टूटा बेमेल, अवसरवादी बीजेपी-पीडीपी गठबंधन, भाजपा को तीन साल बाद याद आया देशहित

आईएनएन भारत डेस्क
भाजपा ने जम्मू कश्मीर सरकार से बाहर आकर और समर्थन वापस लेकर तीन साल तीन महीने चले बेमेल और अवसरवादी गठजोड़ को खत्म कर दिया। समर्थन वापस लेने के बाद भाजपा प्रवक्ता राममाधव ने इस सरकार की असफलता के लिए सहयोगी पीडीपी पर ठीकरा फोडा। यहां तक कि राममाधव ने पीडीपी पर लद्दाख और जम्मू क्षेत्र पर भेदभाव के आरोप तक भी जड़ दिये।
उधर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए साफ कहा कि भाजपा-पीडीपी के अवसरवादी गठबंधन ने जम्मू कश्मीर को आग में झोंक दिया और यह हालात राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने पर भी बने रहेंगे। कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ने पीडीपी के साथ किसी भी गठबंधन में जानेसे इंकार करते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग की है।
बताया जाता है कि राज्य में सीजफायर को जारी रखने को लेकर भाजपा और पीडीपी के बीच अन्तर्विरोध बना हुआ था और इसी सवाल पर दोनों अलग हो गये हैं। जबकि वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि 2019 को चुनावों को देखते हुए और पीडीपी से गठजोड़ के कारण होने वाले नुकसान से बचने के लिए भाजपा ने यह गठबंधन खत्म किया है।
दरअसल, सत्ता के लिए बेशक भाजपा और पीडीपी ने आपसी गठजोड़ कर लिया था परंतु देशभर में भाजपा के कैडर को इस गठजोड के कारण फजीहत का सामना करना पड़ रहा था। एक तरफ भाजपा जहां पूरी जिंदगी 370 हटाने की मांग को लेकर देश की जनता को बरगलाने को काम करती रही है तो वहीं 370 से भी आगे जाकर स्वयत्ता की मांग करने वाली पीडीपी के साथ जाकर कुर्सी पर विराजमान हो जाती है।
इसके अलावा भाजपा जहां देशभर में जहां अफजल गुरू के विरोध के पूरे देश में गीत गा गाकर राजनीति करती है तो वहीं अफजल गुरू की फांसी का खुलेआम विरोध करने वाली और अफजल गुरू की लाश उसके परिवार को सौंपने की मांग करने वाली पीडीपी के साथ मिलकर गद्दी पर बैठती है। इसके अलावा धारा 35ए पर भाजपा और पीडीपी के विचार एकदम से विरोधी हैं। सत्ता में साझेदारी करने से पहले तक भाजपा के लिए पीडीपी एक आतंकवाद समर्थक पार्टी थी और कुर्सी के लिए दोनों एक दूसरे के सहयोगी बन जाते हैं। ढेरों ऐसे सवाल हैं जिस पर अब देश की जनता भाजपा से जवाब चाहेगी कि आखिर भाजपा की राजनीति है क्या हिंदुत्व, राष्ट्रवाद अथवा कुर्सीवाद।
बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद भी भाजपा फिर से 2019 के मद्देनजर अफजल गुरू, धारा 370 और तथाकथित राष्ट्रवाद जैसे राजनीतिक उत्पादों की बिक्री में लग सकती है। आखिर भाजपा को तीन साल तीन महीने बाद अचानक से देशहित कोई बेवजह ही याद नही आ गया है।