मोदी ने बागपत में खूब की जुमलेबाजी, धरने पर बैठे दम तोड़ चुके गन्ना किसान की सुध तक नही ली

आईएनएन भारत डेस्क
प्रधानसेवक नरेन्द्र मोदी ने बागपत जिले में आज सोनीपत से पलवल तक जाने वाले पूर्वी पेरिफल कारिडोर का उद्घाटन किया। उन्होंने अपनी पुराने शैली में फिर से सबका साथ, सबका विकास और रोजगार से लेकर गन्ना किसानों की बेहतरी तक के सभी सवालों पर जुमलेबाजी की परंतु उनकी बातों की गंभीरता और सच्चाई इसी से जाहिर हो जाती है कि उन्होंने जिले में अपनी समस्याओं को लेकर धरने पर बैठे एक किसान उदयवीर सिंह की मौत पर कुछ नही कहा और ना ही कोई अफसोस जाहिर किया।

दरअसल, मोदी का पूरा भाषण कैराना सीट पर होने वाले लोकसभा के उप चुनाव पर केन्द्रित था और यदि अपनी समस्याओं को लेकर धरने पर बैठे किसान की मौत का जिक्र उनके भाषण में आ जाता या वह वहां चले जाते तो जाहिर है कि उनकी चुनावी जुमलेबाजी बेअसर हो जाती। इसी कारण मोदी ने ना उक्त गन्ना किसान की मौत पर कुछ कहा और ना ही योगी सरकार के सत्ता में आ जाने के बाद बिजली दारों में चार गुना बढ़ोतरी हो जाने और किसानों की लागत बढ़ जाने पर कुछ बोला जिसके कारण किसान धरने पर बैठे हैं।

मोदी ने बागपत जिले में जिस जगह पूर्वी पेरिफल कारिडोर का उद्घाटन किया उदयवीर नामक जिवाणां गांव के किसान की मौत की जगह उसके महज 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बडौत तहसील में है और माीड़िया से लेकर राजनीतिक हलकों में इस मौत के कारण अभी तक भी सभी जगह माहौल गर्म है। परंतु प्रधानसेवक तो छोड़िये योगी सरकार के किसी उच्चाधिकारी अथवा नेता तक ने उस जगह पर जाकर संवेदना व्यक्त करना तक गंवारा नही किया।

ध्यान रहे कि बागपत की तहसील बडौत में 50 से अधिक गन्ना किसान धरने पर बैठे हैं और उन्ही में से एक किसान उदयवीर सिंह की धरने पर बैठे मौत हो गयी थी। धरने पर बैठे और शहीद हो गये किसान की सुध लेने सपा से लेकर रालोद और कांग्रेस तक के सभी नेता पहुंचे हैं परंतु योगी सरकार के किसी मंत्री अथवा उच्चाधिकारी को अभी तक यहां आने का समय नही मिला। वहीं सबका साथ, सबका विकास का नारा देने वाले देश के प्रधानसेवक नरेन्द्र मोदी भी 27 मई को कैरान के मद्देनजर चुनावी जुमलेबाजी करके चलते बने और जिले के गन्ना किसान बड़ौत में धरना देते ही रह गये। बता दें कि किसानों की समस्याओं में से एक समस्या बिजले के आसमान छूते दाम और किसानों पर बकाया है। यह दोनों ही मसले ऐसे हैं जिन्हें हल करना भाजपा सरकार के ही हाथ में है और जो हल नही हो रहे हैं। किसान समस्याओं से त्रस्त आंदोलन कर रहे हैं और प्रधानमंत्री चुनावी जुमलेबाजी में व्यस्त हैं।