मुठभेडों पर सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को दिया नोटिस, योगी की मुश्किलें बढ़ी

आईएनएन भारत डेस्क
योगी सरकार की प्रदेश में की अपने साल के शासनकाल में बेशक कोई विशेष उपलब्धि नही रही हो परंतु फर्जी मुठभेड़ों को लेकर योगी और उनकी सरकार पूरे समय विवादों में ही घिरी रही। अब इन मुठभेड़ों के सवाल पर योगी सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने एक तगड़ा झटका दे दिया है। मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले प्रसिद्ध संगठन पीयूसीएल की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर दिया है और इस नोटिस पर उसे तीन सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है। पीयूसीएल ने याचिका दायर कर मुठभेड़ों को फर्जी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मुठभेड़ों की जांच एसआईटी से कराई जाए और पीयूसीएल को पक्षकार बनाया जाए।

ध्यान रहे कि यूपी में भाजपा की योगी सरकार बनने के बाद अपराध रोकने के लिए एनकाउंटर अभियान चलाया गया था, जो अभी तक भी जारी है। सरकार के दस माह के दौरान 1142 एनकाउंटर की सूची जारी की गई थी। सरकार ने इस सूची में बताया था कि मुठभेड़ के दौरान 2744 अपराधी अरेस्ट हुए और 34 अपराधियों को मुठभेड़ में मारा गया। इस रिपोर्ट के बाद सामाजिक संगठन पीयूसीएल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की कि इन मुठभेड़ों की जांच कराई जाए। इस याचिका का संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। जवाब देने के लिए योगी सरकार को कोर्ट ने तीन हफ्ते का समय दिया है।

दरअसल, यूपी सरकार के इस अभियान के दौरान यूपी के कई इलाकों से पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ों की खबरें आईं थी। यदि मुठभेड में मारे गये लागों की सामाजिक पृष्ठभूमि को देखें तो मालूम चलेगा कि मरने वालों में अधिकतर अल्पसंख्यक, दलित अथवा पिछडा वर्ग से ही आते हैं। मुठभेड में मरने वालों के वंचित तबकों से होने के कारण भी इसे योगी की उन्मादी ब्राह्मणवादी भगवा राजनीति से जोड़कर देख गया था। मुठभेड़ों के द्वारा भी योगी प्रशासन ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व की राजनीति को ही आगे बढ़ाया जिससे कि वह तमाम विफलताओ के बाद भी अपने सवर्णवादी वोट बैंक को कायम रख सकें।

मुठभेड पर विवादो को उस समय अधिक हवा मिली जब मुठभेड करने को मोल भाव करते एक पुलिस अधिकारी का एक आॅडियो वायरल हो गया। झांसी के मऊरानीपुर में पुलिस अधिकारी का ऑडियो वायरल हुआ था। इसमें पुलिस अधिकारी एक अपराधी से एनकाउंटर डील करते हुए सुनाई दे रहा था। इसके बाद एक और मामला सामने आया था। मऊरानीपुर मामले में डील करने वाले इंस्पेक्टर को बर्खास्त कर दिया गया था। विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक संगठन लगातार मुठभेड़ों पर सवाल उठाते आए हैं।