मुझे मुख्यमंत्री बनना होता तो मैं 2003 में बन गया होता: शिवपाल सिंह यादव की दो टूक बेबाक बातचीत का भाग-2

आईएनएन भारत
बाबरी विध्वंस के समय मैं इटावा में था फिर भी मुझ पर मुकदमे किये गये, मैं 6 महीने तक अंडर ग्राउंड था…..

फ्रैंक हुजूरः अब लौटते हैं आपकी राजनीति पर, 1988 में आप जिला कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन बने और 1989 में नेताजी मुख्यमंत्री बन गये। नेताजी ने 1987 से 89 तक पूरे प्रदेश में क्रांति रथ लेकर चले तो उस के बारे में कुछ बताइये?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! 1989 में केंद्र में दोबारा सरकार बन गई थी लेकिन सरकार बनने के बाद ज्यादा दिन तक सरकार नही चल पाई थी। बाबरी मस्जिद प्रकरण के वजह से सब लोग अलग हो गये थे। इसे लेकर पहले केंद्र सरकार में झगड़ा हुआ फिर उसके बाद नेताजी ने इस्तीफा दिया था फिर चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने फिर उन्होंने भी इस्तीफा दिया उसके बाद नेताजी ने यहाँ से इस्तीफा दिया फिर चुनाव के मैदान में गये उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने।

उसी दौर में कार सेवा निकली, कार सेवा में अधिकारियों ने गोली चलाई और मुझ पर भी उस केस में एफआइआर हुआ। जब पहली बार कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने तो उस सरकार में मुझ पर बहुत से झूठे मुकदमे हुए जिसके चलते महीने तक मैं अंडरग्राउंड भी रहा फिर कोर्ट से स्टेआर्डर लिया। कार सेवकों पर जो भी लाठीचार्ज हुआ,गोलियाँ चली वो अधिकारियों ने किया था उस समय तो मौके पर हम थे ही नही फिर भी फर्जी मुकदमे मुझ पर कराये गये।

फ्रैंक हुजूरः कारसेवकों पर गोलियाँ चली, संविधान को, सामाजिक न्याय को और इस देश की धर्मनिर्पेक्ष राजनीति को बचाने के लिये नेताजी ने बहादुरी से कदम उठाया, जिसका स्वागत देश की धर्मनिरपेक्ष व सामाजिक न्याय पसंद आवाम ने किया और दूसरे तरफ भाजपा के लोगों ने मुल्ला मुलायम जैसे नारों को उछाला उसका खूब प्रचार प्रसार किया गया। उस समय आपका कहाँ खड़े थे? आप क्या सोच रहे थे?

शिवपाल सिंह यादवः हम तो पार्टी का काम करने लगे थे। इटावा और उसके आसपास के इलाकों में पार्टी का काम कर रहे थे। 1991-92 में जब बाबरी मस्जिद पर हमला किया तो भाजपा की सरकार चली गई उसके बाद 1993 में जब फिर से चुनाव हुआ तो नेताजी मुख्यमंत्रीबने, कांशी राम से समझौता होने के बाद सरकार बनी थी। फिर वो सरकार 18 महीने चली कांशी राम ने समर्थन वापस ले लिया था तो सरकार गिर गई उसके बाद कुछ समय के लिये मायावती मुख्यमंत्री बनी फिर कल्याण सिंह कुछ दिन के लिये मुख्यमंत्री बने।

नेताजी ने बाबरी मस्जिद को बचाने के लिये सारा पुलिस फोर्स लगा दिया था।

फ्रैंक हुजूरः बाबरी विध्वंस के दिन आप नेताजी के साथ बैठे होंगे तो उस घटना को लेकर क्या बात हो रही थी?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! उस समय जब बाबरी मस्जिद टूटी तो मैं इटावा में था। नेताजी के समय में जब कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद पर हमला किया तब मैं लखनऊ में था। नेताजी ने तब भी बचा लिया था, पूरी पुलिस फोर्स बाबरी मस्जिद को बचाने के लिये लगाई थी। उसके बाद जब 1992 में मस्जिद गिराई गई तब मैं इटावा में था प्रदेश के लोग सहमे दिखाई दे रहे थे, बाबरी विध्वंस के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन शुरू हो गया था और भाजपा वाले बाबरी विध्वंस के समर्थन में नारे लगा रहे थे। उस समय पूरे प्रदेश में हमारी पार्टी के लोगों ने भाजपा के खिलाफ जिलाधिकारियों को ज्ञापन दिया था और हम लोगांे ने भाजपा का विरोध किया। उस समय सड़कों पर समाजवादी पार्टी के लोगों का भाजपा के लोगों से बहुत जगह तकरार भी हुआ, मुकदमे भी लिखे गये।

जैसे नेताजी ने बाबरी मस्जिद को बचाया था वैसे ही कांग्रेस भी चाहती तो बचा लेती….

फ्रैंक हुजूरः बाबरी मस्जिद पर जब हमला हुआ तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, नरसिम्हा राव तात्कालिक प्रधानमंत्री थे। आपको क्या लगता है कि बाबरी मस्जिद गिराने में कांग्रेस की भी मिलीभगत थी?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! उस समय बचाया जा सकता था, वो प्रधानमंत्री थे। अगर चुप नही बैठे होते तो बचाया जा सकता था, जब संविधान की धज्जियाँ उड़ रही थी तब अगर चुप नही बैठते तो बचाया जा सकता था, देश के प्रधानमंत्री थे। जिस तरह से 1990 में नेताजी ने बचाया था उस तरह से बचाया जा सकता था।

फ्रैंक हुजूरः क्या कांग्रेस ने मंडल-कमंडल की राजनीति में कमंडल की राजनीति को हवा दी और देश में भाजपा की राजनीति को बढ़ने का मौका दिया?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! चुप रहना ही एक तरह का समर्थन ही था, जब संविधान की धज्जियाँ उड़ रही थी कोर्ट में मामला पहुँच चुका था तो फिर प्रधानमंत्री को रक्षा करना चाहिये था।

“जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी”

फ्रैंक हुजूरः उसी दौर में मंडल आयोग लागू हुआ था। उस समय मंडल, कमंडल की राजनीति जैसे मुहावरे गढे जा रहे थे जिसमें मंडल की राजनीति नेताजी की राजनीति का मुख्य केंद्र था। समाजवादी पार्टी के घोषणापत्र में भी मंडल कमीशन को शामिल किया गया था। आज सबसे ज्यादा हमले दलित- पिछडों के अधिकारों पर हो रहे हैं, इसे आप कैसे देखते हैं?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! आरक्षण के मामले में जैसे इस समय पिछडों की संख्या 54 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है और पिछडों को अभी भी 27 प्रतिशत ही आरक्षण मिल रहा है। हमारी माँग है कि हर वर्ग, जाति को उसके जनसंख्या के हिसाब से आरक्षण दो। पिछड़े हैं, अति पिछड़े हैं, दलित हैं, अति दलित हैं, सबकी गिनती करके उनका हक दे दो। “जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी”

फ्रैंक हुजूरः क्या आप लोग “संख्या के हिसाब से भागीदारी” के आंदोलन को तेज करने जा रहे हैं?

शिवपाल सिंह यादवः हाँ, इस मुद्दे को लेकर हम अभी पिछडों की एक बैठक बुलायेंगे फिर निर्णय लेंगे।

फ्रैंक हुजूरः नव उदारवादी नीतियों के बाद सरकारी कम्पनियों का भी नीजिकरण हुआ जिसका खामियाजा दलित-पिछडों को भुगतना पड़ा क्योंकि प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण नीति को नहीं किया गया है। तो क्या आप प्राइवेट सेक्टर में भी प्रतिनिधित्व की बात करेंगे?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! प्राइवेट और सरकारी सभी में हिस्सेदारी मिलनी चाहिये जिसे लेकर हम लोग जल्द ही बैठक करेंगे और बड़ा सम्मेलन बुलायेंगे जिसमें हमारी यही माँग होगी।

फ्रैंक हुजूरः क्या जब आपकी पार्टी सत्ता में वापस आयेगी तो आप लोग इस प्रतिनिधित्व के मुद्दे को लेकर कोई कानून बनायेंगे जिससे सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में सबको आबादी के हिसाब से हक मिले?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! ये हमारे हाथ में तो नही है लेकिन ये हमारा मुद्दा है और हम अपने राष्ट्रीय नेतृत्व कोई से मुद्दे पर राय देंगे कि सरकार इसे लेकर कानून बनाये।

फ्रैक हुजूरः आप अपने पहले चुनाव के बारे में कुछ बताईये?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! 1996 में जब नेताजी संसद में चले गये तो उसके बाद जसवंतनगर की सीट खाली हो गई। उस समय मैने जसवंतनगर से पहला चुनाव लड़ा। पहली बार हम 13000 से जीते फिर जब दूसरा चुनाव हुआ तो वो चुना वह 52000 वोट से जीते इसी तरह तीसरा चुनाव लगभग 32000 से और चैथा चुनाव 81000 से जीते थे। इसमें दो बार हम मंत्री भी रहे। 2012 में मुझे मंत्री पद से बर्खास्त भी किया गया।
मुझे जिस भी मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली उस विभाग में मैंने सब से बेहतर काम किया। मुझ पर एक भी आरोप नहीं है।

फ्रैंक हुजूरः परिवार में हुए विवाद को लेकर कुछ कहना चाहते हैं?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! उसमें तो मुझे कुछ नही कहना है बस इतना कहना चाहूँगा कि 2012 में जब हम मंत्री बने जो भी हमें विभाग मिले मैने उसमें सबसे बेहतर काम किया। आज तक मुझ पर कोई आरोप भी नही लगा है। पीडब्ल्यूडी में इतनी चैड़ी चैड़ी सड़के बना दी जो कभी नही बन सकती थी। पचास कोऑपरेटिव बैंकों में से पच्चीस बैंक बंद होने के कगार पर थे, मैने सभी बैंक चला दिये। कोऑपरेटिव का चुनाव मैने पूरी निष्पक्षता से करा दिया था कही से एक भी शिकायत नही मिली थी।

राजस्व सहिंता राजस्व विभाग में 36 वर्षों से लागू नही हो पा रहा था मैंने उसे लागू कराया जिससे किसानांे को उनके दरवाजे पर न्याय मिल जाय कहीं पर भी उसे भागना न पड़े। मैने बुंदेलखंड में कई बाँध बनाये थे वहाँ पारिछा में पानी पीने वाला बाँध भी बनाया था जिसका उद्घाटन अखिलेश ने किया।

नोटबंदी और जीएसटी ने छोटे व्यापार खत्म कर दिए, किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया।

फ्रैंक हुजूरः उत्तर प्रदेश और बिहार में किसानों के आत्महत्या की परम्परा कभी नही रही लेकिन हाल के दिनों में यहाँ किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो गये। अभी अखिलेश यादव ने महोबा का दौरा किया, वहाँ एक किसान ने आत्महत्या कर ली थी तो उस परिवार से मिलने गये थे। किसान बहुत ज्यादा तनाव के दौर से गुजर रहा है ऐसे में भारत सरकार इजरायल के किसानी के मॉडल को यहाँ लागू करना चाहती है जोकि पूरी तरह मशीन पर आधारित है जबकि हमारे देश में अभी किसानों की स्थिति इतनी अच्छी नही है कि वो महँगी मशीनों को खरीद सके। किसानांे की इस स्थिति पर क्या कहना चाहेंगे आप?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! जब मैं सिंचाई मंत्री था तो एक बार इजरायल का दौरा किया था। इजरायल में तो बहुत ज्यादा पानी की कमी है लेकिन हमारे यहाँ तो कमी पानी की नही है। हमारे यहाँ मैनेजमेंट बहुत खराब है अगर हम बारिश के पानी को संग्रहित कर लेने में सफल हो जाएँ तो हमें कभी पानी की समस्या से नही जूझना पड़ेगा। हमारे यहाँ बारिश होती है तो बारिश का पानी नालों और नहरों के माध्यम से सीधा समुद्र में चला जाता है।

मैने तो इजरायल में देखा है कि जितना भी नाले का गंदा पानी होता है उसको पहले साफ कर लेते हैं फिर तालाब बनाकर उसमें डाल देते हैं जो सिंचाई के काम आ जाता है। हमारे यहाँ तो नदियों में बहुत समस्या है जैसे गंगा नदी ही गंदी होती जा रही है, भाजपा सरकार ने तो सफाई अभियान भी चलाया है जिसका बजट बीस हजार करोड ़रखा है, चार साल को गये कुछ नही हुआ अभी तक।

जब उमा भारती जल संसाधन मंत्री थी तब मैने उनसे कहा था कि हमें पाँच सौ करोड ही दे दो हम नदियों को साफ कर देंगे। अगर नदियाँ गहरी कर दी जाय, नाले के गंदे पानी को नदियों में डालने के बजाय बडे बडे तालाब बनाकर उसमें डाला जाय तो किसानों के लिये पानी की समस्या ही खत्म हो जायेगी। मैने मैनपुरी में दो और इटावा में तीन नदियों को गहरा किया है। पहले वहाँ एक भी फसल पैदा नही हो पाती थी अब तो दो फसल हो जाती है। अगर इस तरह से काम किया जाये तो समस्या खत्म हो जायेगी लेकिन इसके लिये सरकार को निर्णय लेना होगा। यहाँ तो सरकार निर्णय क्या ले रही है? नोटबंदी का निर्णय ले रही जिससे व्यापार खत्म हो गया। अब किसान आत्महत्या क्यों कर रहा है? पहले तो किसान को पानी नही दे पाती सरकार फिर खाद महँगा हो गया है जिसके चलते किसान कर्ज में डूबा हुआ है। अगर किसी तरह किसान फसल पैदा कर भी देता है तो उसके लिये बजार में अच्छे दाम नही मिलते क्योंकि बिचैलियों की लूट मची हुई है। किसानांे को इस बार भी समर्थन मूल्य न मिल सका क्योंकि अधिकारी और दलाल पैसे लूट लिये। अब किसान के परिवार भी चलाना है अपने बेटे, बेटी की शादी भी करनी है तो यह सब कैसे करेगा किसान इस हालात में, बच्चे को अच्छे स्कूल में पढ़ाना भी है क्योंकि सरकारी स्कूल बर्बाद हो चुके हैं। यही सारी वजहें किसानो में तनाव का कारण है।

फ्रैंक हुजूर: क्या आप अगले लोकसभा में चुनाव लड़ेंगे?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! अभी तो मैं विधायक हूं, अभी मेरे पास चार साल का समय है लेकिन जो फैसला या जो आदेश होगा करेंगे।

फ्रैंक हुजूरः अगर राष्ट्रीय नेतृत्व आपको लोकसभा चुनाव लड़ने को कहते हैं तो आप चुनाव लड़ेंगे?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! वैसे तो मेरा मन नही है सांसद बनने का क्योंकि परिवार में बहुत से सांसद हैं तो हम विधानसभा ही पसंद करेंगे।

मेरा तो हमेशा प्रयास रहा है कि सब लोग एकसाथ आये

फ्रैंक हुजूरः बसपा-सपा के गठबंधन को लेकर क्या कहना चाहेंगे? क्या कांग्रेस भी शामिल होगी इस गठबंधन में? सीटों के बँटवारे का आँकड़ा क्या होगा?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! अभी सीटों के बँटवारे को लेकर हमने कोई विचार नही किया है। गठबंधन में तो सभी को शामिल होना चाहिये। मेरा तो हमेशा प्रयास रहा है कि सब लोग एकसाथ आयें। जब हमारी सरकार थी तब भी हमने प्रयास किया था, लालू, नीतीश, देवेगौड़ा, शरद, ओमप्रकाश चैटाला, कमल मोरारका, अंसारी बंधु और जितने भी छोटे छोटे विभिन्न जातियों के दल थे उन सब से हमारी बात हुई थी। मैं तो पहले से ही जोड़ने की बात कर रहा था अगर हम सबको जोड ़लिये होते तो आज हम सरकार में होते। लेकिन अच्छा है अगर भाजपा को हराना है तो सबको एक साथ रहना चाहिये।

फ्रैंक हुजूरः इस चुनाव में कांग्रेस की भूमिका को कैसे देखते हैं? पिछले चुनाव में तो गठबंधन में थे?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! कांग्रेस से हमारी बात कभी नही हुई न तब हुई थी न अब हो रही है बाकि पार्टी के जो जिम्मेदार लोग हैं वो बात कर रहे हैं वो करें। हमारी सहमति रहेगी।

फ्रैंक हुजूरः राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच कुछ वर्षों में जो नजदीकियाँ बढ़ी हैं उसको आप कैसे देखते हैं?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! इस समय अगर भाजपा को हराना है तो सब लोगांे को एकसाथ आना पड़ेगा। अब ये सब वो लोग समझे कि एक दूसरे से कैसे गठबंधन हो सीटों का बँटवारा कैसे हो, बाकि अगर शीर्ष नेतृत्व मुझ से सलाह लेना चाहेगा तो हम जरूर देंगे। अगर सलाह की जरूरत नही होगी तो वो जो भी फैसला लेंगे उसमें हमारी सहमति होगी।

फ्रैंक हुजूरः फूलपुर व गोरखपुर चुनाव में बसपा के सहयोग से जीत मिली। क्या इस सपा-बसपा गठबंधन को लेकर आपसे भी कुछ बात हुई थी?

शिवपाल सिंह यादवः नही, हमारी कोई बात नही हुई थी। इधर बीच दो बार प्रोफेसर साहब से बात हुई है। अब अगर राष्ट्रीय नेतृत्व कोई सलाह लेना चाहेगा तो जरूर देंगे।

फ्रैंक हुजूरः लोहिया जी के जमाने में जब समाजवाद का उदय हुआ तो उस समय गैर कांग्रेसवाद के लिये लोग एकजुट हो रहे थे। उसी आधार पर नेताजी ने अखिलेश को कांग्रेस से गठबंधन न करने को कहा था और आज भाजपा के विरोध में ऐसी स्थिति बन गई है कि कांग्रेस को साथ लेकर चलना पड रहा है। इस पर क्या कहना चाहेंगे?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! आचार्य नरेंद्रदेव, लोहिया और जयप्रकाश जी के समाजवादी आंदोलन की राह पर चलकर नेताजी ने राजनीति की है। एक समय था जब गैर कांग्रेसवाद चला था तब ये सब मिले थे फिर कांग्रेस को हटाया था और जो इस समय भाजपा के खिलाफ एकजुटता का माहौल चल रहा है वो इसलिये हो रहा क्योंकि भाजपा ने जनता से जो भी वादे किये थे उसे पूरा कर पाने में असफल रही, वो चाहे किसानों का सवाल हो या नौजवानों का, सबको पंद्रह लाख देने की बात कही थी, हर साल दो करोड नौकरियाँ देने का वादा किया था।

एक भी वादा न पूरा कर सकी भाजपा। सौ दिन के अंदर भ्रष्टाचार को खत्म करने की बात कही थी लेकिन हम तो देख रहे हैं कि भ्रष्टाचार पाँच गुना बढ़ गया। इस समय थाने में जो व्यक्ति केस लिखवाने जाता है उससे भी पैसा लेता है थानेदार और अगर अज्ञात के नाम से केस दर्ज हो जाता है तो पुलिस उस पूरे इलाके से पैसा वसूलती है। मेरी तो सरकार से माँग है कि इस चार साल के अंदर जितने भी अधिकारी हैं उन सबकी सम्पत्ति की जाँच करा लें।

नोटबंदी के समय का भ्रष्टाचार देखना हो तो बैंक कर्मचारियों के बैंक खाते चेक करा ले, इनकम टैक्स अधिकारियों के खाते चेक करा ले। अब जीएसटी को देख लीजिये जब जीएसटी लागू करना था तब बोला गया कि केवल एक टैक्स लगेगा लेकिन यहाँ तो हर चीज पर अलग अलग टैक्स लग रहा है।
छोटे व्यापारी रोज का सौ पाँच सौ कमाते हैं उन पर जीएसटी का नियम लगा दिया वो गरीब अब कहाँ से चार्टटेड एकाउंटेंट लायेगा? कहाँ से वकील लायेगा?

फ्रैंक हुजूरः उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर क्या कहना चाहेंगे?

शिवपाल सिंह यादवः केंद्र और प्रदेश दोनों के बारे में मैने सब कुछ तो बता ही दिया है, कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नही करूँगा। हम ये तो जानते हैं कि योगी जी खुद तो ईमानदार हैं लेकिन नीचे कितना भ्रष्टाचार है, उस पर तो अंकुश लगायें।
पूरा प्रदेश जानता है कि अगर मुझे मुख्यमंत्री बनना होता तो मैं 2003 में बन गया होता

फ्रैंक हुजूरः एक आखिरी सवाल। बहुत से लोग कहते हैं कि शिवपाल सिंह यादव के अंदर मुख्यमंत्री बनने की चाह है, आप इसको किस तरह से देखते हैं?

शिवपाल सिंह यादवः देखिये! अभी तक तो मेरे अंदर कभी भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा नही रही है। पूरा प्रदेश जानता है कि अगर मुझे मुख्यमंत्री बनना होता तो मैं 2003 में बन गया होता। उस समय हमारे 144 विधायक थे, चाहे कल्याण सिंह के विधायक हो या अजीत सिंह के विधायक हो सब हमारे साथ थे बाकि जो 40 विधायक टूटकर आये थे वो भी हमारे साथ थे।

उस समय नेताजी दिल्ली थे और नेताजी मना भी कर रहे थे कि सरकार नही बनेगी क्यों बना रहे हो? तो हमें बनना होता तो उसी समय मुख्यमंत्री बन गये होते। अभी तक तो मेरे मन में कभी नही आया लेकिन मौका आयेगा तो देखेंगे। मेरे नसीब में नही है तो नही है। हमने देखा है बहुत से लोगों की जिंदगी निकल जाती है काम करते करते लेकिन विधायक तक नही बन पाते हैं और बहुत से ऐसे लोग हैं नसीबवाले जिन्होंने कोई काम नही किया है वो एमएलसी, विधायक, मंत्री तक बने बैठे हैं।

(इंटरव्यू का अनुवाद- रत्नेश यादव)