सुशासन बाबू के बिहार में बालिका गृह की बालिकाओं के यौन शोषण में अधिकारी से नेता तक सभी शामिल

आईएनएन भारत डेस्क
तथाकथित सुशासन बाबू का शासन एक बार फिर से चर्चाओं में है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के सोशल आॅडिट के एक खुलासे ने नेताओं की नींद उड़ाकर रख दी है। इस खुलासे में मुजफ्फरपुर में सरकार द्वारा संचालित बालिका गृह में रहने वाली बालिकाओं के यौन शोषण का खुलासा हुआ है। मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस से जारी सोशल ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार यहां रहने वाली लड़कियां नेता से लेकर अधिकारी तक के घरों में भेजी जाती थी।

इस खुलासे के बाद जिला एवं राज्य प्रशासन की नींद उड़ी हुई है। बालिका गृह का संचालन करने वाली  संस्था के लोग फरार हैं। जिला प्रशासन ने आनन-फानन में वहां रहने वाली लड़कियों को पटना और मधुबनी स्थानांतरित कर दिया है और बालिका सुधार गृह को सील कर दिया गया है।

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की रिपोर्ट से हुए इस खुलासे के बाद जिला बाल कल्याण संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक ने महिला थाने में बालिका गृह का संचालन करने वाले एनजीओ ‘सेवा संकल्प एवं विकास समिति’ के कर्ताधर्ता और पदाधिकारियों पर केस दर्ज कराया है। पुलिस ने सहायक निदेशक के शिकायती आवेदन के आधार पर धारा 376 और 120 बी के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर छानबीन शुरु कर दी है। एनजीओ से जुड़े सभी लोग फिलहाल गायब हैं। पुलिस उनकी तलाश में है।

बता दें कि पिछले दिनों टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की कोशिश टीम ने ‘समाज कल्याण विभाग’ द्वारा संचालित संस्थाओं की सोशल ऑडिट रिपोर्ट ‘समाज कल्याण विभाग’ पटना के निदेशक को सौंपी। इस रिपोर्ट के पेज नंबर 52 पर मुजफ्फरपुर में चल रहे बालिक गृह के कार्यकलाप पर गंभीर सवाल उठाये। रिपोर्ट में ऑडिट टीम ने दावा किया कि बालिका गृह में रहने वाली कई बालिकाओं ने यौन उत्पीडन का खुलासा किया है।

रिपोर्ट में टाटा संस्था ने ‘सेवा संकल्प एवं विकास समिति’ के खिलाफ तत्काल कानूनी प्रक्रिया शुरू करने और गहन छानबीन के साथ सुधारात्मक कार्रवाई करने की सलाह दी है। निदेशक समाज कल्याण पटना के निर्देश पर मुजफ्फरपुर की बाल संरक्षण इकाई ने सभी बालिकाओं को संस्था से मुक्त कराकर पटना और मधुबनी भेज दिया है। इस मामले में पुलिस का दावा है कि बालिका गृह का कृत्य संज्ञेय अपराध है और इसकी गहन छानबीन की जायेगी।