मोदी की जयपुर रैली और लाभार्थियों से मनभावन बातें कहलवाने के लिए सरकारी खजाने से करोडों बहाये गये

आईएनएन भारत डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 7 जुलाई के जयपुर दौरे के लिए केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद करने के लिए आये। मोदी की रैली को सफल बनाने और उनकी योजनाओं को जनपक्षीय और सफल दिखाने के लिए राज्य सरकार ने करोडों रूपये पानी की तरह बहा दिये। देश के इन करोडों रूपयों को भीड़ जुटाने का खास इंतजाम करने से लेकर लाभार्थियों को मोदी सरकार द्वारा चलाई गयी योजनाओं के बारे में मनभावन और मोदी के कानभावन बातों के लिए प्रशिक्षित करने के लिए खर्च किया गया था।

सरकार ने बाड़मेर जिला प्रशासन को 24.10 लाख रूपये आवंटित किए और जिला कलेक्टरों से प्रधानमंत्री के आयोजन के लिए 5,000 लाभार्थियों को भेजने के लिए कहा गया था। इस रैली के लिए भरतपुर जिला प्रशासन ने पांच लाभार्थियों का चयन किया था जिन्हें पीएम मोदी से बात करनी थी। रिपोर्ट की माने तो लाभार्थियों को सवालों के जवाब देने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। परंतु इनमें से एक मंजू देवी ने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया।

मंजू देवी ने कहा कि राजकुमारी स्कीम के तहत मेरी बेटी के जन्म के बाद मुझे 2,500 रुपये की दो किस्तें मिल गईं है। मुझे मोदी को सकारात्मक जवाब देने के लिए कहा गया था और कोई सवाल न पूछने के लिए कहा गया था। इसी तरह कुम्हेर ब्लॉक के बेलारा कला गांव के निवासी उमराव सिंह जैसे अन्य लाभार्थियों ने स्वीकार किया कि प्रशासन ने उन्हें प्रशिक्षित किया है। राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी के उप निदेशक सत्यनारायण चैहान ने पुष्टि की है कि पांच लोगों को प्रशिक्षित किया गया है।
राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने 33 जिलों से लाभार्थियों को जयपुर में प्रधानमंत्री से संवाद करने के स्थान तक लाने के लिए 5579 बसें बुक की थी जिन पर करीब 7.22 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। सरकार सभा की सफलता के लिए सभा स्थल पर पूजा-अर्चना और हवन भी करवा रही थी। बीजेपी लाभार्थियों के घर पीले चावल लेकर जा रही है।

पीएम मोदी के कार्यक्रम में करीब 2.5 लाख लाभार्थियों के जुटने का अनुमान था। इस कार्यक्रम के लिए बाकायदा जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि वह अपने-अपने जिले के कम से कम 10 हजार लोगों को कार्यक्रम स्थल तक ले जाने का इंतजाम करें। यहां तक कि कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे लोगों को ट्रेनिंग भी दी गई है, ताकि वह पीएम मोदी के साथ संवाद के दौरान सवालों का अच्छे से उत्तर दे सकें।

बता दें कि पिछली बार जिस तरह झुंझुनू में प्रधानमंत्री की सभा में हंगामा हुआ था उसे देखते हुए यह भी तय किया गया है कि जिन लोगों को लाभ मिला है। उनके बारे में यह पता कर लिया जाए कि वह कहीं कांग्रेस या दूसरे दलों के समर्थक तो नहीं है। इस बार राज्य सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। सभी विधायकों, मंत्रियों और सांसदों को निर्देश दिए गए हैं कि अपने-अपने इलाके से आने वाले लोगों के बीच में ही बैठे। आगे की कतार में कोई भी नेता नहीं बैठेगा ताकि कोई भी पिछली बार की तरह सभा में हंगामा नहीं कर सके।

आना-जाना – खाना मुफ्त
आदेश के मुताबिक लाभार्थियों को जयपुर लाने वाली बसों को 20 रुपये प्रति किलोमीटर का भुगतान किया गया और इससे राजकीय कोष पर लगभग 7.22 करोड़ का खर्च हुआ। अकेले जयपुर से लाभार्थियों को लाने के लिये 532 बसों का इंतजाम किया गया था।
आदेश में कहा गया है कि उज्जवला योजना के तहत पारंपरिक खाना पकाने की जगह एलपीजी सिलेंडर का आंशिक खर्चा तेल कंपनियों की ओर से वहन किया जाये। हालांकि एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन ने इस आदेश का विरोध जताते हुए कहा कि जिला रसद अधिकारी उन पर अनुचित और अवैध मांगों का दबाव बना रहे हैं।

भीड़ जुटाने का मिला है लक्ष्य
रैली में शामिल होने वाली जनता के लिए ठहरने और खाने-पीने का इंतजाम भी किया गया है, जिस पर भारी-भरकम खर्च किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक हर जिले के डीएम को कम से कम 9300 लोगों को लाने का लक्ष्य मिला है। इसमें हर योजना के हिसाब से लाभ पाए लोगों की संख्या भी बताई गई है।

जिलावार पीएम आवास योजना और मुद्रा योजना के 4300 लाभार्थी, उज्ज्वला के 1500, श्रमिक कार्ड के 1500, पालनहार योजना के 1000, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य के 500, स्किल इंडिया के 300, सीएम जल स्वावलंबन के 300, भामाशाह स्वास्थ्य योजना के 250, स्कूटी वितरण के 200, तीर्थयात्रा और कृषि कर्जमाफी के 100-100 लाभार्थियों को लाने का कोटा दिया गया था।

पीएम मोदी की रैली के लिए अफसर पिछले 10 दिन से सभी काम छोडेकर मोदी की रैली की तैयारियां कर रहे हैं। इसके अलावा कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों से मुफ्त में आने-जाने और खाना खिलाने की बात भी कही जा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग पीएम मोदी के कार्यक्रम में शामिल हो सकें। बताया गया है कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोग 3 दिन तक जयपुर में ही रहेंगे।