“रेप राज्य” में अपराध को हिंदू मुसलमान बनाना भगवा भक्तों के संघी संस्कार

देश में जनसंख्या के मामले में पांचवे पायदान पर खड़ा मध्य प्रदेश बलात्कार के दर्ज मामलों को लेकर देश का रेप राज्य कहलाने का हकदार हो गया है। रेप राज्य के भक्त मंदसौर में एक सात की मासूम बच्ची के साथ हुए निर्मम और भयावह काण्ड़ के बाद भी अपना रंग दिखाने से बाज नही आ रहे हैं। अब उन्होंने सोशल मीड़िया पर कठुआ रेप काण्ड से इसे जोडने के प्रयास में कहना शुरू कर दिया है कि अब कठुआ पर शोर मचाने वाले क्यों खामोश हैं। जबकि सच्चाई इसके विपरीत है अभी भी सोशल मीड़िया और सड़कों पर वही ज्यादतर लोग बगैर किसी राजनीतिक दुराग्रह के सक्रिय हैं जो कठुआ की पीडिता के लिए भी इंसाफ की मांग कर रहे थे।

वहीं भगवा जीव केवल इसे कठुआ से जोडकर एक हिंदू मुसलमान की मामला बनाने की कुत्सित प्रयास में लगे हैं। याद रहे यह वही लोग हैं जो कठुआ में अपराधियों के समर्थन में तिरंगा लेकर निकलने वालों के वकील बने हुए थे। दरअसल, वह अपनी महिला विरोधी भगवा मानसिकता को ढकने के लिए इस पूरे मामले को सांपद्रायिक रंग देने पर उतारू हैं। वह इस सवाल से बचना चाहते हैं कि आखिर भाजपा शासित राज्यों में ही क्यों सबसे अधिक महिला, दलित विरोधी पाये जाते हैं। क्यों भाजपा शासित राज्यों में ही महिलाएं सबसे ज्यादा बलात्कार सहित अन्य ज्यादतियों का शिकार होती हैं।

आंकडे साफ कह रहे हैं कि मध्य प्रदेश देश का रेप राज्य बन चुका है। जो राज्य आबादी में पांचवे स्थान पर है वह राज्य बलात्कार के मामले में अव्वल क्यों। 2016 में देश में कुल 38, 947 बलात्कार के मामले दर्ज किये गये जिसमें से 4882 अकेले मध्य प्रदेश में दर्ज हुए। ध्यान रहे यह दर्ज मामलों के आंकड़े हैं। इसके अलावा भी दलित, आदिवासी महिलाओं पर इस दरिंदगी के ढ़ेरों ऐसे मामले हैं, जो दर्ज ही नही हो पाये हैं। अब इस सवाल से बचने का सीधा उपाय है कि आप इस सवाल को हिंदू मुसलमान का सवाल बनाकर बलात्कार जैसे घिनौने दुष्कर्म के खिलाफ लड़ने वाली जनता को लड़ा दो। यही वह ब्राहमणवादी मानसिकता है जिसने हजारों साल से बांटो और राज करो के इस सिद्धांत के आधार पर राज किया।

हालांकि ब्राहमणवादी धूर्तों ने इसे अंग्रेजों के नाम पर थोप दिया कि यह सिद्धांत उनके द्वारा बनाया गया। आर्य नस्ल और आर्य शुद्धता को दुनिया में प्रसिद्ध करने वाले प्रसिद्ध यूरोपीय इतिहासकार मैक्समूलर के शब्दों में अंग्रेजांे की श्रेष्ठता और ब्राहमणवादी श्रेष्ठता में एक समानता है। वह अंग्रेज फौजी और बंगाली ब्राहमण में एक रक्त समानता को रेखांकित करते हुए दोनों को आर्य और नस्ली तौर एक ही बताते हैं। इसीलिए यह बांटो राज करो की नीति इस देश में यही ब्राहमणवादी आर्य लेकर आये। जिसे हजारों साल से लगातार विकसित करते हुए यह देश और समाज पर राज कर रहे हैं। एक समय में दानव, दैत्य की संकल्पना पेश की, सुर असुर की संकल्पना बनाई। आगे चलकर जब ये पूरी तरह से देश पर काबिज हो गये और देश में ब्राहमणवादी राज काबिज हो गया तो वर्णों में बांटकर लोगों को सवर्ण, अवर्ण में बांटा। उसके बाद छोटी छोटी जातियों में वंचित तबकों को बांटकर अपने राज को पुख्ता बनाये रखा।

बहरहाल, अभी ब्राहमणवाद जहां इतिहास के इस दौर में सबसे गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है तो वहीं वह समाज बांटने की अपनी धूर्तता को और अधिक सूक्ष्म भी कर रहा है। उसी प्रक्रिया में भगवा शासित प्रदेशों के अपराधिक किस्म के कुशासन से बचाने के लिए एक बलात्कारी को एक धर्म विशेष से जोड़कर अपनी राजनीतिक रोटिंयां सेकना चाहता है। इस धूर्तता में भगवा गुबरैले यह भी भूल जाते हैं कि मंदसौर के अल्पसंख्यक समुदाय ने सामने आकर पकडे गये अपराधी बलात्कारी को बगैर कोई दया दिखाये फांसी की मांग की है। वहीं भगवा गुबरैले अभी तक भी कठुआ की बच्ची के अपराधियों को निर्दोष बताने से बाज नही आ रहे हैं। और उनकी भगवा पार्टी भी कठुआ के बलात्कारियों का समर्थन करने वालों की सदस्यता नही छीनकर एक तरह से उनका परोक्ष समर्थन ही कर रही है। इन भगवा भक्तों द्वारा समाज और समाज में होने वाले अपराधों का सांप्रदायिकरण इनके संघी संस्कार और इनका संघी प्रशिक्षण है औरं कुतर्क और निर्लज्जता इनकी विशेषज्ञता।