मोदी की हत्या की साजिश की थ्योरी पर उठे सवाल, बताया मोदी की पुरानी रणनीति

आईएनएन भारत डेस्क
मोदी को जान से मारने की साजिश एकबार फिर से चर्चाओं में है। जहां पुणे पुलिस आदलत में आरोपियों को पेश करते हुए उनके मोदी को मारने की साजिश में शामिल होने की आशंका जता रही है वहीं विपक्ष इस साजिश की थ्योरी पर सवाल उठाते हुए मोदी द्वारा गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए उनके द्वारा ऐसी ही साजिशों की कहानियां बनवाने का हवाला दे रहा है और कह रहा है कि मोदी जब हार की तरफ बढ़ते हैं तो ऐसी कहानियां बनवाते हैं। मोदी ऐसी कहानियां बनवाने में माहिर हैं।

पुणे पुलिस ने गुरुवार को अदालत को बताया कि प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) से संबंध के आरोप में गिरफ्तार पांच व्यक्तियों में से एक के घर में कथित रूप से एक पत्र मिला है। जिसमें इस बात का जिक्र है कि माओवादी एक और राजीव गांधी कांड की योजना बना रहे हैं। पुलिस का दावा है कि पत्र में खुलासा हुआ है कि यह षड्यंत्र किसी और के लिए नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए है।

इस साजिश की योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा है कि इस तरह की खबरें प्लांट कराना मोदी की पुरानी रणनीति रही है। वो इसमें माहिर हैं।

संजय निरूपम ने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह पूरी तरह से सत्य नहीं है लेकिन यह पीएम मोदी की पुरानी रणनीति रही है। जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब से ही यह चला आ रहा है। जब भी उनकी लोकप्रियता में कमी आती है, वह राजनीतिक हत्या की खबरें प्लांट करवाने लगते हैं। इसलिए इस बार जब यह खबर आई है तो इसकी जांच होनी चाहिए कि इसमें कितनी सच्चाई है।

पुलिस ने दिसंबर में यहां आयोजित एलगार परिषद और इसके बाद जिले में भीमा-कोरेगांव हिंसा के संबंध में बुधवार को दलित कार्यकर्ता सुधीर धावले, वकील सुरेंद्र गाडलिंग, कार्यकर्ता महेश राउत और शोमा सेन तथा रोना विलसन को मुंबई, नागपुर एवं दिल्ली से गिरफ्तार किया था। बता दें इन गिरफ्तारियों के बाद लगातार इनका विरोध हो रहा था और मोदी सरकार इन गिरफ्तारियों को लेकर घिरती नजर आ रही थी। यहां तक कि कईं संगठनों ने इन गिरफ्तारियों के विरोध में धरने प्रदर्शन की शुरूआत भी कर दी थी।

अभियोजन पक्ष के वकील उज्ज्वल निकम ने अदालत से कहा कि दिल्ली में रोना विलसन के घर पर मिले पत्र में एम -4 राइफल और गोलियां खरीदने के लिये आठ करोड़ रुपए की आवश्यकता की बात लिखी है। साथ ही उसमें ‘एक और राजीव गांधी कांड’ का जिक्र किया गया है।

ध्यान रहे कि यह एक टाईप किया हुआ पत्र है और इस पत्र में किसी के हस्ताक्षर भी नही हैं। कानून के जानकारों का कहना है कि ऐसे थ्योरी के साक्ष्य के रूप में यह पत्र ज्यादा देर अदालत में टिक नही सकता है। परंतु इसके सहारे सरकार इन गिरफ्तारियों के विरोध को कम कर सकती है अथवा विरोध की पूरी तरह से हवा निकाल सकती है। इस तथाकथित साजिश की टाईमिंग पर जानकार सवाल उठा रहे हैं। जब मोदी सरकार की साख दांव पर है ठीक ऐसे समय में यह शहरी माओवाद की थ्योरी और मोदी की हत्या की साजिश की थ्योरी जरूर कुछ संदेह तो पैदा करती ही है।