सत्ता के लिए कुछ भी कर सकता है संघी टोला, अपने ही कार्यकर्ता की हत्या करवायी, 11 बजरंगी धरे गये

आईएनएन भारत डेस्क
उनके नीचे गिरने के कोई हद नही कोई सीमा नही। भाजपा और उसका मातृ संगठन आएसएस और उससे जुड़े जन संगठन सत्ता के लिए और सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं। पश्चिमी बंगाल में वामपंथ को हशिये पर धकेलने के लिए इसी तरह के ध्रुवीकरण का खेल तृणमूल और भाजपा के बीच कई सालों से लगातार चल रहा है। इसका सबसे शर्मनाक उदहारण हाल ही में एक भाजपा कार्यकत्र्ता की हत्या में देखने में सामने आया है। पश्चिम बंगाल मे भाजपा वोटों के ध्रुवीकरण कराने की पूरी कोशिश कर रही है और वह सत्ता तक पहुचने के लिए इतनी नीचे गिर गयी कि उसने अपने कार्यकर्ताओ की ही हत्या करा दी है, बंगाल पुलिस ने हत्या के आरोप में बजरंग दल के 11 कार्यकर्ता गिरफ्तार किये है।

ध्रुवीकरण की इस राजनीति से संघी राजनीति के कईं पक्ष अब सामने आ रहे हैं। भाजपा की घृणित घ्रुवीकरण की राजनीति से एक बात तो पूरी तरह समझ मे आ चुकी है कि भाजपा वहीं दंगे कराती है जहाँ इनकी सरकार नही होती है। सूत्रों की माने तो इस घटना के बाद भाजपा के कर्मठ और दिन रात फेसबुक और ट्वीटर पर गालियाँ देने वाले कार्यकर्ताओं के अंदर भय बैठ गया है कि भाजपा अपने फायदे के लिए उनकी हत्या तक करा सकती है। तृणमूल और भाजपा के इस ध्रुवीकरण के खेल से राजनीतिक कार्यकर्ताओं से लेकर आम आदमी तक सभी डरे हुए हैं।

ध्यान रहे कि पिछले दिनों पुरुलिया जिले के डाभा गांव में एक भाजपा कार्यकर्ता का शव पोल से लटकता मिला था इससे पहले बलरामपुर के पढ़िह गांव के पास जंगल में एक पेड़ पर 18 वर्षीय त्रिलोचन महतो का शव पाया गया था वह भी भाजपा का कार्यकर्ता था। जिसकी हत्या का शक तृणमूल पर जताया गया था। तृणमूल कांग्रेस की हिंसा की राजनीति को देखते हुए इस पर विश्वास करना आसान भी था। परंतु इसी माहौल का फायदा उठाकर संघी टोले ने इस दूसरी हत्या को अंजाम दे दिया जिसमें बंगाल पुलिस के अनुसार बजरंग दल के 11 कार्यकर्ता संलिप्त बताये जा रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हत्याओं के एक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है, पुरुलिया जिले के बलरामपुर में भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता की हत्या के मामले में पुलिस ने बजरंग दल के 11 कार्यकर्ताओ को गिरफ्तार किया है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में कुछ दिन पहले पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा हुई थी इस हिंसा में एक वामपंथी नेता को परिवार सहित घर में जिंदा जलाकर मार डाला था। पश्चिम बंगाल सरकार की जहां हिंसक घटनाओं को लेकर हुई आलोचना हो रही थी कि तभी कुछ दिन पहले भारतीय जनता पार्टी के एक और कार्यकर्ता की लाश पेड़ से लटकी मिली थी। इस हत्या पर भी भाजपा ने टीएमसी सरकार को घेरा था पर अब इस मामले में जैसे ही 11 बजरंगदल के लोगों को गिरफ्तार किया गया भाजपा और संघी टोला बैकफुट पर चला गया है उनकी बोलती बंद हो गयी है और भाजपा-संघ का असली चेहरा भी लोगों के सामने आ गया है।

बता दें कि भाजपा में बंगाल के हिंसक माहौल का फायदा उठाने के लिए ही इस हत्या को अंजाम दिलवाया है। इस घटना के फौरन बाद में ही भाजपा नेतृत्व राज्य सरकार पर हमलावर था। तृणमूल की कार्यशैली को देखते हुए सभी लोग इस आरोप पर विश्वास भी कर रहे थे। पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने इस घटना का वीडियो ट्वीट करते हुए कहा, ‘हम शर्मिंदा हैं, शायद प्रजातंत्र भी शर्मिंदा है। भाजपा ने दोनों भाजपा कार्यकर्ताओं की रहस्यमय तरीके से हुई मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है, जबकि राज्य सरकार दोनों मामलों की जांच सीआईडी को सौंप दी थी और जांच के बाद खुलासा हुआ कि यह हत्या बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने की है।