बस माफिया पर कार्रवाई के नाम पर सामने आया पुलिसिया भ्रष्टाचार के मनमानेपन का चेहरा

आईएनएन भारत डेस्क
दिल्ली में बेशर्मी से पल बढ़ रहे बस माफिया पर आईएनएन भारत ने एक श्रखंला की शुरूआत की जिसका संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस ने आईएनएन भारत के ट्वीट का उतर दिया और कार्रवाई का आश्वासन दिया। परंतु जिस प्रकार की कार्रवाई दिल्ली पुलिस ने की वह शहर की जनता और आला पुलिस अफसरों दोनों को हैरान करने वाली थी।

चलिए बात करते हैं पुलिसिया कार्रवाई और उस पर बस माफिया की बदली हुई चालों की। कांति नगर में चल रहे अवैध बस स्टैंड और पूरी अवैध परिवहन प्रणाली पर पुलिस ने जो कार्रवाई की वह बेहद हैरत अंगेज और कमाल की है। असल में कांति नगर और आजादनगर नाले के पास स्थित इस बस स्टैंड पर सबसे ज्यादा बसे ब्ल्यू बर्ड नामक बस कंपनी के नाम से चलती थी परंतु ऐसा भी नही कि दूसरी कंपनी की बसें यहां से नही चलती हैं। वह भी चलती थी और अभी भी बखूबी चलती हैं। कार्रवाई के नाम पर यहां से ब्ल्यू बर्ड कंपनी की गाड़िया हटा ली गई परंतु ऐसा नही कि उनका कारोबार बंद हो गया हो। उन्होंने यहां से छोटी सीएनजी मेटाडोर में सवारियां भरनी शुरू कर दी और यूपी बार्डर पर खडी अपनी अवैध बसों तक पहुंचानी शुरू कर दी। माने तरीका बदल गया लेकिन कारोबार बदस्तूर जारी रहा।

यह ब्ल्यू बर्ड के कारोबार की स्थिति है। इसके अलावा बाकी कंपनी की बसें अपना कारोबार बदस्तूर चला रही हैं। और कमाल यह है कि उसी अवैध बस स्टैंड से चला रही हैं। अब ये बसें कांति नगर/आजाद नगर की बजाये उसके सामने सड़क के दूसरी तरफ झारखंडी की तरफ खडी होकर सवारियां लादती हैं। लगता है यहां कि पुलिस ने सड़क के इस तरफ के हिस्से को कानून के दायरे वाला क्षेत्र मान लिया है और उसके अपोजिट तरफ को कानूनी छूट वाला इलाका मान लिया है। परंतु कानून वाले इलाके में भी अवैध रूट वाली अवैध बसों के लिए अवैध बुकिंग का कारोबार लगातार जारी है। सब पुलिस की आंखों के सामने खुले तौर पर।

 

शाहदरा फ्लाईओवर के नीचे से गुजरती कांति नगर के अवैध बस स्टैंड की बस। यह बसें झारखंडी की तरफ सड़क पर रोज शाम को खडी होती हैं।
शाहदरा फ्लाईओवर के नीचे से गुजरती कांति नगर के अवैध बस स्टैंड की बस। यह बसें झारखंडी की तरफ सड़क पर रोज शाम को खडी होती हैं।

अब कुछ ऐसे सवाल बनते हैं जिसका जवाब दिल्ली पुलिस को देना चाहिए।

– दिल्ली पुलिस ने पकडे जाने पर इन अवैध रूट वाली बसों के परमिट स्थायी तौर पर रद्द क्यों नही किये या करने की सिफारिश की।

– पकडे जाने पर सिर्फ इनके खिलाफ कार्रवाई के नाम पर छोटे मोटे चलान क्यों किये जाते हैं। इन बसों को हर बार जब्त क्यों नही किया जाता है।

– सामानान्तर परिवहन प्रणाली चलाने पर और देश के राजस्व को चूना लगाने पर इनके खिलाफ उपयुक्त धाराओं में मुकदमें क्यों दर्ज नही होते हैं।

– इन बसों ने दिल्ली के विभिन्न इलाकों में नियमित अवैध पार्किंग बनाई है जिसे सरकारी जमीन का अतिक्रमण माना जाना चाहिए और इनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि स्थानीय थानाध्यक्ष ऐसा नही करते हैं तो वह दिल्ली उच्च न्यायालय के एक निर्णय के अनुसार जिसके तहत कुछ वर्षों पहले इस मामले में जिला टाॅस्क फोर्स का गठन किया गया था और उसमें साफ वर्णित था कि ऐसी स्थिति में थानाध्यक्ष अथवा जिम्मेदार नगर निगम अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी। अब दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी क्यों नही अतिक्रमण के इस कारोबार में लिप्त थानाध्यक्षों पर कार्रवाई करते हैं।

(See the part vii of below DTF order of Delhi Govt.)

A Special Task Force (STF) has been established for each Sub-Division of each district of Delhi with the following composition: –

 

  1. a)     Sub-Divisional Magistrate of the Sub-division                                Convener
  2. b)     Assistant Commissioner of Police of the subdivision                      Member
  3. c)     Deputy Director/Executive Engineer of DDA                                 Member
  4. d)    Zonal Assistant Commissioner of MCD                                          Member
  5. e)     Executive Engineer of PWD                                                             Member
  6. f)      BDO of Panchayat Department, GNCTD                                         Member

 

  1. Representatives’ of other land owning agencies, such as L&DO to be inducted as and when necessary.
  2. The functions and responsibilities of the Special Task force shall be to :-

 

(i)             Act on information and intelligence gathered from various sources regarding encroachments and constructions of unsafe and unauthorized buildings.

(ii)           Recommend the land owning agencies to protect and recover encroached lands.

(iii)         Order registration of FIRs for violation of law under relevant provisions of Indian Penal Code and other laws, as applicable.

(iv)          Submit monthly progress reports by 7th of the next month to Dy. Commissioner of the district concerned for further submission to the government through Divisional Commissioner.

(v)          Use GSDL/satellite maps for regular monitoring of unauthorized constructions and encroachments.

(vi)          Members of the STF have to attend meetings of the STF personally and cannot depute their subordinates to represent them.

(vii)        In terms of the order of the Hon’ Delhi High Court in CWO 4771/93 dated November 3,1997 the Junior Engineers and the Station House Officers would be personally responsible for any encroachment or unauthorized structures coming up in their jurisdiction.

(viii)       The District Task Force will continue to monitor and coordinate the functioning of the STF

 

यह ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब दिल्ली पुलिस को देने चाहिए और अवैध बस माफिया के कारोबार में लिप्त अपने अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

पुलिस कार्रवाई के बाद भी इस स्टैंड पर आने वाली कुछ बसों के चित्र और तथाकथित बस स्टैंड का विज्ञापन अथवा साइन बोर्ड का चित्र हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं।

(अगली कड़ी में देखिये कैसे संगठित गिरोह की तरह काम करता है यह बस माफिया)