भगवा राजनीति की मध्य प्रदेश में चुनावी तैयारी शुरू, शाजापुर में ईद पर हिंसा और तनाव

आईएनएन भारत डेस्क
विकास के दावे और आंकड़े और विकास के नारे सब झूठ और भ्रम हैं उनकी असली राजनीति दंगे और सांप्रदायिक हिंसा से वोटों के ध्रुवीकरण की है। विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनावों में यह लगातार सिद्ध होता रहा है। आम चुुनावों के जल्दी होने अथवा मप्र, राजस्थान और छतीसगढ के साथ ही आम चुनावों के होने की अटकलों के बाद अब लगता है कि भगवा गिरोह ने मध्य प्रदेश में चुनावों का मन बना लिया है और उसकी चुनावी तैयारियां शुरू हो गयी हैं। भगवा गिरोह ने लगता है कि शाजापुर से चुनावी तैयारी का बिगूल फूंक दिया है। शाजापुर की हिंसा की घटनायें और आगजनी भगवा गिरोह की चुनावी तैयारियों का पता दे रही हैं।

महाराणा प्रताप की जयंती के नाम पर भगवा गिरोह ने शाजापुर में ईद के दिन जमकर उत्पात मचाया और सांप्रदायिक तनाव पैदा किया। वैसे महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को हुआ था परंतु शाजापुर के भगवा गिरोह ने महाराणा प्रताप की जयंती मनाने के लिए ईद का दिन चुना और वही किया जिसके लिए उन्होंने यह दिन चुना था।

इतिहास में पराजय के कीर्तिमान गढ़ने वाले तथाकथित क्षत्रिय समाज ने ईद के दिन को महाराणा प्रताप की जयंती मनाने और शौर्य यात्रा निकालने के दिन के लिए चुना और अपना कायरता का इतिहास रचने वालों ने यात्रा भी भूतेश्वर महादेव के मंदिर के उस इलाके से निकाली जहां ईद का मंच लगा था और गाने बज रहे थे। अब जाहिर है तथाकथित क्षत्रिय समाज का शौर्य इसी में था कि वे ईद के मंच के साउंड सिस्टम को बंद करवायें। यदि वह साउंड सिस्टम बंद नही होता तो उनका महाराणा पहले की तरह आज भी अकबर से हार जाता। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में तकरार हुआ और बातचीत के बीच ही पिछली सड़क से पथराव शुरू हो गया, दंगा भडक गया। कईं वाहनो में आग लगा दी गई बड़ी संख्या में पुलिस बल बुला लिया गया। शाजापुर में धारा 144 लगा दी गई है। शहर में तनाव है, तरह तरह की अफवाहों को फैलाने में माहिर भगवा गिरोह ने अपना काम शुरू कर दिया है। शाजापुर के बहाने मध्य प्रदेश के और कईं शहरों को चपेट में लेकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के प्रयास शुरू हो गये हैं। इसे कहते हैं चुनावी अभियान की असली शुरूआत।

अब कोई भगवा गिरोह से नही पूछेगा की महाराणा प्रताप जयंती ईद पर मनाने को क्या तुक है। और इसे ईद पर मनाने की इजाजत प्रशासन क्यों दी? और इजाजत दी तो ईद मनाये जाने वाले संवदेनशाील इलाके में जुलूस ले जाने की छूट क्यों दी गई। यह सारे सवाल इस हिंसा में प्रशासनिक संलिप्तता को जाहिर करते हैं और भगवा राजनीति की कार्यशैली को बेनकाब करते हैं।