दलित युवकों पर फिर से टूटा ब्राह्मणवादी आतंक का कहर, नंगा घुमाने के बाद बर्बर पिटाई

आईएनएन भारत डेस्क
भाजपा के सत्ता में आने के बाद लगता है कि ब्राहमणवादी हिंदू अगडों ने समझ लिया है कि देश में हिंदू राष्ट्र की स्थापना हो गयी है और अब देश बाबासाहेब के संविधान से नही बल्कि मनुस्मृति के मुताबिक चल रहा है। इसीलिए भाजपा शासित राज्य मानो अब दलित उत्पीड़न का प्र्याय बनते जा रहे हैं। ताजा मामला महाराष्ट्र के जलगांव के वाकडी का है जहां तीन दलित युवकों को पहले गांव में नंगा घुमाया गया और फिर उनकी बर्बरतापूर्वक पिटाई की गई।

महाराष्ट्र के जलगांव के वाकडी में तीन दलित युवकों की बेरहमी से पिटाई का मामला सामने आया है। इस मामले की जानकारी एक वायरल हो रहे वीडियो के आधार पर दी जा रही है, जिसके हवाले से बाताया जाता है कि दलित युवकों की पिटाई का यह मामला 10 जून का है, जिसका खुलासा वीडियो वायरल होने के बाद हुआ है।

बताया जाता ही की वीडियो में पिट रहे युवकों की गलती सिर्फ इतनी थी कि ये लोग कुएं में तैरने के लिए उतर गए। जिसके बाद इन युवकों को अमानवीय बर्ताव का सामना करना पड़ा। बताया जाता है कि क्योंकि ये युवक दलित है इसलिए गांव के लोगों ने ही इनकी बर्बर तरीके से पिटाई की है।
प्राप्त समाचारों के अनुसार गांव के कुछ लोगों नें पहले तो इन्हें निर्वस्त्र कर पूरे गांव में उनकी बारात निकाली और फिर खेत में ले जाकर इनकी बुरी तरह से पिटाई की गई। जानकारी के अनुसार मामले में पीड़ित परिवार की ओर से पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है, लेकिन अब खबर है कि उनपर केस वापस लेने का दबाव भी बनाया जा रहा है।

दरअसल, भाजपा शासित राज्यों में जिस प्रकार दलित उत्पीड़न की घटनाऐं बढ़ रही हैं वह बेहद डरावनी और देश में चिंता पैदा करने वाली हैं। वास्तव में भाजपा शासित राज्यों में होने वाले दलित उत्पीड़न के बाद पुलिसिया कार्रवाई के नाम पर पहले तो लीपापोती करने की कोशिश की जाती है और फिर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस से लेकर, न्यायपालिका तक फैला भगवा दलालों का गिरोह पीड़ित परिवार पर रिपोर्ट वापस लेने के लिए तरह तरह के दबाव बनाने लगता है और मामले को रफा दफा करने की साजिशों में लग जाता है। मामले को रफा दफा करने की इस प्रक्रिया में पीडित परिवार पर दबाव से लेकर चार्जशीट कमजोर करने और फिर कोर्ट में गवाहों को तोड़ने तक सभी हथकण्ड़े अपनाये जाते हैं। न्यायपालिका का ब्राहमणवादी चरित्र भी इस करतूत में भगवा आतंकियों का साथ देता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून की हालिया नई व्याख्या जैसे घटनायें ब्राहमणवादी आतंकवाद का हौसला बढ़ाने का काम करती हैं।