सुप्रीम कोर्ट ने प्रोटेम स्पीकर के अधिकार किये सीमित, फ्लोर टेस्ट का होगा लाइव प्रसारण

आईएनएन भारत डेस्क
प्रोटेम के सवाल पर कांग्रेस और जेडीएस सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तो विशेषज्ञों की इस पर राय थी कि कोर्ट फिर से राज्यपाल के आदेश को नही बदलेगा परंतु फ्लोर टेस्ट निष्पक्ष हो सके इसके बारे में निर्देश अवश्य दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट इसी प्रकार का फैसला लिया और प्रोटेम स्पीकर को बहाल रखते हुए बहुमत परीक्षण के लिए होने वाले फ्लोर टेस्ट को निष्पक्ष बनाने के लिए कुछ निर्देश जारी किये।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये इन निर्देशों से जहां प्रोटेम स्पीकर के अधिकार सीमित हुए हैं तो वहीं लाइव प्रसारण और पूरे बहुमत परीक्षण की वीडियोग्राफी करवाने से बहुमत परीक्षण के लिए होने वाले फ्लोर टेस्ट की निष्पक्षता कुछ हद तक सुनिश्चित हुई है। विधानसभा सचिव पूरी प्रक्रिया की रिकार्डिंग करेंगे और कुछ क्षेत्रीय चैनलों को भी लाइव टेलिकास्ट की इजाजत दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि प्रोटेम स्पीकर के लिए आज का एकमात्र एजेंडा विश्वास प्रस्ताव का है। इससे साफ होता है कि स्पीकर ऐसा कुछ नहीं कर सकता, जिससे किसी भी पक्ष की वोटिंग पर असर हो। लेकिन प्रोटेम स्पीकर के पास कुछ अधिकार हैं, जिनका इस्तेमाल हो सकता है. वो यह कर सकता है कि हाथ उठाकर या वॉइस वोट के जरिए फैसला करे। विपक्षी दल डिवीजन चाहेंगे, जहां हर विधायक पार्टी व्हिप के हिसाब से वोट करे और हर वोट गिना जाए, जिससे हार जीत पर कोई संदेह न हो।

कर्नाटक विधानसभा के नियम यह कहते हैं कि अगर एक सदस्य भी मांग करता है, तो स्पीकर को डिवीजन के हिसाब से वोटिंग करानी होगी। भाजपा चाहेगी की वॉइस वोट के जरिए फैसला हो। इससे भाजपा को वो मिल जाएगा, जो वो चाहती है। परंतु ऐसी स्थिति में विपक्ष के पास फिर सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प बना रहेगा।

अगर स्पीकर वॉइस वोट कराते हैं, तो निश्चित ही विपक्ष डिवीजन की मांग करेगा। परंतु देखना यह होगा कि क्या स्पीकर इस नियम को मानते हैं अथवा अनदेखा करते हैं, ताकि यह लड़ाई कुछ दिन और चले? अभी आज के तमाशे का सबसे बड़ा खेल यही बाकी है।