फिर दिखा भगवा आतंकवाद, पैर पर पैर रखकर बैठने पर सवर्णों ने तीन दलितों की हत्या की

आईएनएन भारत डेस्क

देश में भगवा राज आने के बाद ब्राहमणवादी आतंकवाद अपने चरम पर पहुंच चुका है। अभी तक केवल भाजपा शासित राज्यों में ही दलित पर अत्याचारों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही थी। परंतु अफसोसजनक पहलू यह है कि कभी ब्राहमणवाद के खिलाफ लड़ाई का माॅडल रहा और बहुजन उभार का प्रतीक राज्य तमिलनाडु भी ब्राहमणवाद के संक्रामक रोग का शिकार हो चुका है। भाजपा के अभिन्न मित्र और सहयोगी एआईएडीएमके के राज में अभी तूतीकोरिन की मौतों का शोक पूरा भी नही हो पाया था कि सवर्णों ने तमिलनाडु के शिवगंगा में तीन लोगों की जान ले ली है।

तमिलनाडु की इस जातिगत हिंसा में तीन लोगों के मारे जाने की खबर है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यहां दलित युवकों का पैर पर पैर चढ़ा कर बैठना सवर्णों को इतना नागवार गुजरा कि मामूली झगड़े से शुरू हुआ विवाद तीन लोगों की हत्या में तब्दील हो गया।

तीन दलित बेमौत मारे गये उनका कसूर बस इतना था कि वे सवर्णों के सामने पैर पर पैर चढ़ाकर बैठे थे। दोनों पक्षों में इसे लेकर पहले तो कहासुनी हुई. 26 मई से शुरू हुआ झगड़ा इतना बढ़ा कि अबतक इसमें तीन लोगों की जान जा चुकी है।

एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार मामला 26 मई को तब शुरू हुआ जब दो दलित युवक तिवेंतीराम और प्रभाकरण कुरूपासामी मंदिर के बाहर पैर पर पैर चढ़ाकर बैठे थे। बताया जाता है कि दलित युवक पैर पर पैर चढ़ाकर बैठे थे, तभी दो सवर्ण युवक वहां आए और इसे अपमान समझ कर विवाद करने लगे।
इस घटना के बाद दलितों और सवर्णों में संघर्ष हो गया। दलित पक्ष के अनुसार सवर्णों ने जाति सूचक अपशब्दों का इस्तेमाल दलितों के खिलाफ किया। दलितों ने इसकी शिकायत पुलिस थाने में करने की बात कही। जातिगत शब्दों का इस्तेमाल कर उनके साथ गाली-गलौज की गई जिस कारण दलितों ने इसकी शिकायत पुलिस में कर दी जिससे खफा होकर सवर्णों ने बदला लेने की कार्रवाई के तहत दलितों पर हमला बोल दिया।

पुलिस की रिपोर्ट बताती है कि चंद्रकुमार नाम के एक सवर्ण शख्स ने पास के अवरनकाडू गांव से अपने दोस्तों को इकट्ठा किया और गांव की बिजली काटकर दलितों पर हिंसक हमला कर दिया।
दो दलित व्यक्ति के अरुमुगम (65) और शनमुगनाथन की अस्पताल ले जाने के दौरान मौत हो गई जबकि मदुरई के राजाजी अस्पताल में एक घायल व्यक्ति चंद्रशेखर की मौत हो गई।