दिल्ली सरकार के जांच एजेंसी बनाने से जेटली और भाजपा को घबराहट क्यों?

आईएनएन भारत डेस्क
दिल्ली सरकार और उप राज्यपाल की भूमिका और स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सभी पक्ष अपने अपने तरीके से पढ़ रहे हैं। जहां अरविंद केजरीवाल और आप इस फैसले पर स्वाभाविक रूप से खुशी जाहिर कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस इसे पढ़ते हुए आम आदमी पार्टी को उप राज्यपाल से तालमेल बनाने की सीख दे रही है। जाहिर है कांग्रेस अप्रत्यक्ष तौर पर आप को निशाने पर लेकर कहना चाहती है कि हमने तालमेल बनाकर कितने काम किये और तालमेल नही बना पा रहे हैं तो काम नही हो रहे हैं कमी आपकी है। वहीं वाम दलों ने दिल्ली में अपने कद के अनुरूप संक्षिप्त शब्दों में आप के समर्थन में बयान जारी किये।

जब सभी अपनी तरह से इस फैसले को पढ़ रहे हैं तो अरूण जेटली का इस फैसले पर आया बयान भी कम चैंकाने वाला नही है। और कईं बातों के अलावा एक खास चाज का जिक्र उन्होंने ही किया है। उनकी चिंता दिल्ली के काम होने और नही होने की नही बल्कि उनकी चिंता यह है कि दिल्ली सरकार कहीं कोई स्वतंत्र जांच एजेंसी का गठन नही कर दे। इसीलिए केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को सबसे हटकर अपने बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली सरकार के पास पुलिस का अधिकार नहीं है, ऐसे में वह पूर्व में हुए अपराधों के लिए जांच एजेंसी का गठन नहीं कर सकती। जाहिर है उन्हें किन्ही पूर्व के अपराधों की जांच की चिंता हो सकती है। इसीलिए वह ऐसे बयान दे रहे हैं। उनका बयान भी फैसले में वर्णित बातों को संबोधित नही कर रहा है बल्कि वह फैसले में निहितार्थ पढ़कर कह रहे हैं।

अपने फेसबुक पोस्ट में जेटली ने कहा, ‘कई ऐसे मुद्दे रहे हैं जिन पर सीधे टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन वहां निहितार्थ के माध्यम से उन मामलों के संकेत जरूर हैं।’ लंबे समय तक वकालत कर चुके केंद्रीय मंत्री ने इसी संदर्भ में यह भी लिखा है कि जब तक कि महत्व के विषयों को उठाया न गया हो, उन पर विचार विमर्श नहीं हुआ और कोई स्पष्ट मत प्रकट न किया गया हो तब तक कोई यह नहीं कह सकता कि ऐसे मुद्दों पर चुप्पी का मतलब है कि मत एक या दूसरे के पक्ष में है। मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार के पास पुलिस का अधिकार नहीं है, ऐसे में वह पूर्व में हुए अपराधों के लिए जांच एजेंसी का गठन नहीं कर सकती।

There are several issues which had directly not been commented upon but by implication there is some indication of those issues. However, unless issues of importance are flagged, discussed and a specific opinion is rendered, none can assume that silence implies an opinion in favour of one or the other. There are two obvious indications. Firstly, if Delhi has no police powers, it cannot set up investigative agency to investigate crimes as had been done in the past. Secondly, the Supreme Court has held categorically that Delhi cannot compare itself at par with other States and, therefore, any presumption that the administration of the UT cadre of services has been decided in favour of the Delhi Government would be wholly erroneous.

                                                                          –अरूण जेटली की वाल से

जेटली ने कहा, ‘दूसरी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली अपनी तुलना अन्य राज्यों से नहीं कर सकती। ऐसे में यह कहना कि संघ शासित कैडर सेवाओं के प्रशासन को लेकर दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला दिया गया है, पूरी तरह गलत है।’ दरअसल जांच एजेंसी गठन और कैडर सेवाओं के प्रशासन में भी एक गहरा अन्तर्संबंध है।

जेटली ने असगे कहा कि दूसरी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली अपनी तुलना अन्य राज्यों से नहीं कर सकती। ऐसे में यह कहना कि संघ शासित कैडर सेवाओं के प्रशासन को लेकर दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला दिया गया है, पूरी तरह गलत है।

हालांकि जेटली यह नही बताते हैं कि एसीबी और अन्य जांच एजेंसियों के मामले अभी भी कोर्ट में लंबित हैं जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने अलग से सुनवाई करने की बात कही है। अब यदि अलग से सुनवाई करते हुए कोर्ट जांच एजेंसी गठित करने का अघिकार भी दिल्ली सरकार को दे देता है और दिल्ली सरकार दिल्ली के क्रिकेट बोर्ड में कीर्ति आजाद के आरोपों पर कोई जांच गठित कर देती है तो जेटली और केन्द्र सरकार उस जांच को पहले की तरह कैसे रोक पायेंगे कहना मुश्किल है। वैसे जेटली काबिल वकील हैं और पेप्सी से लेकर कोका कोला तक के वकील रहे हैं और आजाद भारत के इतिहास की एक भयावह त्रासदी भोपाल गैस काण्ड में यूनियन कार्बाइड 12 पन्नों की विस्तारित सलाह देने का अनुभव भी उनके पास है और वह दिल्ली द्वारा जांच एजेंसी गठित किये जाने के बाद अपना अनुभव इस्तेमाल कर सकते हैं।