एक छोटे शहर की बड़ी कहानी

वह सपनों की उस उड़ान की तरह है जिसे हाल ही में एक बड़े शहर के लोगों में गंवई कहे जाने वाने पहाड़ी अंदाज में बोलते, बेतरतीब से फैशन में लजाते और एक महानगरीय जिंदगी में कुछ सकुचाते और इतराते हुए सफलता की तलाश में भटकते देखा था। आज उसकी चमक चैंधिया देने वाली है, आज उसके फैशन के मुरीद बेशुमार है और वो बोलते हुए अटकती नही मगर कुछ लोगों को खटकती जरूर है। परंतु वास्तव में वह विफलता में सफलता और अपनी आजादी और अपनी जगह पा लेने की एक तिलस्मी कहानी ही है।
यह एक छोटे शहर की लड़की की कामयाबी की जिंदा कहानी है। इस कहानी में रहस्य है, रोमांच है अनगिनत कही अनकही ढ़ोरों कहानियां है। इस कहानी में सफलता के लिए समझौते हैं और सफलता के बाद समझौते के लिए विवश करने वाले दबंगो को चिढ़ाने वाले बयान भी हैं। यह बालीवुड़ में इस दौर की सबसे मंहगी अभिनेत्रियों से एक कंगना रनावत की कामयाबी की तिलस्मी कहानी है। वह एक लड़की जो अपनी किशोर अवस्था में बड़ी कामयाबी की उम्मीद के भारी सपने के साथ अपने परिवार से बगावात करके मुम्बई आ गयी और जिसने ऐसा कामयाब होकर दिखलाया कि मानो घर से चलते हुए वह नाकामयाब ना होने की ठानकर ही चली थी।

कंगना रनावत का जन्म हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से कस्बे भाम्बला में 23 मार्च 1986 को एक राजपूत परिवार में हुआ। कंगना के पिता अमरदीप रनावत एक व्यासायी और मां आशा रनावत स्कूल शिक्षिका थी। यदि पद्मावती फिल्म की रिलीज पर बवाल खड़ा करने वालों के यह सूचना जरूरी है कि कंगना एक परंपरागत राजपूत परिवार की बेटी हैं और उनके पड़दादा सरजू सिंह विधायक थे और उनके दादा दादा भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी थे। डाॅक्टर बनने का सपना लेकर चण्डीगढ़ में दाखिल हुई यह बागी लड़की न जाने कब फैशन उद्योग की तरफ चली गई और दिल्ली में एक फैशन माॅडल के रूप में कुछ समय बिताने के बाद दिल्ली के जाने माने रंगकर्मी अरविन्द गौड़ के थियेटर का हिस्सा बन कंगना ने अभिनय का प्रशिक्षण लिया। वास्तव में यह कंगना के भीतर की वह बगावती लड़की ही थी जो उसे कामयाबी की नई राह की तलाश में बालीवुड़ में ले आयी थी। वह बचपन से इस मायने में बागी थी कि घर में लड़के और लड़की में भेदभाव करने पर लड़ जाने के कंगना के अनेक किस्से हैं। यही बगावत की फितरत कंगना को फिल्म और फैशन उद्योग में खींच ले गयी। वह डाॅक्टर बनना चाहती थी और उसके लिए उनकी तैयारी चल भी रही थी 12वीं कक्षा में केमस्ट्री के यूनिट टेस्ट में यह अभी पढ़ाकू मानी जाने लड़की फेल हो गयी तो उसने डाॅक्टर बनने के सपने को छोड़कर वह अपनी आजादी और अपनी जगह की तलाश में दिल्ली आ गयी और एक फैशन माॅडल एवं एक थियेटर अभिनेत्री के तौर पर नये संघर्ष की राह पर चल पड़ी।

आज के दौर की हसीन ग्लैमर अवतार और फैशन आइकाॅन मानी जाने वाली कंगना को देखकर और उनकी समृद्ध पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखकर कोई कह नही सकता कि कंगना ने दिल्ली में कभी भूखे रहकर अथवा नाममात्र को खाकर भी दिन गुजारे होंगे परंतु जब लड़ाई अपनी आजादी और अपनी जगह को पाने और अपने सपनों के आसमान को छूने की हो तो कुछ भी असंभव नही माना जा सकता है। कामयाबी के सपने कंगना को मुंम्बई खींच लाये और फिर लंबी जद्दोजहद के बाद 2004 में उन्हें पहलाज निहलानी और रमेश शर्मा के साथ पहली फिल्म साइन करने का मौका मिला, परंतु उनकी रिलीज फिल्म अनुराग बसु निर्देशित और महेश भट्ट निर्मित ‘‘गैंगस्टर‘‘ थी। उसके बाद कंगना का संघर्ष कामयाबी का सफर चलता रहा और आज वह देश की सबसे मंहगी अभिनेत्रियों में शुमार एक अभिनेत्री हैं। कामयाबी के बाद भी विवाद उनके साथ बने ही रहते हैं और यह सब उनकी साफगोई और बेबाक बयानबाजी की वजह से ही उनके साथ रहते हैं। वह एक ऐसी निड़र और बेबाक अभिनेत्री हैं जिसने बेहद छोटी उम्र में एक विफलता को जवाब देने के लिए सफलता की नई इबारत लिख डाल, योग्यता और कामयाबी की बुलंदियों के नए आयाम गढ़ दिये।