राजद की लगातार जीत और तेजस्वी के हमलों से बौखलाये जदयू नेता

आईएनएन भारत डेस्क
महागठबंधन से जदयू के बाहर होने के बाद बिहार में जदयू को तीन उप चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इसमें में हाल ही की जदयू की हार और अधिक इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि जदयू के उम्मीदवार को उतने भी वोट नही मिले जितने अंतर से राजद के उम्मीदवार ने उसे हराया है। ध्यान रहे राजद उम्मीदवार का जीत का अंतर जदयू को मिलने वाले वोटों से कहीं ज्यादा था। जदयू की इस जीत के बाद राजनीतिक हलकों में कईं तरह के राजनीतिक कयास लगाये जाने लगे हैं। कई राजनीतिक विश्लेषक तो जदयू की इस हार को नीतीश कुमार के राजनीतिक कैरियर की समाप्ति का बिगुल बजना भी बता रहे हैं। इसके अलावा जोकीहाट की जीत के बाद तेजस्वी ने जिस तरह से नीतीश कुमार पर संयत भाषा में मगर तीखा हमला बोला है उससे लगता है कि जदयू नेता बौखला गये हैं और पूर्व उप मुख्यमंत्री पर बदजुबानी वाला हमला बोल दिया है।

बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ट्विटर के जरिए जिस तरह लगातार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोल रहे हैं। और जिस तरह जोकीहाट विधानसभा चुनाव में जीत के बाद नीतीश कुमार तेजस्वी के निशाने पर हैं, उससे जदयू नेताओं की बौखलाहट साफ दिखाई पड़ रही है। खासतौर पर जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार जिस भाषा का प्रयोग हमेशा लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ करते रहे हैं उससे लालू यादव परिवार के प्रति उनका व्यक्तिगत विद्वेष जाहिर होता है। कई बार तो सीधे गुडंई भाषा वाली धमकी भी राजद प्रमुख लालू यादव को देने से वे बाज नही आये हैं। अब लगता है कि फिर से उन्होंने जदयू के बौखलाहट भरे हमले की कमान संभाली है।

कुछ नेताओं का मानना है कि यह उनका जातीय विद्वेष बोलता है। लालू यादव की पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीति ने जितना भूमिहारों के वर्चस्व को चुनौती दी है इतिहास में किसी और ने वैसा नही किया है। यही कारण है कि कोई भी विपक्षी भूमिहार नेता जब लालू यादव और उनके परिवार पर हमला बोलता है तो उसमें से वहीं जातीय विद्वेष की बू आती है। वरना कोई लालू यादव जैसे राष्ट्रीय नेता की छाती तोड़ने की धमकी देने का दुःसाहस नही कर सकता है। अब जदयू ने फिर से भूमिहार वोटों को साथ रखने की गरज से एक लालू पर विषवाणी रखने के माहिर भूमिहार को मैदान में उतारा है। हालांकि जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग होने के बाद से ही अपने भूमिहार प्रवक्ताओं का सहारा लेकर लालू परिवार पर हमले कर रहे हैं।

स्वयं हमेशा से भाषाई विकृति का शिकार रहने वाले जदयू के प्रवक्ता ने हास्यास्पद तरीके से प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के जीत के गर्व पर निशाना साधते हुए तेजस्वी यादव की संयत और मर्यादित भाषा को विकृति का शिकार बताया है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी पारिवारिक अनुकम्पा की बुनियाद पर प्रतिपक्ष के नेता बने थे, ऐसे ही उन्होंने पूर्व मुख्समंत्री की शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल उठाया। वह भूल गये कि जब इसी राजद के सहारे नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे तो भी तेजस्वी यादव की यही शैक्षणिक योग्यता और यही भाषा थी। क्योंकि तब नीतीश और पार्टी को सत्ता मिल रही थी तो सब ठीक था। जदयू की यही दोहरी बोली और दोहरा चरित्र हार से पैदा हुई उनकी बौखलाहट को रेखांकित कर रहा है।

जाहिर है जोकीहाट विधानसभा सीट पर राजद उम्मीदवार की जीत के बाद तेजस्वी यादव फ्रंटफुट पर हैं। तेजस्वी ने आक्रमक रुख अपनाते हुए ट्विटर के जरिए नीतीश कुमार पर कई वार किए हैं जिससे जदयू असहज और बौखलायी हुई नजर आ रही है।