारियों की डांट फटकार का खतरा हो इसीलिए इन्हें सहज भाव से गुजर जाने दिया गया।